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सुपौल और बीरपुर की जेलों में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान, बंदियों को बताए गए कानूनी अधिकार

 

मंडल कारा, सुपौल में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं मानसिक परामर्श शिविर में उपस्थित अधिकारी, चिकित्सक और बंदी।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल; मंडल कारा सुपौल और अनुमंडलीय कारा बीरपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं मानसिक परामर्श शिविर आयोजित

सुपौल | 10 अक्टूबर 2026

सुपौल। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बंदियों को समय पर उपचार, उचित परामर्श और निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंडल कारा, सुपौल एवं अनुमंडलीय कारा, बीरपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम और मानसिक परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा उपलब्ध चिकित्सा एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी दी गई। साथ ही यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, संवेदनशील व्यवहार और आवश्यक उपचार का हकदार है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशन में कार्यक्रम

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BLSA) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल राजेश कुमार बच्चन के निर्देशन में किया गया।

कार्यक्रम का पर्यवेक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने किया।

यह आयोजन मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएँ योजना, 2015 के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को विधिक सहायता और उनके अधिकारों के संबंध में जागरूक करना है।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार पर जोर

शिविर के दौरान चिकित्सकों एवं वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, उचित उपचार और नियमित परामर्श के महत्व पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। ऐसी समस्याओं से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील और मानवीय व्यवहार अपनाने की भी अपील की गई।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान देना और उन्हें उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है।

बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता और अधिकारों की दी गई जानकारी

विधिक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बंदियों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए भी कानून में अधिकार और संरक्षण के प्रावधान हैं।

आर्थिक अथवा अन्य कारणों से विधिक सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होने पर पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम में मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार से बचने, उनकी गरिमा बनाए रखने तथा उनके कानूनी अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया गया।

मानसिक परामर्श शिविर में विशेषज्ञों ने दी जानकारी

विधिक जागरूकता कार्यक्रम के साथ मानसिक परामर्श शिविर भी आयोजित किया गया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों, समय पर चिकित्सकीय सहायता और परामर्श की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

शिविर का उद्देश्य बंदियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें आवश्यक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना था।

अधिवक्ता, चिकित्सक और कारा प्रशासन के अधिकारी रहे उपस्थित

इस कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता संजय कुमार, सहायक विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता सौरभ मोहन ठाकुर, सदर प्रखंड सुपौल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार तथा कारा चिकित्सक डॉ. एम. के. मिलन उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त एएनएम नीलम सिंह एवं रिंकू कुमारी, ड्रेसर प्रकाश कुमार, कारापाल शंभू कुमार दास तथा कारा में कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

जेलों में मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा की रक्षा की दिशा में पहल

जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह कार्यक्रम काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और कानूनी सहायता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

यह पहल इस संदेश को भी रेखांकित करती है कि जेल में निरुद्ध व्यक्ति भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, मानवीय व्यवहार और विधि के अनुसार उपलब्ध अधिकारों के हकदार हैं।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर उपचार और विधिक सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करने से बंदियों के कल्याण एवं पुनर्वास के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।


समाचार स्रोत: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल की प्रेस विज्ञप्ति।

बिहार : ABDM के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुपौल में जिला स्तरीय बैठक, डीएम ने समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने के दिए निर्देश

 कार्यों की समीक्षा करते जिलाधिकारी सावन कुमार।

सुपौल। जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय कन्वर्जेंस बैठक आयोजित की गई।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रमुख घटकों, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, ABHA ID के निर्माण एवं उपयोग, स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्यकर्मियों के डिजिटल पंजीकरण तथा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए ABDM के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने आमजन तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने और विभागीय स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जिले में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत चल रहे कार्यों और प्रगति की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने इन कार्यों की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।

बिहार : अधिवक्ताओं के लिए ₹5 लाख कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की मांग, सुपौल से अधिवक्ता रुद्र प्रताप का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन





सुपौल। बिहार के अधिवक्ताओं और उनके आश्रित परिवारों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। जिला विधिज्ञ संघ, सुपौल से जुड़े अधिवक्ता रुद्र प्रताप लाल ने 7 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राज्य के अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू करने का अनुरोध किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के सुचारु संचालन, आम नागरिकों को सुलभ न्याय दिलाने तथा संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को इलाज पर भारी खर्च के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

