भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव ऋषभ देव और नगर प्रमुख अर्जुन माबोहाङ ने संयुक्त रूप से रखी आधारशिला, किसानों को मिलेगा लाभ
राज टाइम्स | नेपाल, तेह्रथुम
नेपाल के कोशी प्रदेश अंतर्गत तेह्रथुम जिले की लालीगुराँस नगरपालिका में भारत सरकार के सहयोग से बनने वाले शीतभंडार (कोल्ड स्टोर) भवन का शिलान्यास किया गया। नगरपालिका के वार्ड संख्या दो में बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला भारतीय दूतावास, काठमांडू के प्रथम सचिव ऋषभ देव और लालीगुराँस नगरपालिका के प्रमुख अर्जुन माबोहाङ ने संयुक्त रूप से रखी।
परियोजना का निर्माण भारत सरकार की लगभग 4 करोड़ 41 लाख नेपाली रुपये की वित्तीय सहायता से किया जाएगा। इसे उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (HICDP) के अंतर्गत लालीगुराँस नगरपालिका के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा।
किसानों और कृषि व्यवसाय को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित शीतभंडार भवन के निर्माण से स्थानीय किसानों को अपनी कृषि उपज के बेहतर भंडारण की सुविधा मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से फल, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के सुरक्षित रखरखाव में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शीतभंडार की सुविधा उपलब्ध होने से फसल कटाई के तुरंत बाद उपज बेचने की मजबूरी कम करने, भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को घटाने तथा किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
जिले में भारत के सहयोग से दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना
बताया गया कि तेह्रथुम जिले में भारत सरकार के सहयोग से संचालित होने वाली यह दूसरी उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना है।
लालीगुराँस नगरपालिका की आधिकारिक वेबसाइट पर भी वार्ड संख्या दो में HICDP के अंतर्गत कोल्ड स्टोर निर्माण से संबंधित निविदा का उल्लेख उपलब्ध है।
भारत सरकार के विकास सहयोग की सराहना
शिलान्यास समारोह में नगरपालिका प्रमुख सहित उपस्थित हितधारकों ने नेपाल के स्थानीय विकास में भारत सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग की सराहना की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शीतभंडार भवन का निर्माण कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देगा और लालीगुराँस नगरपालिका में टिकाऊ कृषि व्यवसाय मॉडल विकसित करने में सहायक साबित होगा।
भारत-नेपाल विकास साझेदारी को मिलेगी मजबूती
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों के साथ विकास सहयोग की लंबी परंपरा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।
लालीगुराँस में प्रस्तावित शीतभंडार परियोजना को इसी सहयोग की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है
नेपाल में धार्मिक गतिविधियों के आरोप में 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों पर कार्रवाई
मोरंग के धार्मिक शिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान पुलिस की कार्रवाई; ईसाई धर्मशास्त्र के अध्ययन और पादरी प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां जांच के घेरे में
विराटनगर/भारत-नेपाल सीमा | राज टाइम्स | 10 अक्टूबर 2026
नेपाल के मोरंग जिले में पर्यटक वीजा की आड़ में कथित रूप से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार और धार्मिक प्रशिक्षण संचालित करने का मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सुंदरहरैंचा नगरपालिका क्षेत्र से 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों को हिरासत में लिया। सभी के खिलाफ वीजा की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों की जांच शुरू की गई है। उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए काठमांडू स्थित अध्यागमन विभाग भेजा गया है।
नेपाल के सीमावर्ती मोरंग जिले में हुई इस कार्रवाई ने विदेशी नागरिकों की धार्मिक गतिविधियों, धार्मिक शिक्षण संस्थानों के संचालन और विदेशों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
धार्मिक प्रशिक्षण के दौरान हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, मोरंग जिले की सुंदरहरैंचा नगरपालिका-7 के मालती मार्ग स्थित 'नेपाल न्यू कोवेनेंट कॉलेज' में धार्मिक शिक्षा, प्रशिक्षण एवं विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। प्रशासन को सूचना मिली थी कि दक्षिण कोरिया से पर्यटक वीजा पर आए कुछ विदेशी नागरिक संस्थान में धार्मिक गतिविधियों में शामिल हैं। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित विदेशी नागरिकों के पर्यटक वीजा के उद्देश्य से अलग धार्मिक प्रशिक्षण और प्रचार गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आई। इसके आधार पर सभी 24 लोगों को हिरासत में लिया गया।
