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बिहार से सटा एक ऐसा हिल स्टेशन जहाँ दिखता है शिमला जैसा नजारा

                          

तपती गर्मी में करें बादलों की सैर वो भी 250 रुपये में

सुपौल। शायद आपको विश्वास ना हो पर यह सच है कि केवल 250 रुपये में आप दो घंटे की यात्रा कर शिमला और मनाली जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन का आनन्द ले सकते हैं। रास्ते में ठंडी हवा के झोंके और भेडेटार के स्काई वॉक पर बादलों के बीच टहलने का मज़ा, ये आपकी यात्रा को शानदार बनाते हैं वो भी आपके बजट में।

यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और रोमांचक अनुभवों के लिए पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ठंडी हवाओं और बादलों के बीच बसे इस पहाड़ी इलाके को प्रकृति का अनमोल रत्न कहा जा सकता है। पहाड़ों से घिरा यह क्षेत्र नेपाल के कोशी प्रदेश में स्थित है। राजधानी विराटनगर से इसकी दूरी करीब 70 किमी है। पर्यटन के उद्देश्य से यह इलाका काफी समृद्ध है। बादलों के ऊपर पहाड़ों पर स्थित स्काई वॉक यहाँ का सबसे रोमांचक स्थान है जहां आप शीशे पर चलते हुए हजारों फुट नीचे का रोमांचक नजारा देखते हैं, वहीं पाथीभारा मंदिर के दर्शन बिना आपका सफर पूर्ण नहीं होगा।


नेपाल के पूर्वी क्षेत्र में बसा भेडेटार, धरान से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर 1420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। धरान-धनकुटा सड़क मार्ग पर यात्रा करते समय भेडेटार एक आदर्श पड़ाव है
, जो कोशी अंचल के पहाड़ी जिलों की यात्रा को और भी यादगार बनाता है। भेडेटार का सबसे बड़ा आकर्षण इसका मनोरम दृश्य है। बादलों के बीच बसा यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है। सुबह के समय कोहरे और बादलों के बीच सूर्योदय का नजारा देखने लायक होता है। यहाँ की हरियाली, ठंडी हवाएँ और शांत वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर एक ताजगी भरा अनुभव प्रदान करते हैं।


बिहार या नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के लोगों के लिए यहाँ की यात्रा करना काफी आसान और सुविधाजनक है। जोगबनी सीमा पार कर विराटनगर (नेपाल) से भेडेटार का बस किराया नेपाली 300 रुपये (भारतीय रुपये 200/=) है इस प्रकार आप केवल 250 रुपये में भेडेटार पहुँच कर वहाँ की वादियों का आनंद ले सकते हैं। वहीं यदि आप अपनी निजी भारतीय गाड़ियों से यहाँ घूमना चाहें तो भन्सार कटा कर (विदेशी गाड़ियों के लिए टैक्स अदा कर) यात्रा कर सकते हैं। कोसी बैरेज के रास्ते भेडेटार की दूरी करीब 70 किमी है यानि इस रास्ते भी आसानी से आप भेडेटार पहुँच सकते हैं।

भेडेटार में होटल, गेस्टहाउस या होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है। 1500 रुपये से 2500 रुपये में डबल बेड वाले रूम उपलब्ध है। हमारी टीम भेडेटार के Hideaway होटल में रुकी थी जहां प्रत्येक कमरे की बालकोनी से प्रकृति का अदभुत नजारा दिखता था। प्रत्येक क्षण प्रकृति का बदलता नजारा मानो मंत्रमुग्ध कर रहा था ।



स्काई वॉक: रोमांच का नया ठिकाना


हाल ही में भेडेटार में निर्मित स्काई वॉक टावर पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन गया है। 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) के टिकट मूल्य पर यह स्काई वॉक आसपास के पहाड़ों, घाटियों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। यह खासकर युवाओं और रोमांच प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है।


फ्री फॅाल :  फ्रीफॅाल का शुल्क भी 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) ही है। लेकिन दोनों का एक साथ टिकट लेने पर 1000 रुपये के स्थान पर मात्र 750 रुपये (भारतीय 469 रुपये) का भुगतान करना पड़ेगा। बच्चों और वृद्धों के लिए विशेष रियायत है । यदि आप 40 से अधिक लोगों के समूह में आते हैं तो स्काई वाक के लिए 40 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रहे है।


पाथीभारा मंदिर : भेडेटार के पास सानो (छोटी) पाथीभारा मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो स्थानीय और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है। इसके अलावा, आसपास के ट्रैकिंग ट्रेल्स और हाइकिंग रूट्स साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। धरान-भेडेटार मोटो राइड भी बाइकर्स के बीच काफी प्रसिद्ध है, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से अनुभव करने का शानदार अवसर प्रदान करता है।


नमस्ते झरना:  नमस्ते झरना वर्षों से इस क्षेत्र में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। मात्र 65 रुपये (भारतीय 41 रुपये) में झड़ने के निर्मल जल का आनंद ले सकते है।


