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05 साल की इनायत फतिमा ने रखा रोजा

नागपुर : मोमिनपुरा निवासी 05 साल की मासूम इनायत फातिमा पिता मोहम्मद साजिद ने अपने जिंदगी का पहला रोजा रखा। रमजान के पाक महीने के प्रति अपने बड़ों के उत्साह से प्रेरित होकर इनायत फातिमा ने यह रोजा रखा है। रमजान के सख्त नियमों का पालन करते हुए उसने अपना रोजा पूरा की। इनायत की मम्मी नेहा कौसर ने बच्ची कि हौसला अफजाई करते हुए कहा कि उसे कुछ सूरतें और दुआ भी याद है और अरबी भी पढ़ती है। इसके रोजा रखने से घर वाले सभी खुश हैं और मुबारकबाद भी दिया। नाना, नानी, दादी, मामा, खाला, फूफी और सभी ने खुशी का इजहार किया।


दो ब्राजिलियन नागरिक के पेट से साढ़े चार करोड का कोकिन बरामद, कोकीन की खेप जाना था भारत, होटल से धराया



भारत नेपाल सीमा से राजेश कुमार शर्मा ब्राजील के सापाउलो से हवाई मार्ग के रास्ते नेपाल आए दो ब्राजिलियन नागरिक लारिसन ब्रिटो डोस सानटोसफर्नान्डा भेल डोस सानटोस काठमांडू स्थित ठमेल के एक होटेल मे रूके हुए थे। लेकिन उसे कहां पता था कि नेपाल के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के नजर में इनकी गतिविधि कैद हो चुकी है। इन लोगों ने पूरे हवाई गन्तव्य में न पानी पिया और न ही शौचालय गया। इनकी हवाई गन्तव्य नेपाल होने के कारण नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पास इनकी गतिविधि की सूचना पहुँच चुकी थी। क्योंकि नेपाल कोकिन का कोई स्थायी बजार नहीं है। लेकिन इससे पहले भी कई बार कोकिन के कारोबारी के द्वारा ब्राजील होते हुए कोकिन अन्तर्राष्ट्रीय बजार में भेजने के लिए नेपाल को हवाई रूट में सेफ माना जाता रहा है।

पिछले घटना क्रम के आधार पर इन दोनों को भी ड्रग्स माफिया सदस्य होने के शंका में रेड लिस्ट में रख कर निगरानी की जा रही थी। मंगलवार को दोनों जैसे ही त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रीय विमान स्थल से बाहर निकल कर ठमेल के एक होटेल के लिए निकले, विमान स्थल से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एक टीम निगरानी में लग चुकी थी। क्योंकि होटल में रूकने से लेकर नेपाल लाने में मदद करने वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी की योजना में ब्यूरो की टीम थी। लेकिन दो दिनों तक अन्य कोई गतिविधि नहीं दिखने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस कार्यालय लाया गया।

पुलिस ने लारिसन के साथ से 840 ग्राम व फर्नान्डा से 550 ग्राम कोकिन बरामद किया। पुलिस को अंशका थी कि इनके पेट में और भी कैप्सूल है। जिसे नेपाल पुलिस अस्पताल में जांच के दौरान लारिसन के पेट से 86 प्लास्टिक के रैपिंग किये कैप्सूल निकला गया। जिसका वजन 65 ग्राम था। ब्यूरो के अनुसार बरामद किए गए कोकिन का इंटरनेशनल बाजार में 84 करोड 36 लाख रुपये कीमत है।

कोकिन लेकर इन दस देश के नागरिक आते हैं नेपाल
जानकार बताते हैं कि नेपाल कोकिन के लिए कोई आकर्षक बाजार नहीं है। लेकिन एक दशक से कारोबारी नेपाल के रास्ते कोकिन तस्करी में काफी सक्रिय हैं। नेपाल में अब तक कोकिन सहित पाकिस्तानी, बोलिभियाली, मलेसियन, फिलिपिनी, दक्षिण अफ्रिकी, चिनिया, ब्राजिलियन, भारतीय, नाइजेरियाली से लेकर भेनेजुएला तक के नागरिक की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन अब तक नेपाल में जितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है, सभी सिर्फ कैरियर ही है। इन लोगों का उद्देश्य नेपाल के रास्ते कोकिन भारत, थाइलेंड व पाकिस्तान के रास्ते युरोप व अमेरिकी बाजार में भेजना होता है।

