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बिहार से सटा एक ऐसा हिल स्टेशन जहाँ दिखता है शिमला जैसा नजारा

                          

तपती गर्मी में करें बादलों की सैर वो भी 250 रुपये में

सुपौल। शायद आपको विश्वास ना हो पर यह सच है कि केवल 250 रुपये में आप दो घंटे की यात्रा कर शिमला और मनाली जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन का आनन्द ले सकते हैं। रास्ते में ठंडी हवा के झोंके और भेडेटार के स्काई वॉक पर बादलों के बीच टहलने का मज़ा, ये आपकी यात्रा को शानदार बनाते हैं वो भी आपके बजट में।

यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और रोमांचक अनुभवों के लिए पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ठंडी हवाओं और बादलों के बीच बसे इस पहाड़ी इलाके को प्रकृति का अनमोल रत्न कहा जा सकता है। पहाड़ों से घिरा यह क्षेत्र नेपाल के कोशी प्रदेश में स्थित है। राजधानी विराटनगर से इसकी दूरी करीब 70 किमी है। पर्यटन के उद्देश्य से यह इलाका काफी समृद्ध है। बादलों के ऊपर पहाड़ों पर स्थित स्काई वॉक यहाँ का सबसे रोमांचक स्थान है जहां आप शीशे पर चलते हुए हजारों फुट नीचे का रोमांचक नजारा देखते हैं, वहीं पाथीभारा मंदिर के दर्शन बिना आपका सफर पूर्ण नहीं होगा।


नेपाल के पूर्वी क्षेत्र में बसा भेडेटार, धरान से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर 1420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। धरान-धनकुटा सड़क मार्ग पर यात्रा करते समय भेडेटार एक आदर्श पड़ाव है
, जो कोशी अंचल के पहाड़ी जिलों की यात्रा को और भी यादगार बनाता है। भेडेटार का सबसे बड़ा आकर्षण इसका मनोरम दृश्य है। बादलों के बीच बसा यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है। सुबह के समय कोहरे और बादलों के बीच सूर्योदय का नजारा देखने लायक होता है। यहाँ की हरियाली, ठंडी हवाएँ और शांत वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर एक ताजगी भरा अनुभव प्रदान करते हैं।


बिहार या नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के लोगों के लिए यहाँ की यात्रा करना काफी आसान और सुविधाजनक है। जोगबनी सीमा पार कर विराटनगर (नेपाल) से भेडेटार का बस किराया नेपाली 300 रुपये (भारतीय रुपये 200/=) है इस प्रकार आप केवल 250 रुपये में भेडेटार पहुँच कर वहाँ की वादियों का आनंद ले सकते हैं। वहीं यदि आप अपनी निजी भारतीय गाड़ियों से यहाँ घूमना चाहें तो भन्सार कटा कर (विदेशी गाड़ियों के लिए टैक्स अदा कर) यात्रा कर सकते हैं। कोसी बैरेज के रास्ते भेडेटार की दूरी करीब 70 किमी है यानि इस रास्ते भी आसानी से आप भेडेटार पहुँच सकते हैं।

भेडेटार में होटल, गेस्टहाउस या होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है। 1500 रुपये से 2500 रुपये में डबल बेड वाले रूम उपलब्ध है। हमारी टीम भेडेटार के Hideaway होटल में रुकी थी जहां प्रत्येक कमरे की बालकोनी से प्रकृति का अदभुत नजारा दिखता था। प्रत्येक क्षण प्रकृति का बदलता नजारा मानो मंत्रमुग्ध कर रहा था ।



स्काई वॉक: रोमांच का नया ठिकाना


हाल ही में भेडेटार में निर्मित स्काई वॉक टावर पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन गया है। 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) के टिकट मूल्य पर यह स्काई वॉक आसपास के पहाड़ों, घाटियों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। यह खासकर युवाओं और रोमांच प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है।


फ्री फॅाल :  फ्रीफॅाल का शुल्क भी 500 रुपये (भारतीय 313 रुपये) ही है। लेकिन दोनों का एक साथ टिकट लेने पर 1000 रुपये के स्थान पर मात्र 750 रुपये (भारतीय 469 रुपये) का भुगतान करना पड़ेगा। बच्चों और वृद्धों के लिए विशेष रियायत है । यदि आप 40 से अधिक लोगों के समूह में आते हैं तो स्काई वाक के लिए 40 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रहे है।