सर्वश्रेष्ठ समय:
 फरवरी से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का सुहावना मौसम भेडेटार घूमने के लिए आदर्श है।

स्थानीय भोजन: यहाँ वेज और नॉनवेज, दोनों प्रकार के व्यंजन आपको मिलेंगे। स्थानीय व्यंजनों जैसे ढेड़ो, गुन्द्रुक और सेल रोटी का आनंद लें सकते हैं। स्थानीय लोगों के खाने में थकाली काफी प्रसिद्ध है जिहाँ प्लेट में विभिन्न प्रकार के साग सब्जी होते है। ठंडी जलवायु होने की वजह से सेहत के लिए विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ की भी सुविधा रहती है।

सुरक्षा सुझाव:

स्थानीय नियम : यदि आप निजी वाहन से आ रहे हैं तो भन्सार लेना होगा। भन्सार लेते  समय आपको एक ग्रीन स्टिकर दिया जाएगा जिसे आपको वाहन पर चिपका देना है। इससे आप अनावश्यक जाँच प्रक्रिया से बच जाएंगे। अपना आधार कार्ड अवश्य साथ में रखें।

सावधानियाँ: पहाड़ी ईलाका होने के कारण आपको अनुभवी ड्राईवर की आवश्यकता होगी। ठंडी जलवायु के कारण गर्म कपड़े साथ रखें, खासकर सुबह और शाम के समय। आप सुरक्षा के मद्देनजर अपने मोबाईल में इंटरनेशनल रोमिंग कि सुविधा ले सकते हैं या फिर नेपाल के किसी भी operater का सीम कार्ड खरीद सकते हैं। इसके लिए भारतीय पहचान पत्र (आधार कार्ड) मान्य है।

बजट : मौजूदा समय में विराटनगर से भेडेटार पहुँचने में यात्रा की अनुमानित लागत (पब्लिक ट्रांसपोर्ट से) करीब 200 से 300 रुपये खर्च होंगे। हालांकि आपको पर्याप्त राशि लेकर चलना चाहिए।

समय प्रबंधन: हमारी सलाह है कि आप यदि इस हिल स्टेशन आने की सोंच रहे हैं तो दो दिनों का प्लान बनाए ताकि आप सभी मुख्य स्थानों की सैर कर सकें। यदि आप एक दिन की यात्रा का प्लान बनाते हैं तो आप सुबह 7 बजे विराटनगर से यात्रा शुरू करने पर 2 घंटे में भेडेटार पहुँच जाएंगे जहां आप स्काई वाक और फ्री फॅाल का आनन्द ले। करीब दो घंटे बाद आप आराम से पाथीभारा मंदिर की ओर निकाल सकते है। यहाँ आपको करीब 2 घंटे का समय लग जाएगा। फिर आप नमस्ते झरना की ओर बढ़ सकते हैं । शाम में आप वापसी कर सकते हैं। लेकिन सुबह का नजारा जो काफी मनमोहक होता है देखने के लिए आपको रात भेड़ेटार में गुजारनी चाहिए।

कुल मिलाकर कहा जाए तो भेडेटार प्रकृति, रोमांच और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। चाहे आप शांति की तलाश में हों, रोमांचक अनुभव चाहते हों या स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना चाहते हों, यह हिल स्टेशन हर पर्यटक के लिए कुछ न कुछ खास प्रदान करता है।

अररिया : सिटी हॉस्पिटल के निदेशक ने ईद उल फितर और रामनवमी पर दी जिलेवासियों को मुबारकबाद


अररिया।  यूं तो ईद लगातार तीन दिनों तक मनाया जाता है और तीन दिनों तक लोग  ईद की मुबारकबाद एक दूसरे को देते हैं। इसी क्रम में सिटी हॉस्पिटल अररिया के निदेशक व चेयरमैन मोहम्मद इसराइल ने ईद के मौके पर पूरे जिलेवासियों को बधाई देते हुए कहां कि ईद मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्यौहार में से एक है, इसे हम सभी को मिलजुल कर खुशी पूर्वक मनाना चाहिए।  इस मौके पर जिले वासियों एवं बच्चों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। 


उन्होंने कहा कि यह पर्व पूरे जिले वासियों के लिए खुशियां लेकर आए और हर आदमी हमेशा स्वस्थमंद रहे। अल्लाह से हमारी यही दुआ है। यह त्यौहार आपसी सद्वाव व प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने जिले के सभी लोगों से अपील की  कि वह आपस मे मिलजुल कर आपसी प्रेम, सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे के साथ पर्व को मनाएं। 

सिटी हॉस्पिटल के निदेशक मोहम्मद इसराइल ने यह भी कहा कि यह पर्व आपस में मिलाने वाली पर्व है।  दोनों समुदाय के बीच यह पर्व काफी सद्भाव पैदा करती है।  हमें इस पर्व को प्रेम व भाईचारे के रूप में माननी चाहिए। उन्होंने अंत में पूरे देशवासियों  को ईद की एक बार फिर गर्म जोशी के साथ मुबारकबाद पेश की और कहा कि ईद सभी के घर में हमेशा खुशहाली लाए। यही हमारी तरफ से पूरे जिले वासियों को दुआएं और शुभकामनाएं  हैं । 