नेपाल में दस किलो तक की खेप हो चुकी है बरामद
नेपाल में कोकिन की बरामदगी के आंकडे पर नजर डाले तो दस किलो तक के कोकिन की खेप बरामद हो चुकी है। नेपाल को ट्रान्जिट बना कर अंतराष्ट्रीय गिरोह व नेपाल में रह कर इनकों मदद करने वाले को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। अधिकांश घटना में गिरफ्तार कैरियर के पास दो तरफ का टिकट होता है तो होटल ऑनलाइन बुक करवा दिया जाता है।

केंद्र सरकार ने 200 रुपये घटाई 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत

  • सरकार 75 लाख नए उज्जवला कनेक्शन बांटेगी : मंत्री अनुराग ठाकुर 
  • जुलाई 2022 से मार्च 23 तक सरकार ने 100 रुपये कीमत बढ़ाया था 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 200 रुपए की कटौती की है। दिल्ली में 200 रुपये की कीमत घटकर अब 903 रुपए हो गया है। पहले यह 1103 रुपए थी। वहीं भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडर 908 रुपये और जयपुर में 906 रुपये में मिलेगा। कैबिनेट ने मंगलवार को इसकी मंजूरी दे दी है।


इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ओनम और रक्षाबंधन के त्योहार पर दाम घटाकर पीएम मोदी ने बहनों को बड़ा तोहफा दिया है। देश के 33 करोड़ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा। इस फैसले से सरकार पर वित्त वर्ष 2023-24 में 7,680 करोड़ का बोझ आएगा। केंद्रीय मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार 75 लाख नए उज्जवला कनेक्शन भी बांटेगी।



मार्च में भी हुआ था कीमतों में बदलाव
सरकार ने मार्च 2023 में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपए की वृद्धि की थी। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 1103 रुपए हो गई थी। इससे पहले 6 जुलाई 2022 को भी कीमत में बदलाव किया गया था। तब भी कीमतें 50 रुपए बढ़ाई गई थी।

अब तक देश में 9.5 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन
उज्जवला योजना के तहत अब तक देश में 9.5 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस स्कीम को 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में लॉन्च किया गया था। सरकार ने इस योजना की सब्सिडी पर वित्त वर्ष 2022-23 में कुल 6,100 करोड़ रुपए खर्च किए थे। योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होती है।



Indo Nepal- भारत नेपाल सीमा के इस्लामपुर में भारतीय नागरिक व नेपाल पुलिस में झड़प, नेपाल पुलिस ने उपद्रवियों पर चटकाई लाठियां

  • अनुमंडल प्रशासन घटना स्थल पर पहुँच नेपाल पुलिस से ली जानकारी ।
  • पत्थरबाजी में शामिल लोगों को चिन्हित कर होगी कार्यवाही: एसडीपीओ
  • फ़ोटो पत्थरबाज लोग, मामले का जानकारी लेते पुलिस पदाधिकारी

 

जोगबनी (राज टाइम्स)

एक तरफ बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर भारत नेपाल सीमा में आवागमन को कडाई के साथ रोका गया है दूसरी तरफ जोगबनी के इस्लामपुर मस्जिद चौक के समीप खुली सीमा पर उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी जब कुछ पल के लिए स्थानीय नागरिक व नेपाल पुलिस के बीच हुए हाथापाई हुई। देखते ही देखते इस्लामपुर की खुली सीमा कुछ देर तक रणभूमि में तब्दील रहा। भारतीय ईलाके से लोग बड़े बड़े पत्थर फेंकने लगे, तो नेपाल पुलिस के जवानों ने भी  दसगज्जा में खड़े हो कर उपद्रवियों के समूह पर लाठियां भांजी।

 



अवैध आवागमन का भी है यह रास्ता

प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त स्थान से सुबह चार बजे से ही भारत से नेपाल अवैध रूप से तस्करी का सामान ले जाने वाले गिरोह सक्रिय रहते है। वही कुछ लोग के द्वारा अपरिचित व्यक्ति को अपने नजदीकी बताकर प्रतिदिन सीमा के इस पार से उस पार भेजने का खेल भी जारी है। लगातर मिल रही शिकायत के बाद पुलिस के द्वारा सख्ती दिखाने की बात कही गई।

 

 

