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राज टाइम्स
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बिहार से सटा एक ऐसा हिल स्टेशन जहाँ दिखता है शिमला जैसा नजारा
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राज टाइम्स
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तपती गर्मी में करें बादलों की सैर वो भी 250 रुपये में
सुपौल। शायद आपको विश्वास ना हो पर यह सच है कि केवल 250 रुपये में आप दो घंटे की यात्रा कर शिमला और मनाली जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन का आनन्द ले सकते हैं। रास्ते में ठंडी हवा के झोंके और भेडेटार के स्काई वॉक पर बादलों के बीच टहलने का मज़ा, ये आपकी यात्रा को शानदार बनाते हैं वो भी आपके बजट में।
यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और रोमांचक अनुभवों के लिए पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ठंडी हवाओं और बादलों के बीच बसे इस पहाड़ी इलाके को प्रकृति का अनमोल रत्न कहा जा सकता है। पहाड़ों से घिरा यह क्षेत्र नेपाल के कोशी प्रदेश में स्थित है। राजधानी विराटनगर से इसकी दूरी करीब 70 किमी है। पर्यटन के उद्देश्य से यह इलाका काफी समृद्ध है। बादलों के ऊपर पहाड़ों पर स्थित स्काई वॉक यहाँ का सबसे रोमांचक स्थान है जहां आप शीशे पर चलते हुए हजारों फुट नीचे का रोमांचक नजारा देखते हैं, वहीं पाथीभारा मंदिर के दर्शन बिना आपका सफर पूर्ण नहीं होगा।

बिहार या नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के लोगों के लिए यहाँ की यात्रा करना काफी आसान और सुविधाजनक है। जोगबनी सीमा पार कर विराटनगर (नेपाल) से भेडेटार का बस किराया नेपाली 300 रुपये (भारतीय रुपये 200/=) है इस प्रकार आप केवल 250 रुपये में भेडेटार पहुँच कर वहाँ की वादियों का आनंद ले सकते हैं। वहीं यदि आप अपनी निजी भारतीय गाड़ियों से यहाँ घूमना चाहें तो भन्सार कटा कर (विदेशी गाड़ियों के लिए टैक्स अदा कर) यात्रा कर सकते हैं। कोसी बैरेज के रास्ते भेडेटार की दूरी करीब 70 किमी है यानि इस रास्ते भी आसानी से आप भेडेटार पहुँच सकते हैं।
भेडेटार में होटल, गेस्टहाउस या होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है। 1500 रुपये से 2500 रुपये में डबल बेड वाले रूम उपलब्ध है। हमारी टीम भेडेटार के Hideaway होटल में रुकी थी जहां प्रत्येक कमरे की बालकोनी से प्रकृति का अदभुत नजारा दिखता था। प्रत्येक क्षण प्रकृति का बदलता नजारा मानो मंत्रमुग्ध कर रहा था ।
स्काई वॉक: रोमांच का नया ठिकाना
हाल ही में भेडेटार में निर्मित स्काई वॉक टावर पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन गया है। 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) के टिकट मूल्य पर यह स्काई वॉक आसपास के पहाड़ों, घाटियों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। यह खासकर युवाओं और रोमांच प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है।
फ्री फॅाल : फ्रीफॅाल का शुल्क भी 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) ही है। लेकिन दोनों का एक साथ टिकट लेने पर 1000 रुपये के स्थान पर मात्र 750 रुपये (भारतीय 469 रुपये) का भुगतान करना पड़ेगा। बच्चों और वृद्धों के लिए विशेष रियायत है । यदि आप 40 से अधिक लोगों के समूह में आते हैं तो स्काई वाक के लिए 40 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रहे है।