उन्होंने कहा कि यह पर्व खुशियों का पैगाम देता है तथा सभी समुदाय को आपस में साथ-साथ लाने का प्रयास करता है । हालांकि ईद का पर्व मुसलमान का खास पर्व है, लेकिन यह सभी धर्म के बीच प्यार ,मुहब्बत, भाईचारगी व आपसी सद्भाव का पैगाम देती है। पर्व के मौके पर हम अपने आसपास पड़ोसियों का भी ख्याल रखें और ईद की खुशियों में एक दूसरे का हाथ बटाएं ,यही सच्ची ईद है। वही रामनवमी पर्व पर भी सिटी हॉस्पिटल के निदेशक ने हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए बताया कि यह पर्व हमेशा से  ही मनाया जा रहा है, यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। इसलिए यह पर्व भी आपसी प्रेम व सद्भाव से मनाई जानी चाहिए।




05 साल की इनायत फतिमा ने रखा रोजा

नागपुर : मोमिनपुरा निवासी 05 साल की मासूम इनायत फातिमा पिता मोहम्मद साजिद ने अपने जिंदगी का पहला रोजा रखा। रमजान के पाक महीने के प्रति अपने बड़ों के उत्साह से प्रेरित होकर इनायत फातिमा ने यह रोजा रखा है। रमजान के सख्त नियमों का पालन करते हुए उसने अपना रोजा पूरा की। इनायत की मम्मी नेहा कौसर ने बच्ची कि हौसला अफजाई करते हुए कहा कि उसे कुछ सूरतें और दुआ भी याद है और अरबी भी पढ़ती है। इसके रोजा रखने से घर वाले सभी खुश हैं और मुबारकबाद भी दिया। नाना, नानी, दादी, मामा, खाला, फूफी और सभी ने खुशी का इजहार किया।


नेपाल : बराहक्षेत्र के चतराधाम में पूर्ण महाकुम्भ मेला की तैयारी पूरी


 सुनसरी (नेपाल)। पृथ्वी के पहले तीर्थ स्थल बराहक्षेत्र के चतराधाम में 9 अप्रैल से लगने वाले पूर्ण महाकुम्भ मेला की की तैयारी अंतिम चरण में है। भारत सीमा से सटे सुनसरी जिले के बराहक्षेत्र नगरपालिका स्थित प्राचीन हरिद्धार चतराधाम कुम्भनगरी में 120 वर्ष के अंतराल पर होने वाले पिण्डेश्वर पूर्ण महाकुम्भ मेला को लेकर कई देशों में आमंत्रण दिया गया है। 

आयोजन समिति ने बताया कि विश्व के पांचवा महाकुम्भ की तैयारी के लिए नेपाल के 77 जिले सहित भारत, भूटान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा, नार्वे तक कुम्भ मेला का निमंत्रण दिया गया है। 

नेपाल के राष्ट्रपति करेंगे उद्घाटन

पत्रकार वार्ता के दौरान आयोजन समिति के जगदगुरू बालसन्त महाराज ने बताया कि अनुसार कुम्भ मेले का उद्घाटन राष्ट्रपति द्वारा किया जायेगा। वहीं कुम्भ मेले में नेपाल के उपराष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, प्रधान न्यायाधीश के साथ साथ केंद्र सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि, सभी सातों प्रदेश के राज्यपाल, स्पीकर, मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही अयोध्या, बनारस, वृंदावन, दिल्ली, आन्ध्रप्रदेश, बंगाल, बिहार, सिक्किम, दार्जलिंग, असम सहित अन्य क्षेत्र से जगतगुरु, धर्माचार्य, महामण्डलेश्वर, सन्त-महन्त तथा सरकार के मुख्यमन्त्री, पूर्व मुख्यमन्त्री, मंत्री, एमएलए भी मौजूद रहेंगे।

वहीं अमेरिका स्थित अन्तरराष्ट्रीय निम्बार्क आध्यात्मिक परिषद से धर्माचार्य श्री भागवतशरण जी महाराज सहित करीब 50 धर्मगुरु नेपाल के चतराधाम आ चुके है। 

कुम्भ मेला में कोटिहोम, वेदपाठ, पुराणवाचन, देश तथा विदेश के जगतगुरु, शंकराचार्य, धर्माचार्य के सहभागिता में प्रवचन, भजनकीर्तन, शास्त्रार्थ सम्मेलन, महास्नान का उद्घाटन होगा। कुम्भ मेला में करीब एक करोड़ लोगों के आने का अनुमान है।


ईद पर्व की खरीदारी के मौके पर गरीब, लाचार व बेसहारों का भी रखें ख्याल : मुफ्ती इनामुल बारी