अधिवक्ता रुद्र प्रताप लाल ने ज्ञापन में उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए वहां अधिवक्ताओं के लिए ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा संचालित होने का उल्लेख किया और बिहार में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की। यह उल्लेख ज्ञापन में प्रस्तुत दावे पर आधारित है।

चार प्रमुख मांगों में बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत एवं सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) धारक सभी सक्रिय अधिवक्ताओं और उनके आश्रित परिजनों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना से जोड़ना शामिल है।

इसके अलावा राज्य के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों तथा सूचीबद्ध प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में इस योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। ज्ञापन में बिहार स्टेट बार काउंसिल और स्थानीय जिला एवं अनुमंडल बार एसोसिएशनों के माध्यम से अधिवक्ताओं का सत्यापन कर डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी करने का सुझाव भी दिया गया है।

चौथी मांग के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज और असामयिक निधन की स्थिति में अधिवक्ता कल्याण कोष से दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

रुद्र प्रताप लाल ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी।


आंगनबाड़ी केंद्रों में परिजनों का मिलन-सम्मान समारोह एवं पोषण बैठक का आयोजन

 स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के प्रति जागरूक सक्रिय लाभार्थियों को आभार पत्र; सेविकाएं गर्भवती, धात्री महिलाओं और नवजातों के स्वास्थ्य पर रख रहीं नजर



कटिहार, 29 सितंबर। मंगलवार को जिले के अंतर्गत संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर “आंगन का मिलन” कार्यक्रम के तहत सम्मान समारोह एवं पोषण बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों, लाभार्थियों और ग्रामीण जनसमुदाय को आमंत्रित कर उनका अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सेविकाओं के सहयोग से उपस्थित लाभार्थियों के साथ स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित योजनाओं तथा विभिन्न गतिविधियों पर सामूहिक चर्चा की गई।

आईसीडीएस डीपीओ कुमारी पूर्णिमा ने बताया कि कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सेविकाओं एवं सहायिकाओं को समुदाय स्तर पर किए जा रहे सराहनीय कार्यों के लिए सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के प्रति जनसमुदाय को जागरूक करने वाले सक्रिय लाभार्थियों को भी आभार पत्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को समुदाय स्तर पर सामूहिक सहयोग मिल रहा है, जिससे विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिल रही है।

डीपीओ कुमारी पूर्णिमा ने कहा कि क्षेत्र की सभी गर्भवती, धात्री महिलाओं और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सेविकाओं द्वारा नियमित क्षेत्र भ्रमण किया जाता है। इस दौरान मां और शिशु के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी ली जाती है। यदि किसी लाभार्थी में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाई जाती है, तो उन्हें नजदीकी अस्पताल भेजा जाता है, ताकि समय पर उपचार मिल सके।

उन्होंने बताया कि समय-समय पर एएनएम द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही लाभार्थियों की जांच और टीकाकरण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत के अनुसार सामान्य चिकित्सकीय सहायता भी प्रदान की जाती है, जिससे लाभार्थी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

बिहार : पूर्णिया में हृदय स्वास्थ्य की जांच के लिए बढ़ रहा अस्पतालों का रुख, 14 महीनों में 35,213 ईसीजी जांच

जिले के प्रखंड अस्पतालों में ईसीजी मशीनें कार्यरत; जुलाई 2026 में सबसे अधिक 5,720 जांच दर्ज



 

पूर्णिया, 27 सितंबर। जिले के प्रखंड अस्पतालों में हृदय संबंधी परेशानी की जांच के लिए ईसीजी कराने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 से 26 सितंबर 2026 तक जिले में कुल 35,213 ईसीजी जांच दर्ज की गई हैं। विभाग का कहना है कि सभी प्रखंड अस्पतालों में ईसीजी मशीनें कार्यरत हैं, जहां जरूरत के अनुसार लोगों की जांच की जा रही है।

ईसीजी जांच की संख्या में शुरुआती महीनों के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अगस्त 2025 में जहां तीन जांच हुई थीं, वहीं जुलाई 2026 में यह संख्या 5,720 तक पहुंच गई। सितंबर 2026 में भी 26 तारीख तक 3,466 लोगों की जांच दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच में हृदय संबंधी परेशानी के संकेत मिलने पर मरीज को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