सीमा पार चाय पीने जाने की स्थानीय ने कही बात

स्थानीय लोगों की माने तो नेपाल भाग के इस्लामपुर में स्थित एक चाय की दुकान पर चाय पीने के बहाने सैकड़ो लोग प्रतिदिन जाते रहे हैं। जहाँ लोग चाय पीने को नेपाल जाने से रोके जाने को लेकर यह घटना घटने की बात कह रहे है। वहीं नेपाल सीमा पुलिए का कहना है कि इस वक़्त नेपाल में लॉकडाउन के साथ ही स्थल मार्ग से लोगो की आवाजाही पर रोक लगाया गया है। नेपाल में लगातार बढ़ रहे कोरोना के संक्रमण को लेकर नेपाल में सख्ती बरती जा रही है। इसलिए रोके जाने पर यह घटना घटित हुई है।

 

 

जोगबनी पहुचे आला अधिकारी

जोगबनी के इस्लामपुर में हुए नेपाल पुलिस व स्थानीय लोगों के साथ झडप की सूचना पर घटनास्थल पर एसडीएम सुरेन्द्र कुमार अलबेला, डीएसपी रामपुकार सिंह सदलबल पहुंच मामले की छानबीन किया। तत्पश्चात भारत नेपाल सीमा पहुंच रानी थाना के निरीक्षक प्रकाश राउत से मिलकर मामले की जानकारी लेते हुए कार्रवाई के लिए अश्वस्त किया। उन्होंने नेपाल प्रशासन को विश्वास दिलाया कि घटना को अंजाम देने वाले बख्शा नहीं जाएगा। डीएसपी ने जोगबनी थानाध्यक्ष को घटना में शामिल लोगों को चिन्हित कर सभी पर कारवाही के निर्देश दिये। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी है उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।




BIHAR/अररिया- अब नितीश राज में सुरक्षित नहीं हैं पत्रकार, सच बोलना और लिखना दोनों ही हो रहा घातक

मनीष कुमार/अररिया 

लोग कहते हैं मीडिया समाज का दर्पण है। लेकिन समाज को दर्पण दिखाना काफी महंगा पड़ा। जी हां ऐसा ही एक मामला अररिया जिला के भरगामा प्रखंड में देखने को मिला जहां पूरा भारत कोरोना महामारी के चपेट में है और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। वही तबाही के बीच एक पत्रकार ने सच्चाई का आईना दिखाते हुए ग्रामीणों को यह बताने का प्रयत्न किया कि अब गांव कस्बे में भी कोरोना का प्रकोप बढ़ने लगा है और लोग सचेत व जागरूक होकर कोरोना की जांच कराएं। लेकिन गाँव के दबंगों ने इस बात पर क्रोधित होते हुए पत्रकार पर जानलेवा हमला कर दिया। 

बताया जा रहा है कि गांव के अंदर कोरोनाजांच के लिए टीम गई।  जांच में 103 लोगों में से 33 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले जिसको लेकर गांव के अंदर कोहराम सा मच गया। पत्रकार से गलती इतनी ही हुई कि लोगों को जागरूक करने के लिए खबर का प्रकाशन कर दिया। 

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथे स्तंभ कहा जाता है क्योंकि वह समाज का आईना है। और जब इसी आईना ने गांव के लोगों को उनकी परछाई दिखाई तो गांव के दबंगों ने पत्रकार को ही अपना दबंगई का शिकार बनाया। दबंगों ने पत्रकार से कहा कि यह खबर क्यों प्रकाशित की। तुम्हारी खबर पर गांव के अंदर प्रशासनिक चहलकदमी बढ़ गई है।इसके बाद उन्होंने पत्रकार अंकित की जमकर पिटाई कर दी और घर पर हमला कर तोड़फोड़ किया। मामले को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।  जिससे यह जान पड़ता है कि प्रशासन के लोग मुंह बंद कर मामला को रफा दफा करना चाहते हैं। 


बाईट- पत्रकार अंकित सिंह 



बाईट- पत्रकार की माँ

Bihar/ अररिया- अंचरा पंचायत के ऋषिदेव टोला वार्ड 09 में पांच वर्षो में नहीं हुआ विकास का कार्य


प्रतिनिधि कहते हैं विकास करना पंचायत के कर्मी व पदाधिकारियों का काम है, मेरा नहीं




अररिया से रंजीत ठाकुर की रिपोर्ट

नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र के अंचरा पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 9 स्थित (ऋषिदेव) महादलित टोला के लोग विकास की कार्य से अब भी है कोसों दूर।लोग फूस के झोपड़ी में रहने को है मजबूर। समाचार संकलन के दौरान जब संवाददाता टोले पर पहुंचा तो देखा कि चारों तरफ झोपड़ियां ही झोपड़ियां दिखाई दे रहा है। शौचालय भी देखने को नहीं मिला। जब इस सम्बन्ध में  टोले के लोगों से जानकारी लिया तो मौजूद महिलाओं ने बताया कि इस बस्ती का आज तक कोई विकास नहीं हुआ।

