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होली के उपलक्ष्य पर मुख्यमंत्री निवास में रंगारंग कार्यक्रम आयोजित



विराटनगर (नेपाल)। कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री निवास में रंगों के त्यौहार होली के उपलक्ष्य पर रंगारंग एवं धमाकेदार होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री केदार कार्की द्वारा आयोजित कार्यक्रम को लेकर आमजन के बीच काफी उत्साह था। इस मौके पर प्रदेश के सभी प्रदेश सांसद, सरकारी निकाय के अधिकारी के द्वारा जमकर होली खेली गई। सभी लोगों ने इसे बेहद उत्साह के साथ मनाया। 

 बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी..., होली खेले रघुबीरा अवध में... जैसे होली गीतों पर सभी खूब थिरके। रंगों के अलावा अबीर - ग़ुलाल से मुख्यमंत्री आवास रंग-बिरंगा हो उठा। एक साथ मिले विभिन्न रंग अनेकता में एकता और भाईचारे का संदेश दे रहे थे। 



इस अवसर पर सभी के लिए भोजन का प्रबंध था, जिसमें विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन शामिल थे। सभी ने इस खास मौके पर सहभोज का आनंद लिया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कार्की ने सभी को होली की बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज सभी पुराने राग-द्वेष आदि को समाप्त कर सभी के साथ अच्छा व्यवहार करते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढ़ना है। इस अवसर पर सभी राजनीतिक दल के नेता उपस्थित थे।



होली के अवसर पर मारवाड़ी युवा मंच द्वारा आयोजित किया जा रहा हास्य कवि सम्मेलन, भारत के जाने-माने कवि लेंगे भाग



नेपाल। मारवाड़ी युवा मंच शनिवार को विराटनगर में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। होली के अवसर पर मारवाड़ी युवा मंच के द्वारा विराटनगर स्थित जैन भवन में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है। हास्य कवि सम्मेलन में भारत के 5 जाने-माने कवि होली की रंगारंग थीम पर केंद्रित कविताएं सुनाएंगे। कार्यक्रम में चिराग जैन, अरुण जेमिनी, शंभू शिखर, मनीष सुक्ला और गोविंद राठी हास्य कविताएं सुनाएंगे।

वहीं कार्यक्रम का प्रायोजन हरि सिंह, उषा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। जिसमें केएल दुगड़ ग्रुप, एशियन थाईफूड्स के रम्पम नूडल्स, हुलास, विक्टोरिया मसाला, प्योर, हाईटेक कार्पेट, डेवेनारा ग्रुप, इलेक्ट्रा एंड इलेक्ट्रिक और फुट गेम्स, काबरा ग्रुप, राठी ग्रुप सहित एक दर्जन से अधिक उद्योगपति, व्यापारी, बैंक और वित्तीय संस्थान कार्यक्रम को प्रायोजित कर रहे हैं।

मारवाड़ी युवा मंच विराटनगर के अध्यक्ष अंकित मारू ने बताया कि कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज के 3 हजार से अधिक लोग भाग लेंगे। वे सभी लोग कार्यक्रम के बाद आयोजित सामूहिक मिलन एवं प्रसाद ग्रहण में भाग लेंगे। पवन पंकज पारख को कार्यक्रम समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। हास्य कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि उद्योगपति एवं समाजसेवी केएल दुगड़ होंगे।