लक्षण दिखने पर चिकित्सक से जांच कराने की सलाह

जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ जीवनशैली और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सीने में दर्द, घबराहट, धड़कन असामान्य रूप से तेज या धीमी महसूस होना, सांस फूलना और चक्कर आना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए।

डॉ. सिंह के अनुसार, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों को भी अपने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किस व्यक्ति को ईसीजी या अन्य जांच की जरूरत है और कितने अंतराल पर जांच होनी चाहिए, इसका निर्णय उसके लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर चिकित्सक करते हैं।

प्रखंड अस्पतालों में उपलब्ध है ईसीजी सुविधा

सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जिले के सभी प्रखंड अस्पतालों में ईसीजी मशीनें कार्यरत हैं। हृदय संबंधी परेशानी लेकर आने वाले व्यक्ति की जांच के बाद चिकित्सक रिपोर्ट और अन्य लक्षणों के आधार पर आगे के उपचार की सलाह देते हैं। विभाग का प्रयास है कि लोगों को स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक जांच की सुविधा मिल सके।

ईसीजी से हृदय की विद्युत गतिविधि दर्ज की जाती है। इसकी रिपोर्ट का आकलन मरीज के लक्षणों और अन्य चिकित्सकीय जांच के साथ किया जाता है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक मरीज को आगे की जांच या उपचार के लिए भेज सकते हैं।

अगस्त 2025 से सितंबर 2026 तक का मासिक आंकड़ा

डीपीएम सोरेंद्र कुमार दास ने बताया कि अगस्त 2025 से 26 सितंबर 2026 तक जिले के प्रखंड अस्पतालों में कुल 35,213 ईसीजी जांच हुई हैं। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए मासिक आंकड़े इस प्रकार हैं:

माहईसीजी जांच
अगस्त 20253
सितंबर 202534
अक्टूबर 2025219
नवंबर 2025449
दिसंबर 20251,262
जनवरी 20261,904
फरवरी 20262,362
मार्च 20262,707
अप्रैल 20263,705
मई 20263,462
जून 20264,981
जुलाई 20265,720
अगस्त 20264,939
सितंबर 2026 (26 तारीख तक)3,466
कुल35,213

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के जून, जुलाई और अगस्त में हर महीने चार हजार से अधिक जांच हुईं। जुलाई में पूरे उपलब्ध अवधि की सर्वाधिक जांच दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग ने हृदय संबंधी लक्षण महसूस होने पर लोगों से निकटतम अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा है।

पूर्णिया: निक्षय मित्र योजना के तहत 27 टीबी मरीजों को फूड बास्केट वितरित



पूर्णिया, 26 सितंबर। जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत निक्षय मित्र योजना के तहत शनिवार को पूर्णिया जिले के डगरुआ प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 27 टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया। कार्यक्रम सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया के निर्देश पर जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मोहम्मद तनवीर हैदर के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजी चंचल समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

दवा के साथ पौष्टिक आहार जरूरी

जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मोहम्मद तनवीर हैदर ने कहा कि टीबी से स्वस्थ होने के लिए नियमित दवा के साथ पौष्टिक और संतुलित आहार लेना भी आवश्यक है। उन्होंने मरीजों से उपचार के दौरान दवा नियमित रूप से लेने तथा स्वास्थ्यकर्मियों के संपर्क में बने रहने की अपील की।

सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजी चंचल ने मरीजों को टीबी रोग, उसके उपचार और सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पात्र मरीजों से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने का आग्रह किया।

स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय सहभागिता

कार्यक्रम को सफल बनाने में डीपीएस राजेश शर्मा, बीएचएम अविनाश कुमार, बीसीएम बंदना कुमारी, सहयोगी कर्मी राजनाथ झा, लिपिक दिलीप चौधरी, लेखापाल विनोद कुमार, मो. साकिब, एसटीएस पूजा कुमारी और जयप्रकाश कुमार सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के साथ आवश्यक पोषण सहयोग उपलब्ध कराना और जनभागीदारी के माध्यम से टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करना है।

डॉ आसिफ रशिद ने ईद-उल-फितर पर दी पूरे जिले वासियों को शुभकामनाएं व मुबारकबाद, कहा-आपसी सद्भाव से मनाएं ईदुल-फितर