पाथीभारा मंदिर : भेडेटार के पास सानो (छोटी) पाथीभारा मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो स्थानीय और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है। इसके अलावा, आसपास के ट्रैकिंग ट्रेल्स और हाइकिंग रूट्स साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। धरान-भेडेटार मोटो राइड भी बाइकर्स के बीच काफी प्रसिद्ध है, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से अनुभव करने का शानदार अवसर प्रदान करता है।
नमस्ते झरना: नमस्ते झरना वर्षों से इस क्षेत्र में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। मात्र 65 रुपये (भारतीय 41 रुपये) में झड़ने के निर्मल जल का आनंद ले सकते है।
स्थानीय भोजन: यहाँ वेज और नॉनवेज, दोनों प्रकार के व्यंजन आपको मिलेंगे। स्थानीय व्यंजनों जैसे ढेड़ो, गुन्द्रुक और सेल रोटी का आनंद लें सकते हैं। स्थानीय लोगों के खाने में थकाली काफी प्रसिद्ध है जिहाँ प्लेट में विभिन्न प्रकार के साग सब्जी होते है। ठंडी जलवायु होने की वजह से सेहत के लिए विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ की भी सुविधा रहती है।
सुरक्षा सुझाव:
स्थानीय नियम : यदि आप निजी वाहन से आ रहे हैं तो भन्सार लेना होगा। भन्सार लेते समय आपको एक ग्रीन स्टिकर दिया जाएगा जिसे आपको वाहन पर चिपका देना है। इससे आप अनावश्यक जाँच प्रक्रिया से बच जाएंगे। अपना आधार कार्ड अवश्य साथ में रखें।
सावधानियाँ: पहाड़ी ईलाका होने के कारण आपको अनुभवी ड्राईवर की आवश्यकता होगी। ठंडी जलवायु के कारण गर्म कपड़े साथ रखें, खासकर सुबह और शाम के समय। आप सुरक्षा के मद्देनजर अपने मोबाईल में इंटरनेशनल रोमिंग कि सुविधा ले सकते हैं या फिर नेपाल के किसी भी operater का सीम कार्ड खरीद सकते हैं। इसके लिए भारतीय पहचान पत्र (आधार कार्ड) मान्य है।
बजट : मौजूदा समय में विराटनगर से भेडेटार पहुँचने में यात्रा की अनुमानित लागत (पब्लिक ट्रांसपोर्ट से) करीब 200 से 300 रुपये खर्च होंगे। हालांकि आपको पर्याप्त राशि लेकर चलना चाहिए।
समय प्रबंधन: हमारी सलाह है कि आप यदि इस हिल स्टेशन आने की सोंच रहे हैं तो दो दिनों का प्लान बनाए ताकि आप सभी मुख्य स्थानों की सैर कर सकें। यदि आप एक दिन की यात्रा का प्लान बनाते हैं तो आप सुबह 7 बजे विराटनगर से यात्रा शुरू करने पर 2 घंटे में भेडेटार पहुँच जाएंगे जहां आप स्काई वाक और फ्री फॅाल का आनन्द ले। करीब दो घंटे बाद आप आराम से पाथीभारा मंदिर की ओर निकाल सकते है। यहाँ आपको करीब 2 घंटे का समय लग जाएगा। फिर आप नमस्ते झरना की ओर बढ़ सकते हैं । शाम में आप वापसी कर सकते हैं। लेकिन सुबह का नजारा जो काफी मनमोहक होता है देखने के लिए आपको रात भेड़ेटार में गुजारनी चाहिए।
कुल मिलाकर कहा जाए तो भेडेटार प्रकृति, रोमांच और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। चाहे आप शांति की तलाश में हों, रोमांचक अनुभव चाहते हों या स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना चाहते हों, यह हिल स्टेशन हर पर्यटक के लिए कुछ न कुछ खास प्रदान करता है।
नीट की परीक्षा में अभिनव कुमार झा ने 685 अंक लाकर जिले का नाम क्या रोशन ,ऑल इंडिया में 7175 वां रैंक किया प्राप्त
लेखक:
शशांक राज