Bihar-कटिहार के मेयर शिवराज पासवान की गोली मारकर हत्या

  • अज्ञात अपराधियों ने दिया घटना को अंजाम 

  • नगर थाना परिसर में तनाव की स्थिति, भारी संख्या में पुलिस की की गई तैनाती



कटिहार (राज टाइम्स)
 मेयर शिवराज पासवान को अपराधियों ने ने गोली मारकर हत्या कर दी। जो कटिहार नगर निगम के अल्पसमय के लिए मेयर बने थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। शिवराज पासवान की हत्या होने के बाद उनके चाहने वाले काफी आक्रोशित हो गए हैं। सैकड़ों की संख्या में लोग नगर थाना पहुंचकर शिवराज पासवान का शव रखकर प्रदर्शन कर रहे है। लोगों की मांग है कि उनके हत्यारों की गिरफ्तारी जल्द हो। बताया जा रहा है कि नगर थाना क्षेत्र के संतोषी मंदिर के समीप अज्ञात लोगों ने मेयर शिवराज पासवान को गोली मारी है। लगभग 3 गोली लगी थी। जिसके कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और मेयर को उठाकर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत के बाद कटिहार शहर में स्थिति तनावपूर्ण हो गया है। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद कई जगह से लोग नगर थाना परिसर पहुंच रहे हैं। इस घटना के बाद लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है। लोग नगर थाना परिसर में जमकर प्रदर्शन कर रहे है। फिलहाल मेयर को गोली मारने वाले अपराधियों का पता नहीं चला है। जानकारी हो कि शिवराज पासवान वार्ड संख्या 16 के वार्ड पार्षद थे। उनकी पत्नी मंजू देवी 17 नंबर वार्ड के पार्षद है। जब विजय सिंह विधायक बन गए तो उनके बाद अल्प समय के लिए वह मेयर बने थे। उनका कार्यकाल एक माह का ही था। इसी दौरान उन्होंने अपनी जगह लोगों के बीच बनाया था। 26 जून को मेयर का कार्यकाल समाप्त हुआ था। फिलहाल इस घटना के बाद उनके वार्ड और अन्य जगह से लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। फिलहाल सभी लोग उनके शव को नगर थाना लेकर पहुंचे हुए है। इस जगह स्थिति काफी तनावपूर्ण है। जिसे देखते हुए पुलिस के द्वारा बड़ी संख्या में पुलिस बलों को थाना परिसर बुलाया गया है। इस मामले को लेकर पुलिस भी कुछ भी बोलने से कतरा रही है। फिलहाल पुलिस की स्थिति को सामान्य करने में जुटी हुई है। उग्र लोगों को पुलिस के द्वारा समझाने बुझाने का प्रयास जारी है।
मेयर शिवराज फाइल फोटो

BIHAR- पप्पू यादव की गिरफ्तारी किसके इशारे पर

बड़ा सवाल- वारंट के बाद मधेपुरा से लड़ा चुनाव, जिस थाने में था केस दर्ज वहाँ की पुलिस ने दी थी प्रचार के दौरान सुरक्षा?

सरकार की आलोचना हो गई है तेज

पटना (राज टाइम्स) जाप सुप्रीमो सह पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद सूबे में सियासी तूफान खडा हो गया है। पुलिसिया कार्रवाई की टाइमिंग पर अब सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि फरवरी 2020 में पहला वारंट जारी होने के 8 माह बाद अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव हुआ था। जिसमें मधेपुरा संसदीय क्षेत्र से पूर्व सांसद पप्पू यादव ने चुनाव लड़ा था। पप्पू यादव के खिलाफ जिस मुरलीगंज थाने में केस दर्ज था वहां की पुलिस ने प्रचार के दौरान उनके सुरक्षा की कमान संभाली थी तो फिर उस समय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया।

विधानसभा चुनाव के दौरान वे प्रचार करने मधेपुरा आए थे, लेकिन तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। शायद गिरफ्तारी से पूर्व सांसद को चुनाव में सहानुभूति का लाभ मिल जाता, इसलिए पुलिस उनकी सभाओं में मौजूद थी, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया। पप्पू यादव अपने प्रत्याशी ई. प्रभाष की चुनावी सभा को संबोधित करने उसी मुरलीगंज भी गए थे, जहां के थाने में उनके खिलाफ केस भी दर्ज था। फिर भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। ऐसे में इस समय जब वे लागातार कोरोना पीड़ितों की दवा से लेकर सभी तरह की मदद कर रहे हैं, इस कार्रवाई को जाप कार्यकर्ता सहित सभी विपक्षी दल राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी की खबर के बाद जिले में सभी जगह जाप कार्यक्रताओं ने विरोध जताया।

बताते चलें कि पूर्व सांसद को पटना पुलिस ने मधेपुरा पुलिस को मंगलवार की देर शाम को सौंप दिया था। वजह थी मधेपुरा कोर्ट से 32 वर्ष पुराना अपहरण का एक मामला जिसमें उनका बेल टूट गया था। जिसके बाद वारंट जारी हुआ था और उन्हें फरार घोषित कर दिया गया। बाद में 22 मार्च 2021 को दूसरा वारंट जारी किया गया था।

