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बिहार : किशनपुर (सुपौल) थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन का वेतन रोकने का आदेश, पुलिस की कार्यशैली पर किशोर न्याय परिषद ने उठाए गंभीर सवाल

 




न्यायिक आदेश की अवहेलना पर किशोर न्याय परिषद सख्त; तीन दिनों में मांगा गया स्पष्टीकरण एक महीने बाद भी नहीं मिला, जिला कोषागार पदाधिकारी को वेतन रोककर कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश

सुपौल | राज टाइम्स | 09 अक्टूबर 2026

सुपौल। जिले के किशनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा एक मामला पुलिस की कार्यशैली और न्यायिक आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चैटजीपीटी की सहायता से जिलाधिकारी के नाम पर कथित फर्जी पत्र तैयार कर उसे वायरल करने के मामले में एक किशोर के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए किशोर न्याय परिषद, सुपौल ने किशनपुर थानाप्रभारी ज्ञान रंजन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

परिषद ने न्यायिक निर्देशों का अनुपालन नहीं करने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर किशनपुर थानाप्रभारी ज्ञान रंजन का वेतन अगले आदेश तक रोकने का आदेश दिया है।

इतना ही नहीं, परिषद ने जिला कोषागार पदाधिकारी, सुपौल को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह थानाप्रभारी का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकें और इस संबंध में की गई कार्रवाई से परिषद को भी अवगत कराएं।

यह आदेश 9 अक्टूबर 2026 को किशनपुर थाना कांड संख्या 213/2026 तथा जेजेबी संख्या 209/2026 में पारित किया गया है।

चैटजीपीटी से डीएम के नाम पर कथित फर्जी पत्र, यहीं से शुरू हुआ विवाद

मामले की शुरुआत सुपौल अंचल कार्यालय के नाजिर आशुतोष कुमार मिश्रा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी।

किशोर न्याय परिषद के आदेश के अनुसार, सामुदायिक रसोई संचालन से संबंधित जिलाधिकारी, सुपौल के नाम पर चैटजीपीटी की सहायता से कथित फर्जी पत्र तैयार कर उसे वायरल करने का मामला सामने आया था।

इस संबंध में 7 सितंबर 2026 को किशनपुर थाने में एक किशोर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 338, 336(3), 340 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 52 और 54 का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, मामले के किशोर न्याय परिषद के समक्ष पहुंचने के बाद पुलिस द्वारा अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई।


किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया पर परिषद की आपत्ति

किशोर न्याय परिषद ने अभिलेखों के अवलोकन के बाद पाया कि इस मामले में एकमात्र आरोपित किशोर है।

परिषद ने बिहार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) नियमावली, 2017 के नियम 8(1) का हवाला देते हुए इस मामले में किशोर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की।

आदेश में परिषद ने उल्लेख किया है कि संबंधित नियम के प्रावधानों के बावजूद किशनपुर थानाप्रभारी द्वारा किशोर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।

परिषद ने इसे निर्धारित किशोर न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन मानते हुए थानाप्रभारी से जवाब तलब किया था।

यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि किशोर न्याय व्यवस्था में विधि से संघर्षरत बच्चों के मामलों के लिए सामान्य आपराधिक प्रक्रिया से अलग विशेष प्रावधान निर्धारित हैं। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया का अनुपालन आवश्यक है।

तीन दिनों में देना था जवाब, लेकिन एक महीने बाद भी स्पष्टीकरण नहीं

किशोर न्याय परिषद ने 8 सितंबर 2026 को आदेश पारित कर किशनपुर थानाप्रभारी से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

लेकिन 9 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान परिषद ने पाया कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद थानाप्रभारी ने अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया था।

आदेश के अनुसार, थानाप्रभारी न तो अपना स्पष्टीकरण समर्पित कर सके और न ही अपना पक्ष रखने के लिए परिषद के समक्ष उपस्थित हुए।

इस प्रकार, जिस स्पष्टीकरण के लिए केवल तीन दिनों का समय दिया गया था, वह करीब एक महीने बाद भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

न्यायिक निर्देश के अनुपालन में हुई इस देरी को परिषद ने गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की।

न्यायिक आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की आशंका, परिषद की तल्ख टिप्पणी

किशोर न्याय परिषद ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि थानाप्रभारी द्वारा परिषद के आदेशों एवं जारी दिशा-निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की जा रही है।