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फारबिसगंज (अररिया)। अररिया जिला के फारबिसगंज प्रखंड स्थित ग्राम पोस्ट ढोलबज्जा के रहने वाले तारानंद झा के पौत्र एवं किसान जितेंद्र कुमार के पुत्र अभिनव कुमार झा ने नीट की परीक्षा में 685 अंक प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया है । उन्हेंं ऑल इंडिया में 7175 रैंक प्राप्त हुआ है। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा विद्या मंदिर फारबिसगंज से पास किया है । इंटर की पढ़ाई उच्च माध्यमिक विद्यालय ढोलबज्जा से इंटर पास करके स्कूल के छात्र अभिनव कुमार झा ने घर पर रहकर ही ऑनलाइन क्लास कर अपनी तैयारी की थी और पहले ही प्रयास में बेहतर प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक सफलता प्राप्त कर सिर्फ अपने गांव ही नही जिला का नाम रौशन किया है । फोरबिशंज अनुमंडल के ढोलबज्जा स्थित अपने आवास पर उन्होंने बताया कि मेरी स्वर्गवासी दादी शोभा देवी की ये इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बन कर लोगों की मदद कर सकूं, उनके आशीर्वाद से ही ये बड़ी सफलता मिली है। बताया गया कि उनके पिता जितेंद्र कुमार एक छोटे किसान हैं और उनकी मम्मी बंदना देवी एक कुशल गृहणी हैं। अभिनव कुमार एक किसान परिवार से हैं और आज अपने परिवार के सपनो को साकार कर अभिनव कुमार झा बहुत खुश है। उनके परिवार के सभी लोग और दोस्तों ने इस सफलता पर बधाई दी है । उनके गांव ढोलबज्जा और स्कूल में भी खुशी व्याप्त है। बधाई देने वालों में स्थानीय मुखिया गौरी देवी पति बीरेंद्र पासवान, उच्च माध्यमिक विद्यालय किरकिचिया के प्रधानाध्यापक श्री रमेश कुमार साह , ढोलबज्जा के प्रधान अध्यापक अब्दुल सलाम , जीप अध्यक्ष आफताब अज़ीम पप्पू , इश्तियाक हसन, मुन्ना, शिक्षक साजिद आलम, तबरेज आलम, चाचा आदित्य कुमार ,सत्येंद्र कुमार एवं रविंद्र कुमार, अनोज झा आदि ने बधाई दी देते हुए उनके उज्वल भविष्य की कामना की है।
05 साल की इनायत फतिमा ने रखा रोजा
लेखक:
शशांक राज
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नागपुर : मोमिनपुरा निवासी 05 साल की मासूम इनायत फातिमा पिता मोहम्मद साजिद ने अपने जिंदगी का पहला रोजा रखा। रमजान के पाक महीने के प्रति अपने
मानवाधिकार कार्यक्रम सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी गई कई अहम जानकारियां
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शशांक राज
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- मानवाधिकार के अभाव में हम अपना जीवन व्यतीत नहीं कर सकते : डॉ आरएन भारती
अररिया। किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी, बराबरी और
मौके पर ट्रस्ट के सचिव संजय झा बतौर कार्यक्रम प्रभारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रशिक्षक ट्रस्ट के महासचिव आदिल हुसैन, ट्रस्ट के महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रभा भारती, अधिवक्ता उत्पल कुमार, अधिवक्ता मो जमशेद ने अपने वक्तव्य के माध्यम से उपस्थित महिला व पुरुष लोगों को प्रशिक्षित और जागरूक किया। वहीं दूसरे सत्र में ट्रस्ट के संस्थापक सह अध्यक्ष डॉ आरएन भारती ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मानवाधिकार कानून को जाने बिना आप अपने अधिकारों को नहीं पा सकते हैं।
ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष सह प्रशिक्षण प्रभारी राम नारायण विश्वास ने अपने सम्बोधन में कहा मानवाधिकार आयोग द्वारा बनाए गए कानून एवं संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों से लाभान्वित होने एवं विभिन्न प्रकार के शोषण से मुक्त होने के लिए हमें जागरूक होना होगा, तभी ही हमारा हक मिलेगा।
ट्रस्ट के महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा प्रभा भारती ने महिलाओं व बच्चों के अधिकार, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण आदि पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं आज किसी से कम नहीं हैं, वे सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं, हमें शिक्षित और जागरूक होने की जरूरत है। सभी प्रशिक्षक ने मानवाधिकार आयोग कानून, महिलाओं, बच्चों, श्रम एवं बाल श्रम कानून आदि के संदर्भ में विस्तार पूर्वक समझाया। कार्यक्रम में सैंकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन चार सत्रों में किया गया। प्रत्येक प्रशिक्षक का सत्र एक घंटा तीस मिनट का रहा, जो सुबह 10:00 बजे प्रारंभ होकर शाम 05:45बजे समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान सभी के लिए चाय, नाश्ता और भोजन का भी प्रबंध ट्रस्ट द्वारा किया गया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रुणा भारती, बोर्ड सदस्य पुतुल भारती, ट्रस्ट के कला संस्कृति प्रकोष्ठ अररिया के अध्यक्ष गायक शेखर कुमार शशि, वीआईपी जिला अध्यक्ष सह प्राचार्य राजेश बहरदार, मंतलाल मंडल, गयानंद ठाकुर अनिता देवी, किरण देवी, सौरभ भारती, गौरभ भारती,आरती देवी, प्रेमलता कुमारी, हीरा देवी, प्रेमलता देवी, सीमा राय, सौरव कुमार भारती, गौरव कुमार भारती, नीतीश कुमार, मो हसीब के साथ-साथ सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष डा आरएन भारती ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
तरावीह की नमाज़ में गफलत ना करें : मुफ्ती मोहम्मद आरिफ सिद्दिकी
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राज टाइम्स
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राज टाइम्स । अररिया
मगंलवार से पाक माह रमजान शरीफ का पहला रोजा शुरू हो गया है। बरकत वाली माह रमजामूल मुबारक का पहला अशरा रहमत का शुरु हो गया है। रमजानुल मुबारक के मुकद्दस महीने को अल्लाह ने नियामतों, रहमतों और पाकीजा जिंदगी के पाने के लिए बनाया है। यही वजह है कि इस महीने को विशेष इबादतों और सवाब को पाने के उद्वेश्य से ही इनको किया गया है। हमारे लिए यह एक जबरदस्त मौका है कि हम इस महीने में शरीयत के जरिए तय शुदा इबादतों को अंजाम देकर मकसद ए जिंदगी हासिल कर सकते हैं। उक्त बातें मदरसा दारूल उलूम फैज ए रहमानी के संस्थापक अध्यक्ष सह जमियत उलेमा ए हिंद के सक्रिय सदस्य मौलाना मुफ्ती मुहम्मद आरिफ सिद्दीकी साहब ने कहा।
भरगामा अंतर्गत वीरनगर विशरिया पंचायत स्थित मदनी नगर के निकट मुफ्ती साहब ने फरमाया कि रमजानूल मुबारक की खास इबादतों में से एक अहम इबादत नमाज तरावीह है। इसी इबादत के चंद पहलुओं पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह खास नमाज तरावीह, जिसे हर जमाने में मुसलमान बहुत ही एहतमाम के साथ अदा करते हुए आए हैं और इसके जरिया रूहानियत का सफर तय करते रहे हैं।