महिलाओं ने बताया कि उन लोगों को ना तो प्रधानमंत्री आवाज योजना का लाभ मिलाऔर ना ही शौचालय, पेंशन, राशन कार्ड आदि पंचायत के प्रतिनिधियों के द्वारा मुहैया कराया गया है। बाढ़ बरसात के समय हम लोगों के घर में बाढ़ का पानी घुसा रहता है, लेकिन देखने कोई जनप्रतिनिधि नहीं आते है। पंचायत के मुखिया कभी भी टोले पर आकर नहीं देखते हैं कि लोग किस परेशानी में हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि कोई भी योजना का लाभ बिना नजराना दिए नहीं मिलता है। जबकि लगभग एक सौ घर एवं लगभग 500 जनसंख्या की बस्ती है। मौके पर उमानंद ऋषिदेव, मसो० फुलेश्वरी देवी, रेकची ऋषिदेव,मैथानी देवी, प्राणबती देवी,बोदनी देवी, मसो०लीली देवी,अनिला देवी, ममता देवी आदि ने बताया कि टोले का विकास नहीं तो वोट नहीं।

विकास मुखिया जी का काम नहीं-
इस बाबत मुखिया पति उपेंद्र शर्मा ने बताया कि विकास करना पदाधिकारियों एवं पंचायत के कर्मियों का काम है, मेरा नहीं।


क्या कहते हैं वार्ड सदस्य पप्पू वर्मा:-
वार्ड सदस्य पप्पू वर्मा से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि 5 वर्षों में लगभग बीस को लोगों को आवास योजना का लाभ दिया गया है।शेष परिवार के लोगों का नाम नए सूची में शामिल हैं, योजना प्रारंभ होने के बाद बाकी बचे लोगों का लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि लोग आवास योजना का पैसा तो उठा लेते हैं लेकिन घर नहीं बनाते है। जिस कारण टोले में झोपड़ी दिखाई देता है। शौचालय निर्माण के संबंध में बताया कि इस योजना का लाभ उस व्यक्ति को मिलता है, जो पहले शौचालय निर्माण पूर्ण करता है। सात निश्चय योजना के तहत नल जल योजना का पाइप एवं नल नहीं लगाया गया है। हम लोग विभाग से संबंधित पदाधिकारी को बोलते बोलते थक चुके हैं।

बिहार/सुपौल- कोरोना संक्रमण काल में सरकारी मदद तो दूर, मजदूरी की राशि के लिए कलाकार दर दर भटकने को मजबूर


महिला विकास निगम द्वारा मनोज फाउंडेशन को जनवरी में सुपौल जिला में जागरूकता अभियान चलाने का दिया था आदेश! विभागके पास पूरी राशि शेष!!

सुपौल (राज टाइम्स)। सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने वाले कलाकार इन दिनों आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। मामला सुपौल जिले का है जहाँ राज्य सरकार के महिला विकास निगम के आदेश पर बीते फरवरी माह में कलाकारों द्वारा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन, कन्या उत्थान योजना तथा महिलाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया। लेकिन अपने मेहनताने के लिए कलाकारों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। कलाकारों ने सूबे के कला संस्कृति युवा विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर मेहनताना भुगतान की दिशा में पहल का अनुरोध किया है।
फोटो- मजदूरी की राशि के लिए दर दर भटकने को मजबूर कलाकार 