पहले से गिरफ्तारी की योजना थी

पप्पू यादव को गिरफ्तार करने की पटकथा पूर्व से ही लिखी जा चुकी थी क्योकि सोमवार सुबह पूर्व सांसद पप्पू यादव सिंहेश्वर में निजी कार्यक्रम में जाने वाले थे जिसके लिए वे रविवार रात दो बजे पटना से निकलते। इसे देखते हुए उनके पीए ने रूट के सभी जिलों के जिलाधिकारी डीएम और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी। लेकिन देर रात को उन्होंने सिंहेश्वर आने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके बावजूद भी प्रशासन लगातार उन पर नजर रखे हुए थी। पुलिस-प्रशासन को आशंका थी कि वे बिना सुरक्षा के भी शार्टकट रास्ते से सिंहेश्वर के लिए निकल जाए। सुबह भी पुलिस चौकन्ना थी। गम्हरिया में मधेपुरा-सुपौल जिला की सीमा चेकपोस्ट पर खुद एसपी भी लाव-लश्कर के साथ सुबह में पहुंचे थे। मंगलवार को जब पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद मधेपुरा जिला से उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ सतीश कुमार के नेतृत्व में कुमारखंड थाने की पुलिस को वहां भेजा गया।

 

जनता अब पूरी तरह पप्पू के पक्ष में हैं क्योकि

·         जहाँ कोरोना के प्रभारी मंत्री तक क्षेत्र में जाने से कतराते थे, तब अस्पताल से लेकर श्मशान तक अकेले पप्पू यादव और उनकी टीम दिख रही थी

·         जब बिहार में ऑक्सीजन के अभाव में मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा तो पप्पू यादव ने पूर्व मंत्री राजीव प्रताप रूडी के आवास पर छिपाकर रखे गये एम्बुलेंस का मुद्दा उछाल दिया

·         जहां कहीं भी महामारी के समय कोई दिक्कत में होता था, वहां मसीहा के रूप में पप्पू यादव पहुंच जाते थे

·         पटना की बाढ़ में अकेले पप्पू यादव ने जितना किया वैसा किसी भी सियासी पार्टी ने नहीं किया

 

जेल में रहना पड़ सकता है पूर्व सांसद को

दरअसल, 1989 में मुरलीगंज थाना में रामकुमार यादव के अपहरण के आरोप में पप्पू यादव के खिलाफ कांड संख्या- 09 /89 दर्ज कराया था। सूत्रों की मानें तो इस कांड में पप्पू यादव को पहले जमानत मिली थी, लेकिन सुनवाई में भाग नहीं लेने की वजह से यादव की जमानत को रद्द करते हुए उन्हें फरार घोषित कर दिया गया। जानकर बताते हैं कि कोर्ट बंद है तो अभी जमानत भी आसानी से नहीं होगा। चूंकि मामला 32 वर्ष पुराना है इसलिए अब मुकदमे का निर्णय के बाद ही उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।

सुपौल/बिहार - पीएचसी प्रभारी डॉ अखिलेश के साथ हुई मारपीट, कर्मियों ने अस्पताल में लगाया ताला

सुपौल से लाल बहादुर यादव की रिपोर्ट 

बिहार/सुपौल- कोरोना संक्रमण काल में सरकारी मदद तो दूर, मजदूरी की राशि के लिए कलाकार दर दर भटकने को मजबूर


महिला विकास निगम द्वारा मनोज फाउंडेशन को जनवरी में सुपौल जिला में जागरूकता अभियान चलाने का दिया था आदेश! विभागके पास पूरी राशि शेष!!

सुपौल (राज टाइम्स)। सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने वाले कलाकार इन दिनों आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। मामला सुपौल जिले का है जहाँ राज्य सरकार के महिला विकास निगम के आदेश पर बीते फरवरी माह में कलाकारों द्वारा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन, कन्या उत्थान योजना तथा महिलाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया। लेकिन अपने मेहनताने के लिए कलाकारों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। कलाकारों ने सूबे के कला संस्कृति युवा विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर मेहनताना भुगतान की दिशा में पहल का अनुरोध किया है।
फोटो- मजदूरी की राशि के लिए दर दर भटकने को मजबूर कलाकार 