आज भी हम में से खास तादाद इस नमाज को अदा करते हैं, लेकिन इस नमाज के जो आदाब और उसूल हैं , उनकी पाबंदी हम नहीं कर पाते। इसी वजह से जो रूहानी सुकून और पाकिजगी हमें मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाती है और हम दामन में शवाब समेटने के बजाय खाली दामन रह जाते हैं। हमे नमाज तरावीह को बड़े ही सुकून के साथ अदा करनी चाहिए। उसकी फजीलत पर मौलाना मुफ्ती मो आरिफ सिद्दीकी साहब कहते हैं कि जिसका मफहूम है कि हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह अन्हु से रिवायत है कि रसूल स वसल्लम ने फरमाया जो शख्स रमजान की रातों में ईमान के साथ और शवाब की नियत से खड़ा हो, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ हो जाते हैं। एक दूसरी हदीस में है कि जिसका मफहूम है कि रसलूल्ला सल्ला वसल्लम ने फरमाया कि अल्लाह ताला ने हमलेगों पर रमजान के रोजे फर्ज किए हैं और मैंने रात के क्याम यानि तरावीह को सुन्नत बताया है तो जो शख्स ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ रोजा रखेगा और तरावीह पढ़ेगा, तो वह गुनाहों से इस तरह पाक साफ हो जाएगा कि वह गोया आज ही पैदा हुआ हो।
मुसलमानों के लिए नमाज़ तरावीह काफी अहमियत रखता है। नमाज तराविह में एक बड़ी कोताही हमलोगों से यह होती है कि सफों को मुकम्मल करने का एहतमाम नहीं करते। कुछ लोग बीच में सफ़ खाली होने के बावजूद पीछे नमाज पढ़ते हैं और जहां चाहते हैं वहां खड़े हो जाते हैं। हालांकि दो सफों के दरमियान फासले का मसला यह है कि दो सफों के दरमियान पांच या छह फिट से ज्यादा फासला ना हो, साथ में मिलकर खड़ा होना और कंधे से कंधे को मिलाने का ताकीदी हुक्म आहादीश में वारिद हुई है। यानी मुक्तादियों को जमात की नमाज में मिल कर खड़ा होना चाहिए। जमात की नमाज में दो लोगों के दरमियान जगह खुला छोड़ना खिलाफ सुन्नत है।
इसी तरह कुछ लोग वह होते हैं जो पीछे बैठे रहते हैं या मस्जिद में इधर-उधर घूमते रहते हैं और जब इमाम तरावीह को रूकू की तकबीर कहते हैं तो वह दौड़ कर नमाज में शामिल होते हैं। यह एक नापसंदीदा तरीका और बे अदबी वाला अमल है। नमाज में शिरकत के ताल्लुक से फिकहा में ये लिखा है कि जमात में शरीक होने के लिए मस्जिद की तरफ दौड़ कर या तेजी से (वकार के खिलाफ अंदाज में) जाने की ममानियत हदीस मुबारक में मौजूद है। जमात में शिरकत के लिए सुकून से और बावकार तरीके से चलना चाहिए।
खुलासा यह है कि हमें तरावीह की नमाज मुकममल एहतमाम के साथ और तमाम आदाब और उसूल की रिआयत के साथ अदा करनी चाहिए ,ताकि हमारा रूहानी सफर सही सिमट में रवान रवान रहे और हम मंजिल पर पहुंच जाएं।
रमजान में खूब इबादत और सदका करें : मुफ्ती मो आरिफ सिद्दीकी
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राज टाइम्स
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चांद का हुआ दीदार,पहला रोजा आज से
राज टाइम्स । अररिया
रमजान उल मुबारक का चांद नजर आया और आज से रमजानुल मुबारक का पाक महीना शुरू हो गया है, इसके लिए अभी से ही वह सारी काम निपटा लें,जो रमजान के दिनों में अक्सर लोग करते हैं। चूंकि यह अल्लाह का खास बरकत वाला महीना है। इस पाक बाबरकत वाली महीने में सिर्फ और सिर्फ इबादत का ही मकसद होनी चाहिए। रमजानुल मुबारक का महीना शुरू होने वाली है, उसका हमलोग अभी से ही तैयारी शुरू कर दें। इस माह में ज्यादा से ज्यादा कुरआन पाक की तिलावत करनी चाहिए। उक्त बातें भरगामा प्रखंड अंतर्गत वीर नगर विशहरिया पंचायत स्थित मदनी नगर में मदरसा दारूल उलूम फैज ए रहमानी के संस्थापक अध्यक्ष मुफ्ती मो आरिफ सिद्दीकी साहब ने रमजान शरीफ के आमद पर कही।
