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विराटनगर के छह आंख अस्पतालों पर सील, मानकों का पालन नहीं करने पर प्रशासन की कार्रवाई

 


विराटनगर के छह आंख अस्पतालों पर सील, मानकों का पालन नहीं करने पर प्रशासन की कार्रवाई

विराटनगर, नेपाल। नेपाल के विराटनगर में स्वास्थ्य मानकों और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने के आरोप में छह आंख अस्पतालों को सील कर दिया गया है। इसके अलावा एक अन्य आंख अस्पताल की लैब पर भी सील की कार्रवाई की गई है।

जिला प्रशासन कार्यालय मोरंग और कोशी प्रदेश स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त टीम ने लगातार दो दिनों तक विराटनगर में संचालित आंख अस्पतालों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान न्यूनतम कानूनी एवं तकनीकी मानक पूरे नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।




प्रशासन के अनुसार विराटनगर-15 रानी स्थित अखण्ड ज्योति आंख अस्पताल तथा मलाया रोड स्थित हिमाल आंख अस्पताल, नेपाल आंख अस्पताल, सञ्जीवनी आंख अस्पताल, इफ्रास आंख अस्पताल और विराट रानी आंख अस्पताल को सील किया गया है।

इसके साथ ही विराट आंख अस्पताल की लैब को भी मानक पूरा नहीं करने के कारण सील किया गया है। इस प्रकार कुल छह अस्पतालों और एक लैब पर कार्रवाई हुई है।

मोरंग के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी पवनराज कोइराला के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि संबंधित संस्थानों ने कोशी प्रदेश स्वास्थ्य निर्देशनालय से आंख उपचार केन्द्र के रूप में स्वीकृति ली थी, लेकिन वहां जटिल प्रकार की आंखों की सर्जरी और उपचार किए जा रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में आंख अस्पताल के रूप में संचालन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करना आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों में कानूनी प्रक्रिया और तकनीकी मापदंडों के उल्लंघन की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने सील की कार्रवाई की।

इस कार्रवाई के बाद विराटनगर में निजी आंख चिकित्सा सेवाओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से आगे की प्रक्रिया और संबंधित संस्थानों को मानक पूरा करने के संबंध में क्या निर्देश दिए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

स्रोत: नेपाली मीडिया रिपोर्ट, संगालोखबर — 13 अगस्त 2026।

सीमा शुल्क, आयुक्तालय पटना के अंतर्गत निवारण शाखा मुख्यालय पटना ने गुप्त सूचना के आधार पर एक ट्रक से लगभग 68 लाख मूल्य का गाँजा किया ज़ब्त



पटना। सीमा शुल्क आयुक्तालय पटना के अंतर्गत निवारण शाखा मुख्यालय पटना के अधिकारियों द्वारा प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर ट्रक संख्या JH09AH5331 की तलाशी के दौरान बेतिया कस्टम्स सर्किल कार्यालय के समीप अवैध रूप से छिपाकर लाए जा रहे गांजा को ट्रक सहित मंगलवार (30.04.2024)  को सीमा शुल्‍क के अधिकारियों ने जब्त किया। सीमा शुल्क निवारण मुख्यालय पटना के अपर आयुक्त अनीश गुप्ता को यह गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश-बिहार के बॉर्डर के रास्ते गांजे की एक बड़ी खेप को बिहार में प्रवेश कराने की योजना तस्करों द्वारा बनाई गई है। इस गुप्त सूचना के आधार पर अपर आयुक्त  के निर्देश पर सीमा शुल्क निवारण मुख्यालय पटना और बेतिया कस्टम्स सर्किल के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई तथा इस टीम के अधिकारियों ने ट्रक संख्या JH09AH5331 को पीछा करते हुए लौरिया टोल प्लाजा के पास अवरोध करते हुए पकड़ लिया।

ट्रक की सघन तलाशी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ड्राइवर के केबिन में गुप्त रूप से बने तहखाने में छिपाकर अवैध रूप से गांजा को ले जाया जा रहा था। जब्‍त किये गए गांजा का वजन लगभग 136 किलोग्राम है, जिनका अनुमानित मूल्य 68 लाख 5 हजार के करीब है। जबकि जब्त किए गए ट्रक का अनुमानित मूल्य 17 लाख 50 हजार है। इस तरह कुल जब्ती का अनुमानित मूल्य 85 लाख 55 हजार है। 