अररिया। रहमत बरकत का मुकद्दस माह ए रमजान के 18 रोजे शुक्रवार को पूरे हो गए। वहीं खुशियों का पर्व ईद को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी है। ऐसे में जिले के एक सरकारी मदरसा के वरीय शिक्षक मुफ्ती मोहम्मद इनामुल बारी साहब ने मालदार लोगों से ईद की खरीदारी के मौके पर आसपास के जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की है। मुफ्ती सिद्दिकी ने कहा कि माहे रमजान में गरीब , लाचार, यतीम, बेसहारा जरूरमंदों की मदद करने पर अल्लाह तबारक व तआला बेहतर बदला देता है।

कुरआन व हदीश में भी है कि माहे रमजान में जरूरतमंदों की मदद करने पर सत्तर गुना अधिक सवाब मिलता है। अगर आपके आसपास या रिश्तेदारों में कोई गरीब है तो उसकी मदद जरूर करें। उन्होंने कहा कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें मदद की दरकार होती है, मगर शर्म होने कारण मांग नहीं सकते। ऐसे लोगों की मदद आप खोज कर और उन्हें छुप कर जरूर करें। हालांकि अल्लाह के नबी हजरत मोहम्मद (स) ऐसे लोगों को खोज-खोज कर मदद किया करते थे, हम सब जरूरतमंदों की मदद करेंगे तो अल्लाह हम सबको जरूरत से ज्यादा नवाजेगा और किसी गरीब बच्चों की मुस्कुराहट आपको भी खुशी देगी। इसलिए आसपास के जरूरतमंद लोगों की दिल खोलकर मदद करें। ताकि उनके घर पर भी ईद की खुशी मिल सके। इस माह में एक नेकी का बदला अल्लाह ताला सत्तर गुना ज्यादा कर देते हैं, इसलिए दिल खोल कर सदका, खैरात करें।


इस बार रमजान में प्रति व्यक्ति गेंहू के हिसाब से 50 रुपया फित्रा निकालने का हुआ एलान

  • रमजान के तीसरे जुमा पर मस्जिदों में लोगों ने अकीदत के साथ की नमाज अदा, 18 रोजा सम्पन्न



अररिया। रमजानुल मुबारक के तीसरे जुमा की नमाज में अररिया शहर के विभिन्न मस्जिदों में रोजेदार लोगों ने बड़ी संख्या में अकीदत के साथ नमाज अदा की। इसी के साथ 18 रोजा भी संपन्न हुआ। इस मौके पर शहर की सभी मस्जिद लगभग खचाखच भरी हुई थी। शहर के मस्जिद उस्मान, कूबा मस्जिद, नूरी मस्जिद, यतीम खाना मस्जिद, रजोखर मस्जिद, गैय्यारी मस्जिद, ककोरवा बस्ती मस्जिद, सिसौना बस्ती मस्जिद, जामा मस्जिद अररिया आदि में बड़ी संख्या में लोगों ने रमजान के तीसरे जुमा की नमाज अदा की।

इस मौके पर जिला की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक जामा मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना आफताब आलम मुजाहिरी ने अपनी तकरीर में कहा कि अभी रमजान का दूसरा असरा मगफिरत का चल रहा है, जो यह असरा अब दो दिन शेष रह गया है। इसके बाद 20वीं रोजा से रमजान का तीसरा असरा शुरू हो जायेगी। जो जहन्नुम से निजात का असरा होगा। जिस असरे में लोग अपने रोजा और इबादत के जरिया अपनी मगफेरत और जहन्नुम से निजात की दुआ मांगते हैं। साथ ही उन्होंने अपनी तकरीर में कहा इस माहे मुबारक में किए जाने वाली तमाम नेकियों का सवाब सत्तर गुणा तक बढ़ा दी जाती है। उन्होंने खास तौर से युवाओं को कहा की आप अभी जिस उम्र से गुजर रहे है, इसमें आपकी इबादत अल्लाह को काफी पसंद है और जवानी की इबादत का सवाब भी ज्यादा है। मौलाना आफताब आलम ने आज जुमा की नमाज में फितरा निकालने की राशि का भी ऐलान किया।

उन्होंने कहा की इस बार रमजान में प्रति व्यक्ति गेहूं के हिसाब से 50 रुपये फितरा निकालना है, जो ईद की नमाज से पहले गरीब, मजदूर, बेबस, लाचार, यतीम, विधवा और जरूरतमंद लोगों को दे देना चाहिए। कहा कि आप ये रकम उन्हें बीस रमजान तक दे देंगे तो बेहतर होगा। ताकि वो लोग भी अपने बच्चों के साथ ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।

मौलाना ने कहा कि रमजान का महीना अपने दूसरे गरीब भाइयों के साथ हमदर्दी और नेक सुलूक करने का महीना है। सदकतुल फित्र की राशि अपने गरीब रिश्तेदार और पड़ोसी को प्राथमिकता के आधार पर देना बेहतर है। इसी के साथ 18 रोजा संपन्न हो गया, अब दो दिन के बाद यानि 20 रमजान से जहन्नुम से निजात का असरा शुरू हो जायेगा, जो अंतिम असरा होगा। इसमें खूब इबादत और कुरआन मजीद की तिलावत करें। खासकर रातों में तहज्जुद की नमाज में खूब अल्लाह से मांगे। इसके बाद 20 वीं रमजान के रात्रि से ही शबेकद्र शुरू हो जायेगी, जो हजार रातों से अफजल है। इमाम साहब ने बताया कि अल्लाह के नबी मोहम्मद साहब (स) इसे ताक रातों में (खोजने) एहतमाम करने कहे हैं। वह ताक रात 21, 23, 25, 27, और 29 है। जिसे शबे कद्र की ताक रात कहा जाता है और जो हजार रातों से अफजल है।