सरकारी भुगतान- क्या है हकीकतक्या है फसाना

 सुपौल जिला टीम लीडर इंदल कुमार ने मंत्री को भेजे आवेदन में कहा है कि महिला विकास निगम के कार्यालय आदेश संख्या 1793 के आलोक में मनोज फाउंडेशन को सुपौल जिले के 60 पंचायतों में 181 कार्यक्रम का आदेश जनवरी में प्राप्त हुआ था। जिसके बाद संस्था से जुड़े कलाकारों ने जनवरी-फरवरी माह में 181 जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया। लेकिन इन कार्यक्रमों के एवज में संस्था को अब तक राशि का भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। इंदल के अनुसार कोरोना संकट की वजह से कलाकारों का सामान्य कामकाज भी प्रभावित है। ऐसे में उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने मंत्री से कलाकारों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द भुगतान की दिशा में पहल का अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, जल जीवन हरियाली अभियान जैसे कार्यक्रम सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल हैं। यही कारण है कि बीते दिनों सरकार ने इस को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। लेकिन लोगों को जागरूक करने वाले कलाकार ही सरकारी व्यवस्था से परेशान हैं। उन्हें कार्य समाप्ति के पन्द्रह दिनों के भीतर भुगतान दिए जाने की बात बताई गयी थी पर छह माह बीत जाने के बाद भी उन्हें भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में सरकारी योजनाओं की उपलब्धि बताने वाले कलाकार स्वयं सरकारी व्यवस्था के शिकार हो रहे हैं।  इस सम्बन्ध में मनोज फाउंडेशन के सचिव मनोज सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी को सारे कागजात विभाग को जमा करवा दिया था लेकिन उच्चाधिकारियों के स्थानान्तारण के कारण 15 दिनों मे होने वाला भुगतान अब तक नहीं हुआ है कलाकारों की निगाहें अब मंत्री की पहल पर टिकी हैं। कलाकारों ने बताया कि इससे पूर्व जिलाधिकारी से लेकर विभागीय सचिव तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अधिकारी भुगतान को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

सुपौल- अधिवक्ता कर रहे AK 47 सप्लाई की बात, वायरल ऑडियो को अधिवक्ता ने बताया साजिश, पुलिस कर रही है अनुसंधान


सुपौल (राज टाइम्स)। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक अधिवक्ता का 32 सेकेंड का एक ऑडियो वायरल हो रहा है जिसको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो अधिवक्ता शारद मोहनका का है। हालाँकि हम इस वायरल ऑडियों की पुष्टि नहीं करते हैं। आइये सुनाते हैं इस वायरल ऑडियो में हुए बातचीत का कुछ अंश-



हालांकि इस ऑडियो क्लिप में फोनवार्ता में दूसरी तरफ मौजूद दिलनवाज आलम ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों को आवेदन देकर अधिवक्ता द्वारा उन्हें प्रतारित करने एवं जबरन हथियार तस्करी में उन्हें संलिप्त करने की बात कही गई है। आप खुद सुने क्या कहते है आवेदक दिलनवाज



फिलहाल सुपौल पुलिस वायरल ऑडियो का अनुसंधान कर रही है। इस मामले में अधिवक्ता शरद मोहनका ने बताया कि उन्हें गलत तरीके से ब्लैक मेल किया जा रहा है और पुलिस इसकी जाँच कर रही है। जल्द ही सच सबके सामने आ जाएगा।

राष्ट्रीय- "टिड्डी नियंत्रण अभियान" के तहत केंद्र सरकार कर रही है टिड्डियों का सफाया

  • 23 जुलाई तक 10 राज्यों में 4 लाख हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में चलाया गया "टिड्डी नियंत्रण अभियान" 

  • 23-24 जुलाई की मध्‍यरात्रि में राजस्थान के 7 जिलों में 31 स्थानों पर चलाए गए "टिड्डी नियंत्रण अभियान" 

नई दिल्ली (नेशनल डेस्क) 11 अप्रैल 2020 से शुरू हुआ "टिड्डी नियंत्रण अभियान" अंतर्गत 23 जुलाई तक टिड्डी वृत्त कार्यालयों (एलसीओ) द्वारा राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 2,02,565 हेक्टेयर क्षेत्र में चलाए गए हैं। इसी तरह टिड्डी नियंत्रण अभियान 23 जुलाई 2020 तक राज्य सरकारों द्वारा राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार में 1,98,657 हेक्टेयर क्षेत्र में चलाए गए हैं।
टिड्डी नियंत्रण अभियान 23-24 जुलाई, 2020 की मध्‍यरात्रि में एलसीओ द्वारा राजस्थान के 6 जिलों यथा बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर और श्रीगंगानगर में 30 स्थानों पर चलाए गए हैं। इसके अलावा, राजस्थान राज्य के कृषि विभागों ने भी टिड्डियों के छोटे समूहों और यहां-वहां फैली टिड्डियों से बचाव के लिए 23-24 जुलाई, 2020 की मध्यरात्रि में भरतपुर जिले में 1 स्थान पर टिड्डी नियंत्रण अभियान चलाया।

