सुपौल और बीरपुर की जेलों में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान, बंदियों को बताए गए कानूनी अधिकार
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| मंडल कारा, सुपौल में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं मानसिक परामर्श शिविर में उपस्थित अधिकारी, चिकित्सक और बंदी। |
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल; मंडल कारा सुपौल और अनुमंडलीय कारा बीरपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं मानसिक परामर्श शिविर आयोजित
सुपौल | 10 अक्टूबर 2026
सुपौल। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बंदियों को समय पर उपचार, उचित परामर्श और निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंडल कारा, सुपौल एवं अनुमंडलीय कारा, बीरपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम और मानसिक परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा उपलब्ध चिकित्सा एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी दी गई। साथ ही यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, संवेदनशील व्यवहार और आवश्यक उपचार का हकदार है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशन में कार्यक्रम
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BLSA) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल राजेश कुमार बच्चन के निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम का पर्यवेक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने किया।
यह आयोजन मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएँ योजना, 2015 के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को विधिक सहायता और उनके अधिकारों के संबंध में जागरूक करना है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार पर जोर
शिविर के दौरान चिकित्सकों एवं वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, उचित उपचार और नियमित परामर्श के महत्व पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। ऐसी समस्याओं से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील और मानवीय व्यवहार अपनाने की भी अपील की गई।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान देना और उन्हें उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता और अधिकारों की दी गई जानकारी
विधिक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बंदियों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए भी कानून में अधिकार और संरक्षण के प्रावधान हैं।
आर्थिक अथवा अन्य कारणों से विधिक सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होने पर पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार से बचने, उनकी गरिमा बनाए रखने तथा उनके कानूनी अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया गया।
मानसिक परामर्श शिविर में विशेषज्ञों ने दी जानकारी
विधिक जागरूकता कार्यक्रम के साथ मानसिक परामर्श शिविर भी आयोजित किया गया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों, समय पर चिकित्सकीय सहायता और परामर्श की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
शिविर का उद्देश्य बंदियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें आवश्यक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना था।
अधिवक्ता, चिकित्सक और कारा प्रशासन के अधिकारी रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता संजय कुमार, सहायक विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता सौरभ मोहन ठाकुर, सदर प्रखंड सुपौल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार तथा कारा चिकित्सक डॉ. एम. के. मिलन उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त एएनएम नीलम सिंह एवं रिंकू कुमारी, ड्रेसर प्रकाश कुमार, कारापाल शंभू कुमार दास तथा कारा में कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
जेलों में मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा की रक्षा की दिशा में पहल
जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह कार्यक्रम काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और कानूनी सहायता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह पहल इस संदेश को भी रेखांकित करती है कि जेल में निरुद्ध व्यक्ति भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, मानवीय व्यवहार और विधि के अनुसार उपलब्ध अधिकारों के हकदार हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर उपचार और विधिक सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करने से बंदियों के कल्याण एवं पुनर्वास के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
समाचार स्रोत: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल की प्रेस विज्ञप्ति।