उन्होने कहा कि सखी वह शख्स है, जिसने इल्म दीन सीखा और फैलाया। उन्होनें कहा कि हमेशा हक की आवाज को बुलंद करें, अगर आप हक की आवाज बुलंद करेंगे, तो कोई आपकी गर्दन नहीं मार देगा और अगर गर्दन कट भी जाती है तो शर्म की क्या बात है। एहसास शुक्र के साथ अल्लाह के दरबार में पहुंच जायेंगे। कभी दुख में आंसू ना बहावे, क्योंकि आप वह खुश नसीब हो जिसे अल्लाह ने आजमाइश के काबिल समझा।
मुफ्ती आरिफ साहब ने कहा कि एक अल्लाह से डरें, लोगों से डरना छोड़ दें क्योंकि रिज्क (रोजी) किसी के हाथों में नहीं है। अल्लाह ताला जिसे चाहते हैं, बेहिसाब देते हैं। घमंड, अहंकार से दूर रहें। चूंकि अहंकार मुक्त जीवन खुशियों का आधार है। अहंकार का विसर्जन एवं दुर्गुणों को छोड़ना मानव जीवन का सबसे बड़ा सद्गुण है। जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारने के लिए निरंतर सीखते रहना चाहिए। जीवन के हर पहलू में समानता का हर पहलू रखे। किसी प्राणी का मजाक न उड़ाएं। अपनी उपलब्धियों का बखान न करें। सब के साथ समानता व योग्यता के साथ विनम्रता रखें।
उन्होंने कहा कि कठिनाइयों से कभी नहीं घबराना चाहिए, क्योंकि सितारे हमेशा रात में ही चमकते हैं। रमजान में तहज्जुद नमाज का एहतमाम करें। उन्होंने कहा कि गीबत चुगली से परहेज करें। हमेशा तिलावत व अल्लाह का जिक्र करते रहें। उन्होनें कहा कि वजू से शक्ल (रूप), कुरआन से अकल और नमाज से नस्ल पाक होती है। सदका करते रहने से उम्र बढ़ती है, दुआ से बिगड़ी काम भी संवर जाते है इसलिए अल्लाह से खूब दुआ मांगनी चाहिए। हर शख्स के लिए दीनी तालीम जरूरी है। मुदर्रिसे इस्लामिया, इस्लाम के मजबूत किले हैं। इसलिए रमजान के पाक माह में मदरसे के लिए आर्थिक रूप से ख्याल रखें। तराविह की नमाज सुकून से सुनें और अदा करें। इमाम के साथ ही तरावीह की नमाज का नियत कर हाथ बांध लें और इमाम साहब के साथ ही शुरू करें। तरावीह की नमाज को मजाक ना बनाएं। अल्लाह ताला जजाए खैर अता फरमाए आमीन।
BIHAR/ सुपौल- मिथिला के नवविवाहिता ने पति की लंबी आयु के लिए मनाई मधुश्रावणी पर्व
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राज टाइम्स
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आश नारायण मिश्रा/ वीरपुर (सुपौल)। पति की लंबी आयु के लिए मिथिला के लोकपर्व मधुश्रावणी पर्व की शुरुआत 28 जुलाई से हुई थी और बुधवार 11 अगस्त को हरियाली तीज के साथ सम्पन्न हुई। मिथिलानी समूह की कविता देवी बताती हैं कि मधुश्रावणी पर्व मिथिला की नवविवाहिताओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। उनके लिए यह एक प्रकार से साधना है। नवविवाहिता लगातार 15 दिनों तक चलने वाले इस व्रत में सात्विक जीवन व्यतीत करती है। बिना नमक का खाना खाती है। जमीन पर सोती हैं और झाड़ू नहीं छूती है।
वहीं अर्चना देवी बताती हैं कि इस साधना में प्रति दिन सुबह में स्नान ध्यान कर नवविवाहिता बिशहरा यानि नाग वंश की पूजा और मां गौरी की पूजा अर्चना करती है। फिर गीत नाद होता है और कथा सुनती है। इस पूरे पर्व के दौरान
15 दिनों की अलग-अलग कथाएं हैं। इसमें भाग लेने के लिए घर के साथ आस-पड़ोस की महिलाएं भी आती हैं। शाम को अपनी सखी सहेलियों के साथ फूल लोढ़ने जाती हैं। इस बासी फूल से ही मां गौरी की पूजा होती है। 15 दिनों तक यही क्रिया चलती रहती है।ससुराल की सामग्रियों से होती हैं पूजा-