वर्तमान में छिड़काव वाहनों के साथ 104 नियंत्रण दल राजस्थान एवं गुजरात में तैनात किए गए हैं और केंद्र सरकार के 200 से अधिक कर्मचारी टिड्डी नियंत्रण कार्यों में लगे हुए हैं। टिड्डी नियंत्रण के लिए हवाई छिड़काव क्षमता को मजबूत किया गया है। आवश्यकता के अनुसार राजस्थान में अनुसूचित रेगिस्तान क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए एक बेल हेलीकॉप्टर को हवाई छिड़काव के लिए तैनात किया गया है। टिड्डी नियंत्रण में हवाई छिड़काव के लिए भारतीय वायु सेना भी Mi-17 हेलीकॉप्टर का उपयोग करके परीक्षण कर रही है। इसके परिणाम उत्साहजनक हैं। इसके अलावा, राजस्थान में बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और फलोदी में 15 ड्रोन के साथ 5 कंपनियों को कीटनाशकों के छिड़काव के माध्यम से ऊंचे पेड़ों एवं दुर्गम क्षेत्रों पर प्रभावकारी टिड्डी नियंत्रण के लिए तैनात किया गया है।

गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और हरियाणा में कोई खास फसल नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, राजस्थान के कुछ जिलों में मामूली फसल नुकसान हुआ है।

आज 24 जुलाई को राजस्थान के बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर और भरतपुर जिलों में अपरिपक्व गुलाबी टिड्डियों और वयस्क पीली टिड्डियों के झुंड सक्रिय हैं

यूआईसी सुरक्षा मंच के उपाध्यक्ष मनोनीत हुए आरपीएफ महानिदेशक अरुण कुमार

फाईल फोटो- आरपीएफ महानिदेशक अरुण कुमार अब यूआईसी सुरक्षा मंच के उपाध्यक्ष मनोनीत


नेशनल डेस्क (राज टाईम्स) यूआईसी के महानिदेशक फ्रैंकोइस डेवने ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, विनोद कुमार यादव को सूचित किया है कि 96वीं यूआईसी महासभा के निर्णय के अनुसार, जुलाई 2020 से लेकर जुलाई 2022 तक के लिए सुरक्षा मंच के उपाध्यक्ष के रूप में श्री अरुण कुमार को मनोनीत किया गया है। उसके बाद, आरपीएफ के महानिदेशक जुलाई 2022 से लेकर जुलाई 2024 तक सुरक्षा मंच के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करेंगे।

यूआईसी (यूनियन इंटरनेशनेल देस शिमन्स) एक फ्रेंच शब्द है जिसका अर्थ अंग्रेजी में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे है। इसका मुख्यालय पेरिस में है।

यूआईसी सूरक्षा मंच को, व्यक्तियोंसंपत्ति और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा से संबंधित मामलों में रेलवे की ओर से विश्लेषण करने और नीतिगत दृष्टिकोण विकसित करने और निर्माण करने का अधिकार प्राप्त है। यह सुरक्षा मंच, यूआईसी सदस्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है और सदस्यों या बाहरी गतिविधियों की आवश्यकता के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में साझा हितों वाली परियोजनाओं और गतिविधियों को प्रस्तावित करता है। यूआईसी सुरक्षा मंच द्वारा वर्तमान महामारी के दौरान कोविड-19 के लिए गठित टास्क फोर्स, विचारों का आदान-प्रदान करनेसावधानियों को अपनानेपूर्वावस्था की प्राप्ति के प्रयासों और अनुभवों को साझा करने की दिशा में बहुत ही उपयोगी साबित हुआ है।

आरपीएफ, भारतीय रेलवे की ओर सेहमेशा ही यूआईसी सुरक्षा मंच का एक सक्रिय सदस्य रहा है और लंबे समय से विचार-विमर्शमंत्रणाविचारों का आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए योगदान देता रहा है। इसने 2006 और 2015 में, नई दिल्ली में यूआईसी सुरक्षा सम्मेलनों का आयोजन भी किया है। आरपीएफ अपने आप को कार्य समूहोंमंचों और बैठकों में शामिल करता रहा है और यूआईसी सुरक्षा मंच के कामकाज में इसके योगदान को ध्यान में रखते हुए यूआईसी के नेतृत्व द्वारा इसकी लंबे समय से सराहना की जा रही है।

भारत- इतिहास में "मुस्लिम महिला अधिकार दिवस" के रूप में दर्ज हो चुका है 1 अगस्त

मुस्लिम महिलाओं के लिए यह दिन संवैधानिक-मौलिक-लोकतांत्रिक एवं समानता के अधिकारों का दिन बन गया- मुख्तार अब्बास नकवी  (केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री)