सरकारी भुगतान- क्या है हकीकतक्या है फसाना

 सुपौल जिला टीम लीडर इंदल कुमार ने मंत्री को भेजे आवेदन में कहा है कि महिला विकास निगम के कार्यालय आदेश संख्या 1793 के आलोक में मनोज फाउंडेशन को सुपौल जिले के 60 पंचायतों में 181 कार्यक्रम का आदेश जनवरी में प्राप्त हुआ था। जिसके बाद संस्था से जुड़े कलाकारों ने जनवरी-फरवरी माह में 181 जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया। लेकिन इन कार्यक्रमों के एवज में संस्था को अब तक राशि का भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। इंदल के अनुसार कोरोना संकट की वजह से कलाकारों का सामान्य कामकाज भी प्रभावित है। ऐसे में उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने मंत्री से कलाकारों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द भुगतान की दिशा में पहल का अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, जल जीवन हरियाली अभियान जैसे कार्यक्रम सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल हैं। यही कारण है कि बीते दिनों सरकार ने इस को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। लेकिन लोगों को जागरूक करने वाले कलाकार ही सरकारी व्यवस्था से परेशान हैं। उन्हें कार्य समाप्ति के पन्द्रह दिनों के भीतर भुगतान दिए जाने की बात बताई गयी थी पर छह माह बीत जाने के बाद भी उन्हें भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में सरकारी योजनाओं की उपलब्धि बताने वाले कलाकार स्वयं सरकारी व्यवस्था के शिकार हो रहे हैं।  इस सम्बन्ध में मनोज फाउंडेशन के सचिव मनोज सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी को सारे कागजात विभाग को जमा करवा दिया था लेकिन उच्चाधिकारियों के स्थानान्तारण के कारण 15 दिनों मे होने वाला भुगतान अब तक नहीं हुआ है कलाकारों की निगाहें अब मंत्री की पहल पर टिकी हैं। कलाकारों ने बताया कि इससे पूर्व जिलाधिकारी से लेकर विभागीय सचिव तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अधिकारी भुगतान को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

सुशांत सिंह राजपूत का जाना - एक उम्मीद का अन्त

सुशांत सिंह राजपूत (फ़ाइल फोटो)