यह पर्व नव विवाहिता अपने मायके में मनाती है। इस पर्व के लिए ससुराल से सामान आता है। इसमें विवाहिता के साथ-साथ पूरे परिवार का कपड़ा, मिठाई, खाजा, लड्डू, केला, दही आदि होता है। यह सामान मधुश्रावणी के दिन सभी के बीच बांटा जाता है और खिलाया जाता है।
क्या है पौराणिक महत्व-
स्कंद पुराण के अनुसार नाग देवता और मां गौरी की पूजा करने वाली महिलाएं जीवनभर सुहागिन बनी रहती हैं। ऐसी मान्यता है कि आदिकाल में कुरूप्रदेश के राजा को तपस्या से प्राप्त अल्पायु पुत्र चिरायु भी अपनी पत्नी मंगलागौरी की नाग पूजा से दीर्घायु होने में सफल हुए थे। अपने पुत्र के दीर्घायु होने से प्रसन्न राजा ने इसे राजकीय पूजा का स्थान दिया था। इस पर्व का मिथिला में विशेष महत्व है।
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जीवन शैली
बिहार
मिथिलांचल-सीमांचल
Life Style- आखिर पैरों में सोने के आभूषण क्यों नहीं पहने जाते ? आपको आज हम बताते हैं इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
लेखक:
Rajesh Sharma
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सेंट्रल डेस्क (राज टाइम्स)
आभूषण महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, इसलिए ज्यादातर महिलाएं इसे पहनती हैं। परन्तु गौरतलब है कि ज्यादातर महिलाएं सोने के जेवरात को सिर से लेकर गले, हाथ और कमर तक ही पहनती हैं। पैरों में आभूषणों के नाम पर चांदी की पायलें और बिछिए पहने जाते हैं। ये देखकर कई बार आपके भी मन में प्रश्न उठता होगा कि आखिर पैरों में सोने के आभूषण क्यों नहीं पहने जाते ? आपको आज हम बताते हैं इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण....
दरअसल आयुर्वेद में एक कहावत है- सिर गरम, पेट नरम, पैर ठन्डे, ये एक स्वस्थ व्यक्ति के लक्षण होते हैं। वहीं अगर आभूषणों की बात करें तो सोना गर्म और चांदी ठंडी प्रकृति की होती है। अर्थात पैरों को शीतलता देने के लिए ठंडी प्रकृति की चांदी पहनी जाती है, जिससे पैर शीतल रहते हैं पैरों की ये शीतलता हमारे शरीर को अत्यधिक प्रभावित करती है। पैरों को शीतल रखने के लिए रात के समय सोने से पहले पैरों को धोने का रिवाज भी हमारे घरों में है। अनुभव भी कहता है कि जब कभी किसी कारण से पैरों में जलन होने लगती है तो नींद नहीं आती। उलझन बढ़ जाती है, बेचैनी होती है।
ऐसे में शीतल चांदी की पाजेब पहनकर महिलाएं तमाम तरह की बीमारियों से बची रहती हैं। एक और बात है कि चांदी का तत्व शीतल होता है जो शीतलता भी प्रदान करता है। इसके अलावा चांदी के आभूषण चलते समय या काम करते समय पैरों से रगड़ते रहते हैं, इससे हड्डियों को मजबूती मिलती है। पहले के समय में पुरुष और स्त्रियां दोनों ही आभूषण पहनते थे, लेकिन आजकल ज्यादातर ये चलन महिलाओं तक सीमित हो गया है।
इसका धार्मिक कारण ये है कि भगवान नारायण को पीला रंग प्रिय है, इस वजह से सोना उनकी प्रिय धातु मानी जाती है। वहीं सोने को माता लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। ऐसे में यदि इसे पैरों में धारण किया जाए तो इसे मां लक्ष्मी और नारायण का अपमान माना जाता है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पैरों में सोना न पहनने के बारे में कहा गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और व्यक्ति को जीवन में तमाम आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।
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