वैसे तो अगस्तइतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं के पन्नों से भरपूर है, 8 अगस्त भारत छोडो आंदोलन”, 15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 19 अगस्त विश्व मानवीय दिवस”, 20 अगस्त सद्भावना दिवस”, 5 अगस्त को 370 खत्म होनाजैसे इतिहास के सुनहरे लफ्जों में लिखे जाने वाले दिन हैं।
वहीं 1 अगस्तमुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथाकुरीति से मुक्त करने का दिनभारत के इतिहास में "मुस्लिम महिला अधिकार दिवस" के रूप में दर्ज हो चुका है।   
"तीन तलाक" या "तिलाके बिद्दत" जो ना संवैधानिक तौर से ठीक थाना इस्लाम के नुक्तेनजर से जायज़ था। फिर भी हमारे देश में मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न से भरपूर गैर-क़ानूनीअसंवैधानिकगैर-इस्लामी कुप्रथा "तीन तलाक", "वोट बैंक के सौदागरों" के "सियासी संरक्षण" में फलता- फूलता रहा।
1 अगस्त 2019 भारतीय संसद के इतिहास का वह दिन है जिस दिन कांग्रेसकम्युनिस्ट पार्टीसपाबसपातृणमूल कांग्रेस सहित तमाम तथाकथित "सेक्युलरिज़्म के सियासी सूरमाओं" के विरोध के बावजूद "तीन तलाक" कुप्रथा को ख़त्म करने के विधेयक को कानून बनाया गया। देश की आधी आबादी और मुस्लिम महिलाओं के लिए यह दिन संवैधानिक-मौलिक-लोकतांत्रिक एवं समानता के अधिकारों का दिन बन गया। यह दिन भारतीय लोकतंत्र और संसदीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों का हिस्सा रहेगा।
"तीन तलाक" कुप्रथा के खिलाफ कानून तो 1986 में भी बन सकता था जब शाहबानों केस में सुप्रीम कोर्ट ने "तीन तलाक" पर बड़ा फैसला लिया थाउस समय लोकसभा में अकेले कांग्रेस सदस्यों की संख्या 545 में से 400 से ज्यादा और राज्यसभा में 245 में से 159 सीटें थीपर कांग्रेस की श्री राजीव गाँधी की सरकार ने 5 मई 1986 को इस संख्या बल का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को कुचलने और "तीन तलाक" क्रूरता-कुप्रथा को ताकत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए संसद में संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस ने कुछ "दकियानूसी कट्टरपंथियों के कुतर्कों" और दबाव के आगे घुटने टेक कर मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का आपराधिक पाप किया था। कांग्रेस के लम्हों की खता”, मुस्लिम महिलाओं के लिए दशकों की सजा” बन गई। जहाँ कांग्रेस ने "सियासी वोटों के उधार" की चिंता की थीवहीँ मोदी सरकार ने सामाजिक सुधार की चिंता की।
भारत संविधान से चलता हैकिसी शरीयत या धार्मिक कानून या व्यवस्था से नहीं। इससे पहले भी देश में सती प्रथाबाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाये गए। तीन तलाक कानून का किसी मजहबकिसी धर्म से कोई लेना देना नहीं थाशुद्ध रूप से यह कानून एक कुप्रथाक्रूरतासामाजिक बुराई और लैंगिक असमानता को खत्म करने के लिए पारित किया गया। यह मुस्लिम महिलाओं के समानता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा विषय था। मौखिक रुप से तीन बार तलाक़ कह कर तलाक देनापत्रफ़ोनयहाँ तक की मैसेजव्हाट्सऐप के जरिये तलाक़ दिए जाने के मामले सामने आने लगे थे। जो कि किसी भी संवेदनशील देश-समावेशी सरकार के लिए अस्वीकार्य था।
दुनिया के कई प्रमुख इस्लामी देशों ने बहुत पहले ही "तीन तलाक" को गैर-क़ानूनी और गैर-इस्लामी घोषित कर ख़त्म कर दिया था। मिस्र दुनिया का पहला इस्लामी देश है जिसने 1929 में तीन तलाक” को ख़त्म कियागैर क़ानूनी एवं दंडनीय अपराध बनाया। 1929 में सूडान ने तीन तलाक पर प्रतिबन्ध लगाया।
1956 में पाकिस्तान ने, 1972 बांग्लादेश, 1959 में इराकसीरिया ने 1953 मेंमलेशिया ने 1969 में इस पर रोक लगाई। इसके अलावा साइप्रसजॉर्डनअल्जीरियाईरानब्रूनेईमोरक्कोक़तरयूएई जैसे इस्लामी देशों ने तीन तलाक ख़त्म किया और कड़े क़ानूनी प्रावधान बनाये। लेकिन भारत को मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा के अमानवीय जुल्म से आजादी दिलाने में लगभग 70 साल लग गए।