  • ईद पर्व की खरीदारी के मौके पर गरीब, लाचार व बेसहारों का भी रखें ख्याल
  • ईद के दिन खाएं संतुलित ताजा व सुपाच्य भोजन ,अधिक खाने से बरतें संयम
  • तले-भुने हुए भोजन से करें परहेज, बच्चों को जंक फ़ूड, कुडकुड़े, कोल्ड ड्रिंक्स और डब्बे बंद जूस से रखें दूर
  • रोजा बाद अधिक से अधिक हल्का गुनगुना व साफ पानी पीते रहें



अररिया। रहमत बरकत का मुकद्दस माह-ए-रमजान के रोजे मुकम्मल होने वाले हैं- अब ईद आने वाली है। खुशियों का पर्व ईद को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी है। ऐसे में जिले के मशहूर चिकित्सक फिजिशियन डॉ मो आसिफ रशिद ने मालदार लोगों से ईद की खरीदारी के मौके पर आसपास के जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि माहे रमजान में गरीब, लाचार, यतीम, बेसहारा जरूरमंदों की मदद करने पर अल्लाह तबारक व तआला बेहतर बदला देता है। अगर आपके आस-पास या रिश्तेदारों में कोई गरीब है तो उसकी मदद पहले जरूर करें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें मदद की दरकार होती है, मगर शर्म होने कारण मांग नहीं सकते, ऐसे लोगों की मदद आप खोज-खोज कर और उन्हें छुप कर जरूर करें। हम सब जरूरतमंदों की मदद करेंगे तो अल्लाह हम सबको जरूरत से ज्यादा नवाजेगा और किसी गरीब बच्चों की मुस्कुराहट आपको भी खुशी देगी। इसलिए आसपास के जरूरतमंद लोगों की दिल खोलकर मदद करें। ताकि उनके घर पर भी ईद की खुशी मिल सके।

उन्होंने पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ईद मुहब्बत का पैगाम देता है। ईद यह संदेश देता है कि यह मुल्क गंगा-यमुना तहजीब की व अनेकता में एकता वाला खूबसूरत मुल्क है। हिंदुस्तान हमेशा से मुहब्बत व सांप्रदायिक सौहार्द का गहवारा है, इसे हमसब को बनाए रखना है। मुहब्बत, अमन चैन को आम करना है।

ईद के दिन एकाएक अधिक भोजन करने से करें परहेज
डॉ आसिफ रशिद ने कहा कि ईद के दिन एकाएक अधिक भोजन करने से परहेज करें, चूंकि पूरे एक माह रोजा रखने के बाद अचानक सिस्टम में अधिक बदलाव के कारण अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए भोजन करते समय संयमित रहें, जहां तक हो सके, साफ व स्वच्छ पानी पीते रहें। तली-भुनी हुई चीजों से बचते रहे।

गर्मी के दौरान बच्चों में बढ़ जाता है डायरिया व डिहाइड्रेशन का खतरा
जिले में गर्मी धीरे-धीरे अपना असर दिखाने लगा है। तेज धूप अभी से ही लोगों को सताने लगी है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही कई तरह की बीमारियों को न्योता दे सकता है। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खास कर छोटे बच्चों के मामले में तो ये और भी जरूरी है। ऐसे मौसम में शिशुओं और छोटे बच्चों को डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन का खतरा होता है। समय पर इसका कुशल प्रबंधन नहीं होने पर ये जानलेवा भी हो सकता है। डायरिया से सम्बंधित लक्षणों के प्रति जागरूक होकर इसके खतरों से आसानी से बचा जा सकता है। डॉ रशिद ने यह भी बताया कि शुगर, बीपी व थायराइड रोगियों को हर एक सप्ताह के अंतराल पर चेक कराते हुए चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए। कहा कि डायरिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक है। शुरुआती लक्षणों के आधार पर आसानी से इसकी पहचान कर इसका कुशल प्रबंधन किया जा सकता है। लगातार पतले दस्त का होना, दस्त के साथ उल्टी, भूख में कमी, दस्त के साथ हल्का बुखार आना, जटिल परिस्थितियों में दस्त के साथ खून आना इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है। रोग के शुरुआती दौर में ओआरएस का घोल इलाज में काफी मददगार होता है। इसे घर पर भी बनाया जा सकता है।