पाथीभारा मंदिर : भेडेटार के पास सानो (छोटी) पाथीभारा मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो स्थानीय और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है। इसके अलावा, आसपास के ट्रैकिंग ट्रेल्स और हाइकिंग रूट्स साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। धरान-भेडेटार मोटो राइड भी बाइकर्स के बीच काफी प्रसिद्ध है, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से अनुभव करने का शानदार अवसर प्रदान करता है।


नमस्ते झरना:  नमस्ते झरना वर्षों से इस क्षेत्र में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। मात्र 65 रुपये (भारतीय 41 रुपये) में झड़ने के निर्मल जल का आनंद ले सकते है।


सर्वश्रेष्ठ समय:
 फरवरी से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का सुहावना मौसम भेडेटार घूमने के लिए आदर्श है।

स्थानीय भोजन: यहाँ वेज और नॉनवेज, दोनों प्रकार के व्यंजन आपको मिलेंगे। स्थानीय व्यंजनों जैसे ढेड़ो, गुन्द्रुक और सेल रोटी का आनंद लें सकते हैं। स्थानीय लोगों के खाने में थकाली काफी प्रसिद्ध है जिहाँ प्लेट में विभिन्न प्रकार के साग सब्जी होते है। ठंडी जलवायु होने की वजह से सेहत के लिए विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ की भी सुविधा रहती है।

सुरक्षा सुझाव:

स्थानीय नियम : यदि आप निजी वाहन से आ रहे हैं तो भन्सार लेना होगा। भन्सार लेते  समय आपको एक ग्रीन स्टिकर दिया जाएगा जिसे आपको वाहन पर चिपका देना है। इससे आप अनावश्यक जाँच प्रक्रिया से बच जाएंगे। अपना आधार कार्ड अवश्य साथ में रखें।

सावधानियाँ: पहाड़ी ईलाका होने के कारण आपको अनुभवी ड्राईवर की आवश्यकता होगी। ठंडी जलवायु के कारण गर्म कपड़े साथ रखें, खासकर सुबह और शाम के समय। आप सुरक्षा के मद्देनजर अपने मोबाईल में इंटरनेशनल रोमिंग कि सुविधा ले सकते हैं या फिर नेपाल के किसी भी operater का सीम कार्ड खरीद सकते हैं। इसके लिए भारतीय पहचान पत्र (आधार कार्ड) मान्य है।

बजट : मौजूदा समय में विराटनगर से भेडेटार पहुँचने में यात्रा की अनुमानित लागत (पब्लिक ट्रांसपोर्ट से) करीब 200 से 300 रुपये खर्च होंगे। हालांकि आपको पर्याप्त राशि लेकर चलना चाहिए।

समय प्रबंधन: हमारी सलाह है कि आप यदि इस हिल स्टेशन आने की सोंच रहे हैं तो दो दिनों का प्लान बनाए ताकि आप सभी मुख्य स्थानों की सैर कर सकें। यदि आप एक दिन की यात्रा का प्लान बनाते हैं तो आप सुबह 7 बजे विराटनगर से यात्रा शुरू करने पर 2 घंटे में भेडेटार पहुँच जाएंगे जहां आप स्काई वाक और फ्री फॅाल का आनन्द ले। करीब दो घंटे बाद आप आराम से पाथीभारा मंदिर की ओर निकाल सकते है। यहाँ आपको करीब 2 घंटे का समय लग जाएगा। फिर आप नमस्ते झरना की ओर बढ़ सकते हैं । शाम में आप वापसी कर सकते हैं। लेकिन सुबह का नजारा जो काफी मनमोहक होता है देखने के लिए आपको रात भेड़ेटार में गुजारनी चाहिए।

कुल मिलाकर कहा जाए तो भेडेटार प्रकृति, रोमांच और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। चाहे आप शांति की तलाश में हों, रोमांचक अनुभव चाहते हों या स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना चाहते हों, यह हिल स्टेशन हर पर्यटक के लिए कुछ न कुछ खास प्रदान करता है।

वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में मिलकर प्रयास करने होंगे: मीनाक्षी कुमारी

जोगबनी। 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर जोगबनी नगर परिषद में भारत-नेपाल मैत्री पर्यावरण संरक्षण अभियान द्वारा वृक्षारोपण किया गया। इस मौके पर जोगबनी नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी मीनाक्षी कुमारी ने कहा कि तापमान में वृद्धि होना सबके लिए चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में सबको मिलकर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि जोगबनी नगर परिषद को हरित नगर में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में नगर परिषद के साथ ही मैत्री संस्था के साथ मिलकर 15 अगस्त को बृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया है। पर्यावरण दिवस से अब तक सीमावर्ती इलाके में हजारों पौधारोपण किए गए हैं।


भारत-नेपाल मैत्री पर्यावरण संरक्षण अभियान के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सीमावर्ती इलाके में अनेक कार्य किए गए हैं। उन्होंने सभी विद्यालयों, कॉलेजों, सरकारी निकायों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों से अपने परिसर में अधिक से अधिक पौधों का रोपण करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्य पार्षद रानी देवी, समिति की सदस्य सुनीता राउत, भाजपा नेता व मुख्य पार्षद प्रतिनिधि रोहित यादव, नगर परिषद के परवेज आलम, पत्रकार नवीन कर्ण, विनीता सिंह, सहित दोनों देश के गणमान्य लोग मौजूद थे।

वाशिंगटन डीसी से आए उच्चस्तरीय भ्रमण दल के अधिकारी ने किया रुद्राक्ष का पौधा रोपण

  • धार्मिक सांस्कृतिक महत्व में विशिष्ट स्थान रखता है रुद्राक्ष: सुरेश शर्मा 



नेपाल (राज टाइम्स) । समृद्धि के लिए वन परियोजना, मधेस प्रदेश के स्थलगत भ्रमण के क्रम में विश्व बैंक, केन्द्रीय कार्यालय वाशिंगटन डीसी से आए उच्चस्तरीय भ्रमण दल को वृक्ष मानव सुरेश शर्मा द्वारा रुद्राक्ष का दो पौधा उपहार स्वरूप प्रदान कर गमला पौधा रोपण करवाया गया।

इस संदर्भ में पर्यावरणविद सुरेश शर्मा ने बताया कि कार्यालय वाशिंगटन डीसी से आए उच्चस्तरीय भ्रमण दल के द्वारा गमले में रोपे गए रुद्राक्ष के पौधे को कुछ समय पश्चात उचित स्थान पर रोपण किया जायेगा। वहीं इस कार्य के लिए परियोजना संयोजक सह प्रदेश वन निर्देशक सुनील कर्ण तथा सम्पूर्ण सहभागी सहयोगी पर्यावरण मित्र को धन्यवाद  ज्ञापन किया गया। 

पर्यावरण अभियंता श्री शर्मा ने बताया कि धार्मिक सांस्कृतिक प्रतीकों में रुद्राक्ष एक विशिष्ट स्थान रखता है, जो इसकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक आस्था का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसका मुख्य कारण है रुद्र एवं अक्ष अर्थात भगवान शिव के आँसुओं के रूप में इसकी पहचान। माना जाता है कि जब भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त कर त्रिपुरासुर सृष्टि के लिए खतरा बन गया तो उसका संहार करने के लिए शिव ने रौद्र रूप धारण किया और तब उनकी आंखों से निकले आंसू धरती पर गिरे तथा उन्होंने रुद्राक्ष का रूप धारण कर लिया। अतः इसे भगवान शंकर के प्रतीक के रूप में माना जाता है, जिसे माला से लेकर कलावा, कवच, मुकुट और न जाने कितने रूपों में धारण किया जाता है।