दो समूहों में पहुंचे थे दक्षिण कोरियाई नागरिक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दक्षिण कोरियाई नागरिक 6 और 7 अक्टूबर को काठमांडू से हवाई मार्ग के जरिए विराटनगर पहुंचे थे। पहले समूह में 16 तथा दूसरे समूह में आठ नागरिक शामिल थे। इसके बाद सभी सुंदरहरैंचा पहुंचे, जहां उन्हें 12 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेना था। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें छह लोग स्थानीय होटल में ठहरे थे, जबकि शेष 18 लोग धार्मिक शिक्षण संस्थान के छात्रावास में रह रहे थे।
धार्मिक शिक्षण संस्थान की गतिविधियां भी चर्चा में
कार्रवाई का केंद्र बना नेपाल न्यू कोवेनेंट कॉलेज लंबे समय से ईसाई धर्मशास्त्र के अध्ययन और प्रशिक्षण से जुड़ा बताया जा रहा है। नेपाली समाचार माध्यमों के अनुसार, इस संस्था का संचालन दक्षिण कोरिया स्थित 'लव नेपाल मिशन' के आर्थिक सहयोग से किया जा रहा है। संस्थान की ओर से सर्टिफिकेट स्तर से लेकर उच्च धार्मिक अध्ययन तक के पाठ्यक्रम संचालित करने की बात कही गई है।
नेपाली समाचार माध्यम 'रातोपाटी' की विस्तृत रिपोर्ट में उत्तरी मोरंग के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय चर्च, शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक संगठनों के माध्यम से नए पादरियों को प्रशिक्षित करने की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, शिक्षण संस्थान की वैधानिक मान्यता, वित्तीय व्यवस्था और कथित धर्मांतरण गतिविधियों के संबंध में सक्षम सरकारी अधिकारियों की अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आना बाकी है।
विदेशी आर्थिक सहयोग और स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल जरूरी
इस मामले में विदेशी आर्थिक सहायता से संचालित धार्मिक संस्थानों की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गई है। नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक प्रशिक्षण और स्थानीय नेतृत्व तैयार करने के लिए संचालित संस्थाओं की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी धार्मिक संस्था का संचालन या स्वेच्छा से धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में अपराध नहीं है। इस मामले में मुख्य कानूनी सवाल विदेशी नागरिकों द्वारा पर्यटक वीजा की शर्तों का कथित उल्लंघन है।
फारबिसगंज से पूर्णिया तक नेटवर्क होने का दावा
इस घटनाक्रम के बीच भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों, विशेषकर बिहार के फारबिसगंज और पूर्णिया क्षेत्र तक धार्मिक प्रचार से जुड़े संपर्क होने के दावे भी सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को शिक्षा, उपचार और आर्थिक सहयोग के माध्यम से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल कराने की गतिविधियां चल रही हैं।
नेपाल में क्या कहता है कानून?
नेपाल के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। साथ ही किसी दूसरे व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराने से संबंधित गतिविधियों पर कानूनी प्रतिबंध भी लागू हैं। इसके अतिरिक्त विदेशी नागरिकों को उनके वीजा की श्रेणी और निर्धारित शर्तों के अनुसार ही गतिविधियां संचालित करने की अनुमति होती है।
नेपाल पुलिस का कहना है कि संबंधित दक्षिण कोरियाई नागरिक पर्यटक वीजा पर आए थे, लेकिन धार्मिक प्रशिक्षण और प्रचार में शामिल पाए गए। अब अध्यागमन विभाग जांच के आधार पर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई तथा संभावित निष्कासन के संबंध में निर्णय करेगा।
कार्रवाई से उठे कई महत्वपूर्ण सवाल
मोरंग में 24 विदेशी नागरिकों को एक साथ हिरासत में लिए जाने के बाद कई सवाल सामने आए हैं। क्या विदेशी नागरिकों के पास धार्मिक प्रशिक्षण में भाग लेने की वैधानिक अनुमति थी? संबंधित शिक्षण संस्था को किन गतिविधियों के संचालन की अनुमति प्राप्त है? और विदेशों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा था?
इन प्रश्नों के उत्तर संबंधित प्रशासनिक और जांच अधिकारियों की आधिकारिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फिलहाल नेपाल प्रशासन की कार्रवाई ने पर्यटक वीजा के दुरुपयोग और विदेशी धार्मिक गतिविधियों की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
अंतिम जांच और कानूनी कार्रवाई के परिणाम आने तक हिरासत में लिए गए सभी नागरिकों के विरुद्ध आरोप जांच के अधीन हैं।