जमाते इस्लामी अररिया ने किया दावते इफ्तार का आयोजन



अररिया। जमाते इस्लामी हिंद अररिया ने अररिया स्थित अपने दफ्तर में रोजेदार भाइयों के लिए दावते इफ्तार का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जमाते इस्लामी अररिया द्वारा आयोजित इस इफ्तार पार्टी में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। जमाते इस्लामी अररिया के अध्यक्ष मकसूद आलम, जमात के मो मोहसिन, शम्स आजम, नजरूल हसन, सादिक हुसैन, जेड ए मुजाहिद, मो तौसीफ, फारूक आजम आदि इफ्तार के आयोजन में सक्रिय दिखे। विदित हो कि अभी रमजानुल मुबारक का चौदह रोजा मुकम्मल हो चुका है। साथ ही अभी माहे मोबारक का दूसरा असरा मगफेरत का चल रहा है। जिसमे लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत में मशगूल हैं। इसके अलावा तरावीह की विशेष नमाज जिसमे पूरे कुरान पाक को नमाज के माध्यम से सुना जाता है, वो भी अधिकांश मस्जिदों में आज मुकम्मल हो चुका है, अब सभी मस्जिदों में सुरह तरावीह की नमाज जारी है। मौके पर मकसूद आलम और शम्स आजम ने बताया कि रमजान में दावते इफ्तार में आपसी प्रेम, भाईचारगी और एक दूसरे से मिलने का अवसर के साथ-साथ एक जगह बैठकर इफ्तार का मौका मिलता है। इससे समाज में अच्छे संदेश जाता है। दावते इफ्तार में राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, जमाते इस्लामी से जुड़े लोगों के अलावा दुकानदार भाई बड़ी संख्या में मौजूद थे।

सदका ए फितर प्रति व्यक्ति 50 रुपया जरूरतमंदों के बीच अदा करने का करें एहतमाम : काजी अतिकुल्लाह रहमानी

  • दारुल कजा इमारत ए शरिया अररिया के माध्यम से किया गया ऐलान- ईद से पहले पहले, बल्कि अभी से ही जकात व सदका ए फितर की रकम जरूरतमंदों के बीच करें अदा

अररिया। जिला मुख्यालय स्थित इमारत ए शरिया अररिया के काजी अतिकुल्ला रहमानी ने सदका ए फितर अदा करने का ऐलान किया है। कहा कि प्रत्येक आदमी पौने दो किलो गेहूं की कीमत के मुताबिक कम से कम 50 रूपय अदा करें। काजी अतिकुललाह रहमानी ने कहा कि हर मुसलमान पर वाजिब है कि वह अपनी और अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से सदका ए फितर की रकम कम से कम 50 रुपए जरूरतमंदों के बीच अदा करें। उन्होंने कहा कि ईद से पहले फितरा व जकात की रकम अदा करना वाजिब है। उन्होंने कहा कि फित्रा की रकम गरीबों, यतीमों,लाचारों व बेवाओं के बीच वितरण करना जरूरी है। ताकि जरूरतमंदों के घर में भी लोग ईद की खुशी में शामिल हो सके। कहा कि ईद खुशियों का पर्व जरूर है, लेकिन यह खुशी खुद के ही घर तक सीमित रह जाए, ऐसी शिक्षा इस्लाम नहीं देती है। अपनी खुशी के साथ पड़ोसी व समाज में रह रहे यतीमों व गरीबों के घर भी रमजान व ईद की खुशी मिले, यही इस्लाम का पैगाम है।


उन्होंने बताया कि सदका ए फितर उन तमाम लोगों पर वाजिब है, जिनके पास जरूरियाते जिंदगी के अलावा भी सामान मौजूद हो, उस पर सदका ए फितर वाजिब है। जकात और फितर निकालने का उद्वेश्य यह है कि जरूरतमंद की मदद हो सके और वह भी ईद की खुशी में शामिल हो सके। इधर माहे रमजान का पहला असरा रहमत का पूरा होने चला है। ग्यारह रमजान से दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू हो जायेगा। इस दौरान सभी अकीदतमंद रोजा रखने के साथ अल्लाह की बंदगी भी करें और अल्लाह से अपनी गुनाहों की मगफिरत की दुआ मांगने का एहतमाम भी करें। उन्होंने कहा 87 ग्राम सोना व 612 ग्राम चांदी के बराबर मालियत रखने वाले व्यक्ति पर ढाई फीसदी जकात निकालना फर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुकद्दस महीने के दरमियान सदका फितर व जकात की रकम जरूरतमंदों के बीच वितरण करने से अल्लाह तबारक व ताआला इसका बेहतर बदला देता है। जकात की रकम अदा करने से आदमी सभी बलाओं व आफतों से महफूज रहता है तथा माल व दौलत मेल कुचैल से पाक भी हो जाता है। इतना ही नही जकात अदा करने से दौलत में बढ़ोतरी और बरकत भी होती है।