सेंट्रल डेस्क (राज टाइम्स)।  सुशांत सिंह राजपूत जैसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हँसमुख और सदाबहार दिखने वाले नौजवान की मौत जितनी दुखद है उतनी ही रहस्यमय भी है। इस नौजवान की मौत से लोगों के मन में अनेक प्रश्न उत्पन्न हुए हैं। घर और समाज में सबका लाड़ला, अपने प्रशंसकों का चहेता और अपार लोकप्रियता को हासिल करने वाला सख्श जिसकी फिल्मों को लोग अपनी उदासी को खत्म करने के लिए देखा करते थे को कौन सी निराशा ने इतना मजबूर किया कि उसे मौत को गले लगाना पड़ा? अब तक प्राप्त जानकारियों के आधार पर पुलिस ने उसकी मौत को आत्महत्या करार दिया है जो अत्यंत रहस्यमयी है। इस मौत ने दुनिया को ये सोचने को विवश किया है कि क्या रिल लाइफ और रियल लाइफ में जरा सा भी तालमेल नहीं होता ? क्या सिल्वर स्क्रीन पर आत्महत्या को गलत ठहराने वाला व्यक्ति रियल लाइफ में खुद इसे अपना सकता है ? कहा जाता है कि अभिनय में वास्तविकता तब आ पाती है जब अभिनेता पर्दे पर उस भूमिका को जीता और महसूस करता है। सुशांत सिंह राजपूत की अभिनय में वास्तविकता एवं जीवंतता का अंदाजा उनकी फिल्मों के देखकर लगाया जा सकता है। 'एम एस धोनी -  द अनटोल्ड स्टोरी' जैसी बायोपिक फिल्म में महेन्द्र सिंह धोनी की भूमिका को वास्तविकता से परिपूर्ण कर उसने इस प्रकार से जीवंत बनाया था कि चारों ओर उसकी भूमिका की चर्चा एवं प्रशंसा हुई।  अपनी एक अन्य फिल्म 'छिछोरे' में सुशांत ने अपने पुत्र को आत्महत्या करने से मना करते हुए कहा है कि ' जीवन में हार नहीं माननी चाहिए, सुनहरा पल जरूर आता है।'  तो क्या उसे आत्महत्या करते वक्त अपने इस डायलॉग की जरा भी याद नहीं आई? यदि उसने इस डायलॉग को कैमरे के सामने बोलते समय अपनी भूमिका को जरा भी जिया होता तो आत्महत्या करते वक्त उसे उसकी याद आनी चाहिए थी।  क्या सिल्वर स्क्रीन पर अभिनय करना दौलत और शोहरत हासिल करने के लिए किया गया महज एक काम है? अभिनेता या अभिनेत्री के वास्तविक जीवन पर इसकी कोई छाप नहीं पड़ती ? जिन अभिनेताओं, अभिनेत्रियों की फिल्मी डायलॉगों से प्रेरित होकर हजारों लोग अपनी जिन्दगी के फैसले बदल देते हैं वही अभिनेताएं, अभिनेत्रियां अपनी जिन्दगी के फैसले लेते वक्त इन डायलॉगों की परवाह न करे तो इसे कौतुहल का विषय बनना लाजमी है।
  बॉलीवुड में ऐसी मौत की शिकार होने वाला सिर्फ सुशांत ही नहीं है बल्कि ऐसी हस्तियों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है। इन मौतों के चाहे जितने भी कारण रहे हो लेकिन इन सबका एक प्रमुख कारण मरने वाले व्यक्ति का अकेलापन रहा है। ये हमारे समाज के लिए एक चिन्तनीय विषय है कि अपने करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाली ये हस्तियाँ अपने निजी जीवन में इतनी अकेले क्यों हो जाते हैं कि उन्हें इस अकेलापन से मुक्ति पाने के लिए मौत का मार्ग अपनाना पड़ता है?
किसी भी सफल इन्सान को दौलत, शोहरत, मान - सम्मान और प्रसिद्धि के आलावा अपनों का साथ और अपनापन की भी जरूरत होती है। अपनों का साथ व्यक्ति को कभी भी अकेला नहीं होने देता है। आज के दौर में हमारे सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन की संरचना ऐसी होती जा रही है कि व्यक्ति का जीवन स्वयं तक सिमटता जा रहा है। ऐसे में व्यक्ति तनाव एवं अवसाद से ग्रसित हो जाता है। उसके पास अपनी तकलीफों को साझा कर अपने मन को हल्का करने के लिए कोई अपना नहीं होता है। अपने इस अकेलेपन में परेशानियों की बोझ तले दबा वो व्यक्ति शायद इससे निजात पाने के लिए मौत के मार्ग पर चल पड़ता है और आत्महत्या कर लेता है।
हमारे समाज में बढ़ती ये घटनाएं हमें ये सबक देती हैं कि हम अपने पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में अपनों के साथ अपने रिस्तों का तानाबाना कुछ इसप्रकार बुने कि किसी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में अकेलेपन का सामना न करना पड़े। हम कभी किसी अपने को अकेला न छोड़े और न ही स्वयं अकेलेपन का शिकार बने। मौत की इन घटनाओं को रोकने का यह एक सार्थक प्रयास साबित हो सकता है।
  सुशांत सिंह राजपूत जैसे होनहार नौजवान से सिर्फ सिनेमा जगत को ही नहीं बल्कि पूरे देश को एक नई उम्मीद थी। सुशांत कलाकार होने के साथ - साथ , शिक्षा, सायंस- टेक्नोलॉजी , खेलकूद इत्यादि की समझ रखने वाला और समाज के लिए काम करने का जज्बा रखने वाला इन्सान था। बिहार के इस लाल से देश को कई उम्मीदें थीं।  उसकी असमय मौत ने सम्पूर्ण देशवासियों की इस उम्मीद का अंत कर दिया है। माना इन उम्मीदों को पूरा करने वाला लोई अन्य इन्सान भी हो सकता है परंतु अब कभी भी 'छिछोरे' का वो सुशांत सिंह राजपूत इन उम्मीओं को पूरा नहीं कर सकता है।
अलविदा सुशांत ।


सुनिता कुमारी 'गुंजन',
सहायक प्रोफेसर,
MJMC (NOU)

बिहार- लॉकडाउन से भोजपुरी के छोटे कलाकारों की बढ़ी मुसीबत, सरकार और बड़े कलाकरों से लगाई मदद की गुहार




