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बिहार : कोसी का जलस्तर बढ़ा; सुपौल के 70 गांवों की करीब 80 हजार आबादी प्रभावित

 बराज से 3,16,795 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ जैसे हालात; 169 नावें चालू, 21 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित, 2,701 पॉलीथिन शीट वितरित

AI निर्मित तस्वीर

सुपौल, 27 सितम्बर 2026। कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के बाद सुपौल जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिला आपदा कार्यालय, सुपौल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 26 सितम्बर 2026 को सुबह 5 बजे बराज से 3,16,795 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण जिले के 70 गांवों की लगभग 80 हजार आबादी प्रभावित हुई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ प्रभावित अंचलों—सुपौल, किशनपुर, सरायगढ़-भपटियाही, निर्मली एवं मरौना—के अंचलाधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन, सुपौल द्वारा सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों का लगातार संचालन और अनुश्रवण किया जा रहा है।

प्रशासन की ओर से तटबंध के भीतर तथा निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए आवश्यकतानुसार कुल 169 निजी नावों का परिचालन शुरू किया गया है। साथ ही आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिला प्रशासन द्वारा 21 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 16,894 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री के तौर पर अब तक 2,701 पॉलीथिन शीट्स का वितरण किया गया है।

जिला प्रशासन ने बताया है कि सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने तथा राहत एवं बचाव कार्य में तेजी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत के अनुसार आगे भी राहत व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

किशनपुर दक्षिण में सहयोग शिविर का डीएम सावन कुमार ने किया निरीक्षण, मौके पर बांटे प्रमाण पत्र

किशनपुर दक्षिण पंचायत में सहयोग शिविर के दौरान जॉब कार्ड व प्रमाण पत्र वितरित करते डीएम सावन कुमार

सुपौल। किशनपुर प्रखंड की किशनपुर दक्षिण पंचायत में मंगलवार को आयोजित सहयोग शिविर का जिलाधिकारी सावन कुमार ने निरीक्षण किया। शिविर में उन्होंने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर राशन, पेंशन, आवास, भू-राजस्व और मनरेगा से जुड़ी समस्याएं सुनीं तथा लंबित आवेदनों की समीक्षा की।

डीएम ने बीडीओ समेत संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों को पोर्टल पर दर्ज कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से निस्तारित करने का निर्देश दिया।

शिविर के दौरान मनरेगा जॉब कार्ड तथा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित विभिन्न नागरिक सेवाओं से जुड़े दस्तावेज लाभुकों को मौके पर उपलब्ध कराए गए।

शिविर में प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, राजस्व कर्मचारी, आवास सहायक, मनरेगा पीआरएस और अन्य संबंधित विभागों के कर्मी मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभुकों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और उनके आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।