रमजान माह में सभी के साथ नरमी का करें बर्ताव : मुफ्ती इनामुल बारी



  • इस माह में गरीबों पर और अल्लाह के राह पर खूब खर्च करें
  • रमजान का प्रथम दस दिन रहमत का चल रहा अशरा, करें खूब इबादत


अररिया। मुकद्दस महीना रमजान का 8 रोजा पूरा होने को लेकर सभी रोजेदारों में काफी उत्साह है। खासकर बच्चों में भी हर्ष व्याप्त है। इस महीने में रोजा रखने व पांच वक्त की नमाज अदा करने के साथ साथ मुस्लिम समुदाय के लोग ईशा नमाज के बाद बीस रिकात तराबीह की विशेष नमाज भी अदा करने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। मुफ्ती इनामुलबारी साहब ने कहा कि माहे रमजान सब्र करने का महीना है और सब्र करने का बदला अल्लाह तबारक व तआला बेहतर बदला अता फरमाता है। रोजा अल्लाह के लिए है, इसलिए रोजा का बदला अल्लाह खुद देंगे। माहे रमजान रहमत, बरकत व फजीलत वाला महीना है। इस माह में रोजा रखने के दौरान भूख और प्यास का एहसास न हो तो रोजा रखना कैसा है।
उन्होंने कुरआन व हदीश का हवाला देते हुए कहा भूख और प्यास, गरीबी का एहसास दिलाता है कि किस तरह लोग भूख की शिद्दत को बर्दाश्त करते हैं। इस मुकद्दस माह के दरमियान रोजेदारों को इफ्तार कराने में काफी बड़ी फजीलत हासिल है और इफ्तार कराने में भाईचारगी कायम रहने के साथ-साथ अल्लाह बरकत भी अता फरमाता है। उन्होंने कहा कि माहे रमजान सब्र करने का महीना है और इस माह में किए गए एक नेकी का बदला अल्लाह सत्तर गुना अधिक देता है। इधर रोजा रखने को लेकर सभी रोजेदारों में काफी उत्साह कायम है यहां तक कि महिलाएं भी घरेलू काम-काज पूरा करने के साथ माहे रमजान के रोजे भी रखने से पीछे नहीं है।

बताया कि कुछ उजर छोड़कर बांकी सभी मुसलमान मर्द-औरत पर रोजा रखना फर्ज है। इस माह में एक रात ऐसी आती है, जो तिरासी बरस इबादत करने से अफजल है, जिसे शबे कद्र कहते हैं। इसलिए सारे मुसलमानों को शबे कद्र की रात को ताक रात में खोजना चाहिए और इस रात में खूब इबादत करते हुए अल्लाह से दुआ मगफिरत करनी चाहिए। इस पाक महीने में जहां तक हो सके सदका, फितर, जकात आदि से गरीबों और मोहताजों, खासकर पड़ोसियों व रिश्तेदारों की मदद करनी चाहिए।

रमजान में पड़ोसियों का रखें खास ख्याल : मौलाना कासिम नूरी कासमी



अररिया। रमजान सब्र का महीना है, इसलिए रमजान में पड़ोसियों का खासकर ज्यादा ख्याल रखें। उन्हें अपने अफ्तारी में साथ बैठाएं। उक्त बातें सीमानचल समाज सेवा मंच के अध्यक्ष व जमियत उलेमा हिंद के सक्रिय सदस्य मौलाना कासिम नूरी कासमी ने रमजानुल मुबारक के फैजीलत पर कही।  उन्होंने कहा कि रमजान महीने की शुरुआत हो चुकी है। रमजान हिजरी कैलेंडर और कमरी साल का नौवां महीना है। मजहब-ए-इस्लाम मे रमज़ान महीने की बड़ी फजीलते बयान की गई है। रमज़ान एक ऐसा बा-बरकत महीना है, जिसका इंतजार साल के ग्यारह महीने हर मुसलमान को रहता है। इस्लाम के मुताबिक़ इस महीने के एक दिन को आम दिनों की हज़ार साल से ज़्यादा बेहतर (खास) माना गया है। मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों पर रोजा फर्ज होता है, माहे-रमज़ान में रखा जाने वाला रोज़ा हर तंदुरुस्त (सेहतमंद) मर्द और औरत पर फर्ज़ होता है। रोज़ा लंबी सफर करने वालों में, छोटे बच्चों, बीमारों और सोच-समझ ना रखने वालों पर लागू नहीं होता। हालांकि, ये रोज़े इतने खास माने जाते हैं कि इन दिनों में किसी को लंबी सफर तय करने के बाद छूटे हुए आयामों का रोजा रख लें, बीमारी से ग्रस्त पीड़ित या पीड़िता के ठीक होने के बाद इन तीस दिनों में से छूटे हुए रोज़ों को रखना ज़रूरी होता है। रमज़ान में सेहरी, इफ़्तार के अलावा तरावीह की नमाज की भी बेहद अहमियत है।