पटना (राज टाइम्स) कोरोना संक्रमण काल के दौरान विभिन्न उद्योगों पर संकट के बादल छाए हुए हैं । जिनसे जुड़े लोगों के समक्ष भुखमरी जैसे हालात बन रहे हैं । संक्रमण के ऐसे कालचक्र में भोजपुरी के छोटे कलाकार भी फंस चुके हैं। जो भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़े हैं। बड़े कलाकार तो किसी तरह अपना जीवन यापन कर ले रहे हैं, लेकिन छोटे कलाकारों को इस संक्रमण काल को झेलना मुश्किल साबित हो रहा है। बच्चों तथा परिवार को लेकर इस संक्रमण काल में जीवन बसर करने के लिए उनके समक्ष अब कोई रास्ता नहीं बचा है। दुखद तो यह है कि अब तक ऐसा माध्यम नहीं बन पा रहा है जो उन्हें इस विकट परिस्थिति में संबल प्रदान कर सके।
फोटो- भोजपुरी कोरियोग्राफर आर्यन डीडीके
भोजपुरी कोरियोग्राफर 'आर्यन डीडीके' का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान सरकार ने सभी वर्गों का ध्यान रखा है । गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है । मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जा रही है, मुफ्त गैस सिलेंडर भी दिए जा रहे हैं । किसानों को मिलने वाली सम्मान निधि का पैसा भी जारी कर दिया गया है। सरकार सभी वर्गों के लिए कुछ ना कुछ कर रही है। लेकिन कलाकारों के लिए कोई राहत पैकेज नहीं निकाला गया है।
यहां तक कि भोजपुरी फिल्म एलबम बनाने वाली बड़ी बड़ी कंपनियां और भोजपुरी फ़िल्म जगत के सुपर स्टार पवन सिंह, गुंजन सिंह, रितेश पांड्य, खेशारी लाल यादव बड़े कलाकर हैं जो मजदूरों की मदद तो कर रहे हैं, लेकिन छोटे कलाकारों की तरफ कोई हाथ आगे नही बढ़ा रहा । वहीं कुछ मॉडल ऐश्वर्या झा, अंबर जी, खुशी कुमारी, पूजा कुमारी, समीर, अशोक सम्राट, गणेश कुमार, रवि शास्त्री जैसे कलाकारों ने दिन-रात इनका सहयोग कर साथ रहकर काम किया और मेहनत की है । आज ये स्टार इतनी बड़ी मुकाम हांसिल कर पाए हैं ।
उन्होंने बताया कि बिहार में ऐसे बहुत से कलाकार हैं जो सिर्फ कला पर ही निर्भर हैं जैसे टेक्नीशियन, सपोर्ट बॉय, साउंडमैन, कोरियोग्राफर, ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें आज मदद की जरूरत है ।

रिपोर्ट- धीरज झा

फ़ोटो जर्नलिस्ट- कर्तव्यनिष्ठ कर्मयोग से घरों से दूर दुनिया को हाल ए शहर बताने वालों की हाल बताती खास रिपोर्ट

राज टाइम्स। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी घोषित हुई तो पूरा विश्व सकते में आ गया पर कोरोना वारियर्स अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। बहुत से डॉक्टर और पुलिसकर्मियों और उनके परिवार की खबरें प्रमुखता से छापी जा रही है पर इन वारियर्स की खबरें लिखने और फ़ोटो खिंचने वाले समाज के चौथे स्तम्भ में भी कुछ ऐसे फोटोजर्नलिस्ट हैं जो अपने परिवार से दूर जनता और प्रशासन के बीच सामंजस्य अपनी तस्वीरों के माध्यम से सदैव पहुंचाने में डटे हुए हैं। क्योंकि लॉकडाउन की इस मुश्किल घड़ी में पत्रकारिता वर्क टू होम व फोन पर सूचनाओं के अधार अदान-प्रदान हो सकती हैं। पर बेहतर तस्वीरों के लिए बिना मौके पर जाएं कदापि प्राप्त नहीं हो सकती।
ऐसे ही कुछ फोटोजर्नलिस्ट वारियर्स की कहानी आज हम आप से साझा करते जो इस संक्रमित महामारी से खुद को बचाते हुए घर परिवार से दूर अपनी कर्मस्थली पर आप के कार्य को अंजाम दे रहे हैं । कोई राजधानी लखनऊ में है तो कोई देहरादून में है तो कोई प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में अपने कार्य को हर पल संक्रमण के खतरों के बीच बखूबी निभा रहे हैं ।

पहली कहानी हैः
हिंदुस्तान टाइम्स चंडीगढ़ के प्रिंसिपल फ़ोटो जॉर्नलिस्ट #रवि_कुमार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। हिमाचल में मां, पापा, बीवी और 6 महीने का बेटा है। अप्रैल में बेटे को पहली बार चंडीगढ़ ले कर आना था। लॉकडाउन के चलते अब वही है। रवि ने बताया कि हर रोज जब भी समय मिलता है वीडियो काल पर घर पर बात कर लेता हूं। बेटे को जितना मिस करता हूं उससे ज्यादा इस बात का सकून है की अकेले मां-बाप की देखभाल के लिए मेरी पत्नी उनके पास है। दंगे, लूटपाट, बाढ़, आर्मी के ऑपरेशन और भी कई तरह के असाइनमेंट कवर किए। पर महामरी क्या होती है और इसका डर क्या होता हैं? आज पुरा विश्व गवाह हैं। अतः सभी से निवेदन है दूरी बनाए रखे और अपना ख्याल रखें।