श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने "तीन तलाक" पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2017 को तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। जहाँ कांग्रेस ने अपने संख्या बल का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने के लिए किया थावहीँ मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक-मौलिक-लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए फैसला किया।
आज एक वर्ष हो गया हैइस दौरान "तीन तलाक" या तिलाके बिद्दत" की घटनांओं में 82 प्रतिशत से ज्यादा की कमीं आई हैजहाँ ऐसी घटना हुई भी है वहां कानून ने अपना काम किया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार हर वर्ग के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार को समर्पित है। कुछ लोगों का कुतर्क होता है कि मोदी सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के तलाक की ही चिंता क्यों हैउनके आर्थिकसामाजिकशैक्षिक सशक्तिकरण के लिए कुछ क्यों नहीं करते तो उनकी जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ कि इन पिछले 6 वर्षों में मोदी सरकार के समावेशी विकास-सर्वस्पर्शी सशक्तिकरण के प्रयासों का लाभ समाज के सभी वर्गों के साथ मुस्लिम महिलाओं को भी भरपूर हुआ है।
पिछले छह वर्षो में 3 करोड़, 87 लाख अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप दी गईजिसमें 60 प्रतिशत लड़कियाँ हैं। पिछले 6 वर्षो में हुनर हाटके माध्यम से लाखों दस्तकारों-शिल्पकारों को रोजगार-रोजगार के मौके मिलें जिनमे बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं। "सीखों और कमाओं” , “गरीब नवाज़ स्वरोजगार योजना”, “उस्ताद”, “नई मंजिल”, "नई रौशनी" आदि रोजगारपरक कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से पिछले 6 वर्षों में 10 लाख से ज्यादा अल्पसंख्यकों को रोजगार और रोजगार के मौके उपलब्ध कराये गए हैं जिनमे बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार के अंतरगर्त 2018 में शुरू की गई बिना मेहरम महिलाओं को हज पर जाने की प्रक्रिया के तहत अब तक बिना मेहरम के हज पर जाने वाली महिलाओं की संख्या 3040 हो चुकी है। इस वर्ष भी 2300 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने बिना "मेहरम" (पुरुष रिश्तेदार) के हज पर जाने के लिए आवेदन किया थाइन महिलाओं को हज 2021 में इसी आवेदन के आधार पर हज यात्रा पर भेजा जायेगासाथ ही अगले वर्ष भी जो महिलाएं बिना मेहरम हज यात्रा हेतु नया आवेदन करेंगी उन सभी को भी हज यात्रा पर भेजा जायेगा।
यहीं नहीं मोदी सरकार की अन्य सामाजिक सशक्तिकरण योजनाओं का लाभ मुस्लिम महिलाओं को भरपूर हुआ है। यही वजह है कि आज विपक्ष भी यह नहीं कह पाता कि सामाजिकआर्थिकशैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे कामों में किसी भी वर्ग के साथ भेद-भाव हुआ हैमोदी सरकार के "सम्मान के साथ सशक्तिकरणबिना तुष्टिकरण विकास" का नतीजा है कि करोड़ गरीबों को घर दिया तो उसमे 31 प्रतिशत अल्पसंख्यक विशेषकर मुस्लिम समुदाय हैं, 22 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत लाभ दियातो उसमे भी 33 प्रतिशत से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब किसान हैं। करोड़ से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला योजना” के तहत निशुल्क गैस कनेक्शन दिया तो उसमे 37 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवार लाभान्वित हुए। 24 करोड़ लोगों को मुद्रा योजना” के तहत व्यवसाय सहित अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए आसान ऋण दिए गए हैं जिनमे 36 प्रतिशत से ज्यादा अल्पसंख्यकों को लाभ हुआ। दशकों से अँधेरे में डूबे हजारों गांवों में बिजली पहुंचाई तो इसका बड़ा लाभ अल्पसंख्यकों को हुआ। इन सभी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मुस्लिम महिलाओं को भी हुआ है और वो भी तरक्की के सफल सफर की हमसफ़र बनी हैं।