 वैसे तो रमज़ान जिसे इबादत के महीने के नाम से जाना जाता है, जो इस महीने के चांद के दिखते ही शुरू हो जाता है। रमज़ान का चांद दिखते ही लोग एक दूसरे को इस महीने की मुबारकबाद देते हैं, फिर उसी रात से तरावीह नमाज का सिलसिला शुरु हो जाता है, जो लगातार तीस रातों तक तरावीह पढ़ना सुन्नत है। बताया कि तरावीह एक नमाज़ है, जिसमें इमाम (नमाज़ पढ़ाने वाला) नमाज़ की हालत में क़ुरआन पढ़कर नमाज़ में शामिल लोगों को सुनाता है। इसका मकसद लोगों की क़ुरआन के ज़रिए अल्लाह की तरफ से भेजी हुई बातों के बारे में बताना है। तरावीह को बड़े ही सुकून के साथ सुनना चाहिए और तीसों रमजान तक पढ़ना चाहिए। तरावीह को रात की आखरी, यानि इशां की नमाज़ के बाद पढ़ा जाता है। पूरे रमजान 20 रिकाअत तरावीह पढ़ना सुन्नते मोएक्केदा (जरुरी) और तरावीह में एक कुरआन सुनना भी अलग से सुन्नत है। इसमें हर मस्जिद अपनी सहूलत के मुताबिक रमज़ान के तीस दिनों में से तरावीह पढ़े जाने के दिन तय कर लेते है और उन्हीं दिनों में क़ुरआन को पूरा पढ़ते और सुनते हैं। आमतौर पर तरावीह की नमाज़ में डेढ़ से दो घंटों का वक़्त लग जाता है। 

मौलाना कासिम नूरी कासमी साहब कहते हैं कि तरावीह की नमाज अदा करने में गफलत व कोताही नहीं करें, बल्कि इमाम साहब के साथ नियत बांधे और उनके साथ ही सलाम करें। दौड़ कर या झट से रुकु में खड़ा ना हों। पूरे इत्मीनान के साथ नमाज अदा करें। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग रोजा की हालत में गुल (मंजन) करते हैं, जो कि मकरूह है और रोजा कमजोर होती है। रोज़े के मायने सिर्फ यही नहीं है कि, इसमें सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहो, बल्कि रोज़ा वो अमल है, जो रोजेदार को पूरी तरह से पाकीज़गी का रास्ता दिखाता है।

रोजा इंसान को बुराइयों के रास्ते से हटाकर अच्छाई का रास्ता दिखाता है। महीने भर के रोजों को जरिए अल्लाह चाहता है कि इंसान अपनी रोज़ाना की जिंदगी को रमज़ान के दिनों के मुताबिक़ गुज़ारने वाला बन जाए। रोज़ा सिर्फ ना खाने या ना पीने का ही नहीं होता, बल्कि रोज़ा शरीर के हर अंग का होता है। इसमें इंसान के दिमाग़ का भी रोज़ा होता है, ताकि इंसान के खयाल रहे कि उसका रोज़ा है, तो उसे कुछ गलत बाते गुमान नहीं करनी चाहिए ।उसकी आंखों का भी रोज़ा है, ताकि उसे ये याद रहे कि इसी तरह आंख, कान, मुंह का भी रोज़ा होता है ताकि वो किसी से भी कोई बुरे अल्फ़ाज ना कहे और अगर कोई उससे किसी तरह के बुरे अल्फ़ाज कहे तो वो उसे भी इसलिए माफ कर दे कि उसका रोज़ा है। इस तरह इंसान के पूरे शरीर का रोज़ा होता है, जिसका मक़सद ये भी है कि इंसान बुराई से जुड़ा कोई भी काम ना करें। 


मौलाना कासिम नूरी कासमी साहब कहते हैं कि कुल मिलाकर रमज़ान का मक़सद इंसान को बुराइयों के रास्ते से हटाकर अच्छाई के रास्ते पर लाना है। इसका मक़सद एक दूसरे से मोहब्बत, प्रेम, भाइचारा और खुशियां बांटना है। रमज़ान का मक़सद सिर्फ यही नहीं होता कि एक मुसलमान सिर्फ किसी मुसलमान से ही अपने अच्छे अख़लाक़ रखे। बल्कि मुसलमान पर ये भी फर्ज है कि वो किसी और भी मज़हब के मानने वालों से भी मोहब्बत, प्रेम, इज़्ज़त, सम्मान, अच्छा अख़लाक़ रखे। ताकि दुनिया के हर इंसान का एक दूसरे से भाईचारा बना रहे। गरीब मजलूम का ख्याल रखें। खूब सदका करें।