दूसरी कहानीः
देहरादून में समाचार एजेंसी ANI के कैमरापर्सन #अफ़ज़ाल_अहमद की । अफ़ज़ाल की बेटी का जन्मदिन आगामी 14 अप्रैल को है शायद वो उस दिन अपनी बेटी से मिलने जाएंगे पर कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि अफ़ज़ल का घर देहरादून के कारगिग्रांट में है पर यह इलाका कोरोना संक्रामित के मिलने के बाद से सील है । अपने काम की प्रति निष्ठा ने इन्हें घर मे रहने नही दिया और ये पिछले कुछ दिनों से शहर की सुभाष रोड स्थित एक होटल में रह रहे हैं। रोज़ाना खाली होने पर वीडियो कॉल के द्वारा बात कर रहे थे पर आज उनकी दोनों बेटियों को पापा की ज़्यादा याद आयी तो अफ़ज़ाल अपनी बेटियों से मिलने अपने घर के पहले की गई बैरिकेडिंग तक गए और उनसे मिले ।

तीसरी कहानी हैः
उत्तर प्रदेश, गाजीपुर जनपद के दिलदारनगर बाज़ार के रहने वाले भारत समाचार न्यूज़ चैनल के कैमरापर्सन #नीरज_जायसवाल की। नीरज इन दिनों वाराणसी में कार्यरत्त हैं और अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। बहुत कम समय मे अपना मुकाम वाराणसी की मीडिया में बनाने वाले नीरज ने बताया कि वो परिवार से दूर रहते हैं एयर जब से पता चला कि मेरा मोहल्ला सील किया गया है और गाजीपुर जनपद के हॉटस्पॉट बनाया गया तब से परिवार की चिंता है पर काम पहले है। रोज़ सुबह काम पर लग जाता हूँ। घर वालों से रोज़ वीडियो कॉल पर बात होती है। संक्रमण का डर सताता है पर उनसे बात कर आत्मबल मिलता है और अगले दिन फिर नयी ऊर्जा के साथ काम मे लग जाता हूँ।

हमारे चौथे कोरोना वारियर हैं लखनऊ के रहने वाले #मोहम्मद_मुकीद, गज़ब के फोटोग्राफर हैं जो इन दिनों अपने परिवार से दूर वाराणसी हिंदुस्तान अखबार में फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। मुकीद ने हमे बताया कि लखनऊ घर में मां-बाप बहन भाई से दूर अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद वर्तमान में कई बड़ी चुनौती के बीच संघर्ष जारी रखें हुए हैं। ऐसे मुश्किल समय पर बनारस में बड़े भाई के रूप में पी के सिंह मिले। जो मुझे घर जैसे माहौल मिला मुझे पता ही नही चलता है कि में अपने घर पर हूँ या कही और ये मेरा सौभाग्य है जो बाबा की नगरी में मुझे ढेर सारा आशीर्वाद मिल रहा है मेरा ख्याल रखने के लिए मेरा तमाम बड़े भाई यहां है जो मुझे समय समय पर हिदायत देते रहते है। वो चाहे आफिस हो या काशी में रहने वाले मेरे तमाम भाई । घर वालों से बात करता हूं तो वो बच कर काम करने की हिदायत मिलती है ।
इसी तरह पांचवीं कहानी दैनिक जागरण लखनऊ के चीफ फोटोजर्नलिस्ट #रंगनाथ_तिवारी जो कि मूलतःजिला गोडा गांव डेहरास के रहने वाले हैं। लॉक डाउन के समय अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी के साथ लगे हुए हैं । कोरोना संक्रमण का डर और धूप की शिद्दत भी इनके कदम नही रोक पा रही। हमने इनसे बात की तो पता चला कि घर पर मां की तबियत नही ठीक है। घर जाना चाहते थे पर लॉकडाउन ने सब रोक दिया। रंगनाथ तिवारी ने बताया कि घर पर मेरा बेटा अपनी दादी के पास हैं।