उपरोक्त गांजा को NDPS Act-1985 के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया है। इस दौरान ड्राइवर और उसके सहयोगी से अधिकारियों ने कड़ाई से पूछताछ की और उनकी संलिप्तता स्वीकार करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की कार्रवाई और न्यायिक हिरासत के लिए सक्षम न्यायालय को अनुरोध किया गया है। कुछ समय पहले ही चुनाव आयोग  के द्वारा पटना में आयोजित मीटिंग में यह दिशानिर्देश दिया गया था कि प्रतिबंधित पदार्थो के तस्करी को रोकने के लिए आवश्‍यक कार्रवाई को तीव्र गति प्रदान की जाए । पिछले कुछ समय से सीमा शुल्क आयुक्ततालय पटना के द्वारा तस्करी के खिलाफ सघन एवं व्यापक अभियान छेड़ा गया है और इसके फलस्वरूप तस्करी के अनेकों सामान जब्त किये गए हैं।


 अधिकारियों ने बताया की फिलहाल इस बात की छानबीन की जा रही है कि उपरोक्त जब्त गांजे के अवैध रूप से परिचालन में कौन-कौन लोग शामिल हैं। ये सारी कार्रवाई डॉ यशोवर्धन पाठक, आयुक्त, सीमा शुल्क (निवारण) पटना के मार्गदर्शन में पटना निवारण शाखा मुख्यालय के सहायक आयुक्त श्री प्रकाश सहाय के नेतृत्व में की गई जिसमें श्री दिलीप कुमार, सुबोध कुमार मिश्रा, मो मुमताज सभी अधीक्षक तथा मनीष कुमार, निरीक्षक ने मुख्‍य भूमिका निभाई। आयुक्त ने बताया कि तस्करी के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा तथा और भी अधिक प्रबलता से इसका कार्यान्वयन किया जाएगा एवं इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्‍त अन्य विभागों यथा रेलवे पुलिस बल, पुलिस विभाग तथा अन्य सरकारी संस्थाओं और सूचना देने वाले का भी सीमा शुल्क विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस तस्कर निरोधक काम में भविष्य में भी बेहतर समन्यवय और सहयोग अपेक्षित है ताकि ऐसी गैर कानूनी गतिविधि पर पूर्णविराम लग सके।

प्रतिबंध के वाबजूद भारत से प्याज की तथा नेपाल से चाइनीज लाइटर की हो रही तस्करी

  • रेलवे परिसर बना प्याज तस्करों का स्टॉक पॉइंट, रेल पुलिस व कस्टम है बेखबर


रेलवे परिसर में प्याज अनलोड करते वाहन। 

राज टाइम्स। जोगबनी

भारत सरकार द्वारा जारी प्याज निर्यात पर प्रतिबंध का आदेश जोगबनी सीमा पर अप्रभावी दिख रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे भारत सरकार का यह आदेश इस क्षेत्र में लागू ही नहीं है। ऐसा कहना इसलिए भी गलत नहीं होगा कि भारत में आम लोगों को प्याज कम कीमत पर उपलब्ध हो इसके लिए भारत सरकार द्वारा प्याज के निर्यात पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के महीनों बीत गए लेकिन अवैध रूप से मुख्य नाका से प्याज को धड़ल्ले से भेजा जा रहा है। बस बदला दृश्य यह है कि अब प्याज की गाड़ी नो मेंस लैंड की जगह पर खाली न हो कर रेलवे परिसर मे खाली हो रही है तथा झोले व साईकल पर लोड कर अवैध रूप से मुख्य रास्ते से ही जाता है। जबकि इसे रोकने में कस्टम, रेल सहित अन्य एजेंसी की बेखबरी समझ से पड़े है।

बताते चलें कि भारत सरकार द्वारा 29 जून 2023  से ही चीन निर्मित लाइटर के आयात पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। प्रतिबंध लगने के बाद भारतीय क्षेत्र में जोगबनी सीमा से नेपाल से भारत खुलने वाली खिड़की के माध्यम से चाइनीज लाइटर की तस्करी भारत की ओर बड़े पैमाने पर की जा रही है।

स्टोर कर रखे गए प्याज की बोरी। 

वही नेपाल – भारत द्विपक्षीय व्यापार संधि के अनुसार एक देश से आयातित सामान सीधे दूसरे देश मे निर्यात नहीं किया जा सकता, लेकिन नेपाली व्यवसायी चीन से आयात किए गए लाइटर गोदाम से चोर रास्ते के माध्यम से सीधे भारत भेज रहे हैं जिसकी पुष्टि कही न कही दबी जुबान से ही सही नेपाल भंसार विभाग भी कर रहा है।