डायरिया से बच्चों में बढता है कुपोषण का खतरा
गाछी टोला स्थित पॉलीक्लिनिक हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ एम ए रशिद बताते हैं कि डायरिया से बच्चों में कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इससे बचाव जरूरी है। गर्मियों में बच्चे अक्सर प्यास लगने पर कहीं से भी पानी पी लेते हैं। इससे इंफेक्शन का खतरा होता है। दूषित जल का सेवन, साफ सफाई की कमी इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। इसलिए बच्चों को खाना खिलाने से पहले अच्छी तरह उनका हाथ धोएं, खाना बनाते व परोसते समय सफाई रखें, बच्चों को शौच के बाद साबुन से हाथ धुलने की आदत डायरिया से बचाव के लिहाज से जरूरी है। बच्चे को दस्त की समस्या होने पर किसी दवा से पहले उन्हें पानी की कमी से बचाएं, जीवन रक्षक घोल यानी ओआरएस पिलाएं, घर पर ही नींबू पानी में नमक व चीनी मिलाकर पिलाएं। लस्सी, छाछ, नारियल पानी दे भी दिया जा सकता है। मौसमी राशदार फलों का खूब सेवन करें । ताजा आहार व गर्म गला हुआ नर्म सुपाच्य भोजन करें। हालत में सुधार नहीं होने पर तत्काल अपने नजदीकी अस्पताल से संपर्क करने की सलाह उन्होंने दी।

ईद की तरह वोट देने की भी करें तैयारी
रमजानुल मुबारक के तमाम रोजे मुकम्मल कर लेने के बाद सबसे बड़ी बात हमलोगों के सामने ईद उल फितर की खुशियां मनाने की है। इसके लिए सभी लोग पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं। वहीं सामने लोकसभा चुनाव भी है। चुनाव में वोट देना सभी का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए अभी से अपनी हक अधिकार के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो जाएं और इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दें। बूथ का नाम, नंबर, भाग, क्रम संख्या सभों को मालूम होना चाहिए। दो दिन पूर्व अपने संबंधित पोलिंग बूथ केंद्र को जाकर देख लें। सभी घर वार्ड, मुहल्ला में वोटर लिस्ट होना चाहिए। सभी अपना अपना नाम देख कर इत्मीनान हो लें। प्रशासन की तरफ से भी वोटर पर्ची दिया जा रहा है, उसे हासिल कर लें। खुद से भी वोटर पर्ची हासिल कर हर एक फर्द को दस्तयाब अर्थात मुहैय्या कर दें। आपको अपना बूथ नंबर और सीरियल नंबर भी जेहन में महफूज होना चाहिए, ताकी अगर पर्ची न मिल सकें, तो भी आप अपने वोट का प्रयोग कर सकें। पहचान कार्ड, वोटर कार्ड, पेन कार्ड या अन्य इत्यादि कोई भी कार्ड जो वोट देने के अमल को पूरा करने में सहायक हो, साथ रखें। मुनासिब है कि वोटिंग के दिन नमाज फजर के बाद से ही महिलाएं व मर्द अपने अपने बूथ पर पहुंच जायें। अपको वोटिंग में जो भी दुश्वारी या दिक्कत पेश आए, बर्दाश्त करें। चाहे आपको दिन भर भूखा ही रहना पड़े। वोट की अहमियत और ताकत को समझिए। आपका एक वोट देश की तरक्की व निर्माण की खातिर सही रहनुमा का इंतेखाब करने के लिए जरूरी है। जो लोग दूसरे प्रदेश में रह रहे हों, वह भी चुनाव के मौका से जिस तरह ईद मनाने के लिए घर आते हैं, उसी प्रकार वोटिंग से दो दिन पूर्व घर आकर अपने वोट का प्रयोग करें। पोलिंग बूथ पर शत प्रतिशत मतदान को लाजमी बनाना हमारी कौमी मिल्ली फरीजा व तकाजा है। वोट जरूर करें। पहले मतदान-तब जलपान करें।

Bihar/ सुपौल - पीएचसी में मरीजों को नहीं मिलता खाना, आरडीओ के निरीक्षण के बाद भी रजिस्टर खाता हैं मरीजो के हिस्से का खाना