इसके अलावा हमारे छठे कोरोना वारियर्स में नाम जुड़ता है दिल्ली अमर उजाला में कार्यरत #शुभम_बंसल का। शुभम लखनऊ के रहने वाले हैं। दिल्ली में कोरोना का हर सेकेंड कदम मजबूती से आगे बढ़ रहा है। हर आदमी खौफ में है कि उसे कब हो जाए कोरोना संक्रमण ये उसे नही पता। ऐसे में शुभम अपना कार्य मुस्तैदी से कर रहे हैं। शुभम ने बताया कि दिल्ली में स्थिति भयावह है। रोज़ नए इलाकों में नए मामले आ रहे हैं। शहर के 30 इलाके सील किये गए हैं। हम प्रोटेक्शन के साथ निकलते हैं खबरों के लिए। ये प्रोटेक्शन काफी है ये हमे भी नही पता। महामारी में परिजनों की याद आती है। रोज़ जब भी मौका मिलता है वर्क से जब फ्री होता हूं तो लखनऊ मां, बाप और भाई बहन से बात करता हूँ और हिम्मत पाता हूँ।

इसके अलावा सातवें वारियर्स उत्तर प्रदेश भदोही जनपद के रहने वाले कैमरे के जादूगर मो. #सलिम_रईस_खान जो कि दैनिक जागरण बागेश्वर, उत्तराखंड में फोटोजर्नलिस्ट हैं। लॉक डाउन में रईस पूरी मुस्तैदी के साथ जनता और प्रशासन के बीच सामंजस्य अपनी तस्वीरों से फैला रहे हैं। रईस बताते हैं कि उनकी दो बेटी और एक तीन महीने के बेटे की अभी तक शक्ल भी नही देखा है। अब्बू को भी पैरालाईसिस का अटैक भी हुआ है। इसके बावजूद रईस अपना काम कर रहे हैं और मुस्तैदी के साथ कर रहे हैं ।

आठवीं कहानी है
उत्तर प्रदेश प्रयागराज में परिवार को छोड़कर अलीगढ़ अमर उजाला में अपने काम को प्राथमिकता देकर नौकरी कर रहे वरिष्ठ छायाकार #नीरज_कुमार जी अपनी तस्वीरों से समाज के दर्द को प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। नीरज का परिवार प्रयागराज में है और वो रोज़ परिवार से बात कर अपनी अंतरात्मा को शक्ति देते हैं।

नौवीं कहानी में शामिल दिल्ली अमर उजाला में कार्यरत वरिष्ठ छायाकार #हिमांशू_सोनी जो कि मध्यप्रदेश सतना के रहने वाले हैं और घर पर दो छोटे भाइयों और मां को छोड़ ये अपनी कर्मभूमि नई दिल्ली में मुस्तैद हैं। हिमांशू ने बताया कि देश के लिए हम यदि काम आएं तो हमारे लिए इससे बड़ी बात क्या होगी। आज इस वैश्विक महामारी के खिलाफ जनता को जागरूक करते हुए उनकी समस्या को प्रशासन तक पहुंचाकर सुखद अनुभव मिल रहा है। हर पल संक्रमण का खतरा है पर हमारा वर्क पहले।बाकी अपनी और अन्य की हिफाजत भी करते रहते हैं।

अतः में अब बात उस फोटोजर्नलिस्ट शख्सियत की जिनके बिना कहानी अधूरी होगी। जो कि फोटोग्राफी में गजब की महारत रखते हैं। इस समय दैनिक जागरण आई नेक्स्ट लखनऊ में वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट की भूमिका में कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश वाराणसी जनपद के रहने वाले #तुषार_राय अपने परिवार के अकेले संतान हैं। परिवार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर। मां-पिता, पत्नी व दो बेटियां वाराणसी में हैं और वो वर्तमान में एक कर्मवीर की तरह अपने कार्य को इस लॉकडाउन में बखूबी निभा रहे हैं। अन्य फोटोजर्नलिस्ट वारियर्स के बारे में जानकारी न होने के कारणों से  कहानियों के सिलसिले को यहीं समाप्त करते हुए उन सभी अन्य फोटोजर्नलिस्टो साथियों को सैल्यूट करते हैं।

सभी फ़ोटो इंडियन फोटोजर्नलिस्ट एशोसिएशन की

कटेंटः सैय्यद फैज हुसैन (वरिष्ठ पत्रकार) वाराणसी।