इस सम्बन्ध मे पूछे जाने पर नेपाल भंसार विभाग के निदेशक पुण्यविक्रम खड्का ने कहा कि किसी एक देश से आयात सामग्री को सीधे तीसरे देश भेजना गैरकानूनी है। श्री खड़का ने बताया कि कितनी सामग्री आई है सिर्फ इसकी जानकारी ही भंसार को होती है, उस सामग्री को आयात करने वाला किसे बेच रहा है इसकी जानकारी नहीं होती है। किसी अन्य देश से आयातित सामग्री को नेपाली उत्पाद बता कर दूसरे देश निर्यात नहीं किया जा सकता है। खुली सीमा के कारण भारत में होने वाली प्रत्येक आर्थिक गतिविधि का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष असर नेपाल पर भी होता है। पूर्व में सुपारी, मटर, छोहारा, मरीच जैसी समग्री किसी अन्य देश से आयात कर अवैध रूप से भारत में भेजा जाता था।




आंगन से लेकर बाथरूम तक बिछाई गई पेवर ब्लाक ईंट, ढक्कन के अभाव में सोख्ता को मिट्टी से भरा

  • छातापुर प्रखंड के उधमपुर पंचायत का मामला, वार्ड सदस्यों के आवेदन पर योजनाओं की हुई जांच 

    
    सुपौल। छातापुर प्रखंड के उधमपुर पंचायत में क्रियान्वित विकास की योजनाओं में गड़बड़ी आमजनों के साथ छलावा है। सार्वजनिक मद की राशि को योजना क्रियान्वयन के नाम पर ऐसी जगह खपाया गया जो सीधे तौर पर व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने की गवाही दे रहा है। एक वार्ड सदस्य ने तो यहां तक बताया कि मात्र दो घरों को सड़क का लाभ पहुंचाने के लिए पीसीसी ढलाई के नाम पर लाखों की राशि खर्च की गई है। 
मामला सच है या झूठ इसका खुलासा तो जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा। लेकिन बुधवार को पहुंची गठित जांच टीम के मुआयना के दौरान जिस तरह की तस्वीरें सामने आई है सिस्टम को कटघरे में ला रहा है। योजना स्थलों की तस्वीरें बता रही है कि जिस योजना राशि को सार्वजनिक हित पर खर्च किया जाना था, उसे कई स्थानों पर व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के निमित्त व्यय किया गया। 
        हैरत इस बात की भी कि हालिया निष्पादित योजना स्थलों में से कई स्थानों पर सूचनापट्ट का भी अता पता नहीं था। अब जबकि पंचायत के उपमुखिया सहित नौ वार्ड सदस्यों के हस्ताक्षरित आवेदन बीपीआरओ को सौंपे गए तो संबंधितों के हाथ पांव फूल रहे हैं। हालांकि बुधवार को हुए जांच के दौरान अपनाई गई गतिविधि को लेकर भी आवेदन कर्ताओं को ऐतराज है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को भी जांच टीम के सदस्य पंचायत के दौरे पर थे। लेकिन गुरुवार को पहुंचे टीम के सदस्यों की भनक आवेदनकर्ताओं को नहीं लगी। सूत्र बताते हैं कि वार्ड सदस्यों द्वारा योजनाओं में अनियमितता को लेकर आवेदन दिए जाने के बाद से ही सिस्टम सेट करने की जुगत में संबंधित एड़ी चोटी के जोर आजमाइश पर हैं। अब बात कहां तक बनी यह तो अंदरखाने की बात है। लेकिन जब जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी तो बाद की कार्रवाई खुद ब खुद लग रहे कयासों का राज खोल देगा। 

           
    बानगी देखिए, वार्ड नंबर 12 में चंद माह पूर्व बने नाले का ढक्कन टूट गया। वार्ड नंबर सात में इस्लाम साफी के आंगन में पेवर ब्लाक ईंट बिछा दी गई। वार्ड नंबर पांच के सुरेंद्र मंडल के आंगन में पेवर ब्लाक सड़क बनीं। वहीं ब्राह्मण टोला के दो घरों को जोड़ने के लिए लाखों की राशि से पीसीसी सड़क का निर्माण हुआ। एक व्यक्ति तो ऐसे मिले जिनके आंगन में सोख्ता तो बना लेकिन ढक्कन नहीं डाले जाने के कारण मवेशी के गिरने पर उन्होंने सोख्ता में मिट्टी ही भर दिया। बात यहीं थम जाती तो और बात थी यहां तो आजाद साफी के घर के पीछे बने उनके बाथरूम तक पेवर ईंट बिछा दी गई है। 
        आवेदन के अनुसार इस कारनामे के लिए आवेदकों ने मुखिया, पंचायत सचिव सहित तकनीकी सहायक को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन बुधवार को जांच के दौरान इनकी मौजूदगी जांच की निष्पक्षता पर छाप छोड़ गई। हालांकि बुधवार को जांच टीम में शामिल सदस्यों ने योजनाओं की लंबाई चौड़ाई तो मापी, लेकिन अब इनमें 'ईमान' की मापी क्या है इसका खुलासा रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही हो पाएगा।