परिषद ने थानाप्रभारी के इस आचरण को कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और न्यायिक आदेशों के अनुपालन के प्रति उदासीनता दर्शाने वाला बताया।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिषद ने केवल प्राथमिकी दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि पूर्व में जारी न्यायिक निर्देश का अनुपालन नहीं होने को भी गंभीर माना।

मामले में परिषद का रुख स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में उदासीनता को नजरअंदाज नहीं किया गया है।

थानाप्रभारी ज्ञान रंजन का वेतन रोकने का आदेश, कोषागार पदाधिकारी को निर्देश

लगातार स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किए जाने और न्यायिक आदेश के अनुपालन में उदासीनता को देखते हुए किशोर न्याय परिषद ने 9 अक्टूबर को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

परिषद ने किशनपुर थानाप्रभारी ज्ञान रंजन का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।

आदेश में जिला कोषागार पदाधिकारी, सुपौल को निर्देशित किया गया है कि वह थानाप्रभारी के वेतन भुगतान पर रोक लगाएं।

इसके साथ ही कोषागार पदाधिकारी को आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई से किशोर न्याय परिषद, सुपौल को अवगत कराने के लिए भी कहा गया है।

इस प्रकार मामला अब केवल स्पष्टीकरण मांगने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए वेतन रोकने का निर्देश जारी किया गया है।

हालांकि, उपलब्ध आदेश से वेतन रोकने का निर्देश जारी होने की पुष्टि होती है। कोषागार द्वारा वास्तविक रूप से वेतन भुगतान रोके जाने की कार्रवाई की अलग से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

डीएम और एसपी को भी भेजी जाएगी आदेश की प्रति

किशोर न्याय परिषद ने इस आदेश की प्रतिलिपि जिले के प्रमुख प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है।

आदेश की प्रतिलिपि जिन अधिकारियों को भेजने के लिए कहा गया है, उनमें शामिल हैं:

  1. जिला पदाधिकारी, सुपौल

  2. पुलिस अधीक्षक, सुपौल

  3. जिला कोषागार पदाधिकारी, सुपौल

  4. थानाप्रभारी ज्ञान रंजन, किशनपुर थाना

परिषद ने मामले में 28 अक्टूबर 2026 की तिथि अग्रिम कार्रवाई के लिए निर्धारित की है।

एक मामला, दो बड़े सवाल: एआई के दुरुपयोग का आरोप और पुलिस की कानूनी जवाबदेही

इस पूरे प्रकरण में दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं।

पहला, चैटजीपीटी जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का उपयोग कर जिलाधिकारी के नाम पर कथित फर्जी सरकारी पत्र तैयार करने और उसे वायरल करने का आरोप।

दूसरा, ऐसे मामले में पुलिस द्वारा किशोर के विरुद्ध कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर किशोर न्याय परिषद की गंभीर आपत्ति।

कथित फर्जी पत्र तैयार करने के आरोप की सत्यता और संबंधित किशोर की जिम्मेदारी का प्रश्न अपनी जगह है। लेकिन इस मामले में परिषद का आदेश पुलिस की प्रक्रिया और न्यायिक निर्देशों के अनुपालन से संबंधित है।

यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण सवाल सामने लाता है कि जब कानून किशोरों के लिए विशेष प्रक्रिया निर्धारित करता है, तो उसके पालन में किसी प्रकार की लापरवाही की जवाबदेही कैसे तय होगी?

किशोर न्याय परिषद द्वारा पारित आदेश इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

अब 28 अक्टूबर की कार्रवाई पर नजर

किशोर न्याय परिषद के इस आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला कोषागार पदाधिकारी द्वारा वेतन रोकने के निर्देश का अनुपालन किस प्रकार किया जाता है और इस संबंध में परिषद को क्या प्रतिवेदन दिया जाता है।

साथ ही, आगामी 28 अक्टूबर को होने वाली कार्रवाई में थानाप्रभारी की ओर से स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए जाने और न्यायिक आदेश के अनुपालन की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहेगी।

कुल मिलाकर, चैटजीपीटी से कथित फर्जी पत्र तैयार करने के आरोप से शुरू हुआ यह मामला अब किशोर न्याय प्रक्रिया, पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रकरण बन गया है। किशोर न्याय परिषद का वेतन रोकने का आदेश इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।


समाचार का आधार: किशोर न्याय परिषद, सुपौल का दिनांक 09 अक्टूबर 2026 का दो पृष्ठीय न्यायिक आदेश।

किशनपुर थाना कांड संख्या: 213/2026

जेजेबी संख्या: 209/2026

अगली कार्रवाई: 28 अक्टूबर 2026

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