तरावीह की नमाज़ में गफलत ना करें : मुफ्ती मोहम्मद आरिफ सिद्दिकी



राज टाइम्स । अररिया

मगंलवार से पाक माह रमजान शरीफ का पहला रोजा शुरू हो गया है। बरकत वाली माह रमजामूल मुबारक का पहला अशरा रहमत का शुरु हो गया है। रमजानुल मुबारक के मुकद्दस महीने को अल्लाह ने नियामतों, रहमतों और पाकीजा जिंदगी के पाने के लिए बनाया है। यही वजह है कि इस महीने को विशेष इबादतों और सवाब को पाने के उद्वेश्य से ही इनको  किया  गया है। हमारे लिए यह एक जबरदस्त मौका है कि हम इस महीने में शरीयत के जरिए तय शुदा इबादतों को अंजाम देकर मकसद ए जिंदगी हासिल कर सकते हैं। उक्त बातें मदरसा दारूल उलूम फैज ए रहमानी के संस्थापक अध्यक्ष सह जमियत उलेमा ए हिंद के सक्रिय सदस्य मौलाना मुफ्ती मुहम्मद आरिफ सिद्दीकी साहब ने कहा।

भरगामा अंतर्गत वीरनगर विशरिया पंचायत स्थित मदनी नगर के निकट मुफ्ती साहब ने फरमाया कि रमजानूल मुबारक की खास इबादतों में से एक अहम इबादत नमाज तरावीह है। इसी इबादत के चंद पहलुओं पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह खास नमाज तरावीह, जिसे हर जमाने में मुसलमान बहुत ही एहतमाम के साथ अदा करते हुए आए हैं और इसके जरिया रूहानियत का सफर तय करते रहे हैं।

आज भी हम में से खास तादाद इस नमाज को अदा करते हैं, लेकिन इस नमाज के जो आदाब और उसूल  हैं , उनकी पाबंदी हम नहीं कर पाते। इसी वजह से जो रूहानी सुकून और पाकिजगी हमें मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाती है और हम दामन में शवाब समेटने के बजाय  खाली दामन रह जाते हैं।  हमे नमाज तरावीह को बड़े ही सुकून के साथ अदा करनी चाहिए। उसकी फजीलत पर मौलाना  मुफ्ती मो आरिफ सिद्दीकी साहब कहते हैं कि जिसका मफहूम है कि हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह अन्हु से रिवायत है कि रसूल स वसल्लम ने फरमाया जो शख्स रमजान की रातों में ईमान के साथ और शवाब की नियत से खड़ा हो, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ हो जाते हैं। एक दूसरी हदीस में है कि जिसका मफहूम है कि रसलूल्ला सल्ला वसल्लम ने फरमाया कि अल्लाह ताला ने हमलेगों पर रमजान के रोजे फर्ज किए हैं और मैंने रात के क्याम यानि तरावीह को सुन्नत बताया है तो जो शख्स ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ रोजा रखेगा और तरावीह पढ़ेगा, तो वह गुनाहों से इस तरह पाक साफ हो जाएगा कि वह गोया आज ही पैदा हुआ हो। 

मुसलमानों के लिए नमाज़ तरावीह काफी अहमियत रखता है। नमाज तराविह में एक बड़ी कोताही हमलोगों से यह होती है कि सफों को मुकम्मल करने का एहतमाम नहीं करते। कुछ लोग बीच में सफ़ खाली होने के बावजूद पीछे नमाज पढ़ते हैं और जहां चाहते हैं वहां खड़े हो जाते हैं। हालांकि दो सफों के दरमियान फासले का मसला यह है कि दो सफों के दरमियान पांच या छह फिट से ज्यादा फासला ना हो, साथ में मिलकर खड़ा होना और कंधे से कंधे को मिलाने का ताकीदी हुक्म आहादीश में वारिद हुई है। यानी मुक्तादियों को जमात की नमाज में मिल कर खड़ा होना चाहिए। जमात की नमाज में दो लोगों के दरमियान जगह खुला छोड़ना खिलाफ सुन्नत है।

इसी तरह कुछ लोग वह होते हैं जो पीछे बैठे रहते हैं या मस्जिद में इधर-उधर घूमते रहते हैं और जब इमाम तरावीह को रूकू की तकबीर कहते हैं तो वह दौड़ कर नमाज में शामिल होते हैं। यह एक नापसंदीदा तरीका और बे अदबी वाला अमल है। नमाज में शिरकत के ताल्लुक से फिकहा में  ये  लिखा है कि जमात में शरीक होने के लिए मस्जिद की तरफ दौड़ कर या तेजी से (वकार के खिलाफ अंदाज में) जाने की ममानियत हदीस मुबारक में मौजूद है। जमात में शिरकत के लिए सुकून से और बावकार तरीके से चलना चाहिए।  

खुलासा यह है कि हमें  तरावीह की नमाज मुकममल एहतमाम  के साथ और तमाम आदाब और उसूल की रिआयत के साथ अदा करनी चाहिए ,ताकि हमारा रूहानी सफर सही सिमट में रवान रवान रहे और हम मंजिल पर पहुंच जाएं।