शिव व शक्ति की उपासना में रुद्राक्ष का महत्व

हिंदू धर्म में विशेष रूप से शिव व शक्ति-उपासना में इसका विशेष महत्व रहता है व इसकी माला से जप किया जाता है। इसका पौधा प्रमुखतः हिमालयी क्षेत्रों में 6000 से 9000 फीट की ऊंचाइयों में पाया जाता है। नेपाल सहित भारत के उच्च क्षेत्रों में यह बहुतायत में पाया जाता है। भारत में रुद्राक्ष उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम जैसे हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त दक्षिण भारत के मैसूर, नीलगिरी और कर्नाटक में भी रुद्राक्ष के पौधे मिलते हैं।

नेपाल में पाया जाता है सबसे बड़ा रुद्राक्ष

भारत के बाहर इंडोनेशिया, नेपाल और मलेशिया देश रुद्राक्ष के प्रमुख स्रोत हैं। नेपाल में पाया जाने वाला रुद्राक्ष आकार में अधिक बड़ा होता है, जबकि इंडोनेशिया व मलेशिया का रुद्राक्ष छोटा होता है। रुद्राक्ष मूलत: शीतल जलवायु का पौधा है, जो ठंडी जलवायु में अधिक बढ़ता है। अधिक तापमान वाली जगह में इसे छायादार जगह पर उगाया जाता है। यह एक सदाबहार पेड़ है, जो तीव्रता से विकसित होता है। इसके पौधे में 3-4 वर्षों बाद फल आना प्रारंभ हो जाते हैं।

रुद्राक्ष को लेकर प्राचीन मान्यता

मान्यता है कि प्राचीनकाल में 108 मुखी वाले रुद्राक्ष होते थे, किंतु आज इसमें एक से 21 रेखाएँ अर्थात मुख पाए जाते हैं। नेपाल में 27 मुखी रुद्राक्ष तक मिला है। रुद्राक्ष का मापन मिलीमीटर में होता है। इंडोनेशिया में मिलने वाला रुद्राक्ष जहां 5 से 25 मिमी के बीच होता है, तो वहीं नेपाल में मिलने वाला रुद्राक्ष 20 से 35 मिमी का होता है। 14 मुखी रुद्राक्ष को सबसे शक्तिशाली रुद्राक्ष माना जाता है, जबकि एक मुखी को सबसे विरल, पावन तथा श्रेष्ठ माना जाता है।

महाभागवत पुराण में भी रुद्राक्ष का जिक्र

महाभागवत पुराण में कहा गया है कि जिस घर में एक मुखी रुद्राक्ष रहता है, उस घर में माता लक्ष्मी वास करती हैं। 4, 5 और 6 मुखी रुद्राक्ष सबसे सामान्य हैं। पंचमुखी रुद्राक्ष जहाँ सबसे अधिक मिलते हैं व कम कीमत में उपलब्ध हो जाते हैं तो वहीं 1 मुखी, 14 मुखी व 21 मुखी रुद्राक्ष दुर्लभ रहते हैं तथा बेहद महंगे होते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर होता है रुद्राक्ष

रुद्राक्ष अपनी दिव्यता के साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसकी माला को धारण करने से भूतबाधा व नकारात्मक विचार दूर होते हैं। इसकी माला गले में धारण करने से रक्त का दबाव अर्थात उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। रुद्राक्ष से निकलने वाले तेल से दाद, एक्जिमा और मुंहासों से राहत मिलती है, ब्रोंकियल अस्थमा में भी आराम मिलता है।

दिल की बीमारी से बचाता है रुद्राक्ष

दिल की बीमारी व घबराहट में रुद्राक्ष एक प्रशांतक औषधि का काम करता है। इसके पत्तों में गुण पाए जाते हैं। इसलिए इसके पत्तों का लेप घाव के उपचार में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों की चर्चा हुई है। इसके पत्तों से सिरदर्द, माइग्रेन, एपिलेप्सी तथा मानसिक रोगों का उपचार किया जाता है। फल के छिलके का उपयोग सर्दी, फ्लू और बुखार में किया जाता है। साथ ही इसके पत्तों व छिलकों का उपयोग रक्त के शोधन में भी किया जाता है। आयुर्वेद के ग्रंथों के अनुसार- रुद्राक्ष शरीर को सशक्त करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, नैसर्गिक उपचारात्मक शक्तियों को जाग्रत करता है और समग्र स्वास्थ्य में योगदान देता है।