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सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ वीडियो वायरल करने वाली महिला सिपाही गिरफ्तार, तीन मामलों का भी पुलिस ने किया खुलासा

 

मधेपुरा। पुलिस के खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करना एक महिला सिपाही को भारी पड़ गया। मधेपुरा पुलिस ने किशनगंज जिला बल में पदस्थापित महिला सिपाही रिंकू कुमारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, महिला सिपाही पर मधेपुरा पुलिस के विरुद्ध झूठे एवं भ्रामक आरोप लगाकर वीडियो वायरल करने तथा लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने के लिए प्रेरित करने का आरोप है।

मधेपुरा पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महिला सिपाही को 18 अगस्त 2026 को पटना जिला अंतर्गत एक स्थान से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि वह पुलिस के विरुद्ध वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में वांछित थी।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की नजर में आईं

पुलिस के मुताबिक, रिंकू कुमारी ने मधेपुरा पुलिस के विरुद्ध झूठे एवं गंभीर आरोप लगाते हुए वीडियो तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। पुलिस का आरोप है कि वीडियो के माध्यम से पुलिस की छवि खराब करने तथा लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया गया।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने महिला सिपाही की पहचान की और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की।

35 वर्षीय महिला सिपाही, पटना में भी जुड़ा है ठिकाना

पुलिस की गिरफ्तारी सूची के अनुसार रिंकू कुमारी की उम्र करीब 35 वर्ष है। उनके पिता का नाम अनिल कुमार झा और पति का नाम कन्हैया कुमार बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड में उनका संबंध मधेपुरा जिले से बताया गया है, जबकि उनका एक पता पटना के कंकड़बाग क्षेत्र की बिहार कॉलोनी रोड का भी दर्ज है।

एक नहीं, तीन मामलों का पुलिस ने किया खुलासा

गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने रिंकू कुमारी का आपराधिक इतिहास भी जारी किया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उनके विरुद्ध निम्न मामले दर्ज हैं—

1. मधेपुरा थाना कांड संख्या 862/25
दिनांक 22 अगस्त 2025 को दर्ज इस मामले में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

2. मधेपुरा थाना कांड संख्या 808/26
दिनांक 4 अगस्त 2026 को दर्ज इस मामले में BNS की धारा 115(2), 126(2), 109 एवं 351(2) के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।

3. मधेपुरा थाना कांड संख्या 37/26
दिनांक 17 अगस्त 2026 के इस मामले में BNS की धारा 132, 308(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(c) के तहत प्राथमिकी दर्ज होने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।

यानी सोशल मीडिया वीडियो वाले मामले में कार्रवाई से पहले भी महिला सिपाही के खिलाफ दो अन्य मामलों का पुलिस रिकॉर्ड मौजूद होने की बात पुलिस ने अपने प्रेस नोट में कही है।

महिला सिपाही को पकड़ने के लिए बनाई गई विशेष टीम

पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए विशेष छापेमारी टीम का गठन किया था। प्रेस विज्ञप्ति में सदर थाना मधेपुरा तथा तकनीकी शाखा की टीम के पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला सिपाही को गिरफ्तार कर लिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

पुलिस का दावा—आरोपों की जांच के बाद हुई कार्रवाई

मधेपुरा पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो में पुलिस एवं पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की गई। पुलिस ने आरोपों को झूठा एवं भ्रामक बताया है और इसी आधार पर महिला सिपाही के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई।

मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है। इसलिए महिला सिपाही पर लगाए गए आरोपों का अंतिम सत्य न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा। मधेपुरा पुलिस ने अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अभियान जारी रखने की बात कही है।




नोट: गिरफ्तारी और आरोपों से संबंधित उपरोक्त विवरण मधेपुरा पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है।

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