आश नारायण मिश्रा / वीरपुर (सुपौल)। 

बसंतपुर पीएचसी, भीमनगर में पिछले 2 महीनों से पीएचसी के पूरे भवन के रिपेयरिंग का काम प्रखंड विकास निधी से कराये जाने के कारण डिलीवरी और परिवार नियोजन के अलावे स्वास्थ सम्बंधित अन्य सेवाए पूरी तरह से बाधित थी। इस पीएचसी पर ईलाज के लिए निर्भर मरीजों की समस्याओं को  देखते हुये 20 अगस्त 2021 को जिला पदाधिकारी सुपौल के निर्देश पर बसंतपुर आरडीओ कुमार मनीष भारद्वाज ने बसंतपुर पीएचसी, भीमनगर का औचक निरीक्षण कर विधि व्यवस्था पर पूरी तरह से नाराजगी जताते हुए कहा था कि अबिलम्ब पीएचसी में  स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्देशित सभी सुविधाओं के साथ-साथ इमरजेंसी सेवा, साफ सफाई, शौचालय, शुद्ध पेयजल, दवाई की व्यवस्था का लाभ मरीजों को मिलेगा। जिला पदाधिकारी के निर्देश आरडीओ के औचक निरीक्षण और उनकी नाराजगी का असर पीएचसी प्रशासन पर सरजमीन पर होता नही दिख रहा हैं ।

आरडीओ के निरीक्षण के दूसरे दिन ही प्रसव कार्य प्रारंभ कर दिया गया, परन्तु प्रसव कक्ष में प्रसूति महिला मरीज बिना खाना-नास्ता, खराब पंखे और बिना साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल के बीच मच्छर से बचाव को लेकर कपड़े और मॉसक्यूटो क्वायल जलाते हुए समय गुजारते दिखाई देते हैं। मरीज के परिजनो ने बताया कि खाना-नास्ता, साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और शौचालय की बात छोड़िए। इस भीषण गर्मी में खराब पंखे के बिना समय गुजारना मुश्किल हो रहा है। यहां कोई देखने वाला नही है।


इस कुव्यवस्था पर पूछे जाने पर बसंतपुर हेल्थ मैनेजर रतीश झा बताते हैं कि साफ-सफाई, नाश्ता - खाना हमारे आधीन नहीं है। रही बात खराब पंखा का तो उसे ठीक करा दिया जायेगा। वहीं इस समस्या के बाबत मोबाइल पर बसंतपुर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर अर्जुन चौधरी से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि साफ-सफाई नही करने और नास्ता-खाना मरीज को नही दिए जाने की शिकायत मिली है। इसको लेकर आउटसोर्सिंग करनेवाले पर कार्यवाही की जाएगी। साथ ही मरीजों को होनेवाली सभी कठिनाइयों को दूर किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठना लाजमी हैं कि 6 बेड वाले पीएचसी के मैनेजर और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को मालुम नही हैं कि मरीज आवश्यक सुविधा से वंचित हैं या फिर वे जानकर भी अनजान हैं। जबकि पीएचसी के हमारे सूत्र बताते हैं कि आउटसोर्सिंग के रजिस्टर में मरीजों को खाना नाश्ता के साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीजों को मिलती हैं।

Bihar/ सुपौल - जलावन रखने के काम आ रहा है भगवानपुर का स्वास्थ्य उपकेंद्र

आश नारायण मिश्रा / वीरपुर(सुपौल)। 

फ़ोटो - मरीज के जगह जलावन रखने के काम आ रही है भगवानपुर का ये स्वास्थ्य उप केंद्र।

लगातार 15 वर्षों से चल रही नीतीश सरकार से आमलोगों को बेहतर स्वास्थ सुविधा मिलने की उम्मीद थी परन्तु व्यवस्था की घोर लापरवाही से भगवानपुर पंचायत के सहेवान वार्ड 8 में एनएच106 से सटे पश्चिम में लाखों की लागत से निर्मित यह स्वास्थ्य उपकेंद्र  मरीज की जगह जलावन रखने के काम आ रहा है। 

भगवानपुर के पूर्व मुखिया उमेश मेहता ने बताया कि वर्ष 1994 में निर्मित इस स्वास्थ्य उपकेंद्र से आजतक यहां की जनता को चिकित्सीय सेवा नसीब नहीं हुई है। विगत 26 वर्षों से यहां के लोग इस सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य उपकेंद्र को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था के डंक से कराह रही इस भवन को ही ईलाज की जरूरत है।

ग्रामीण रणजीत मेहता,महेंद्र यादब,रामदेब मंडल ने बताया कि हमलोग जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इसे चालू कराने की मांग करके थक गए परन्तु कोई फरियाद काम नहीं आया जबकि सड़क किनारे अवस्थित इस स्वास्थ उप केंद्र का दीदार आते जाते हुए सभी जिला के आला अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को होता है फिर भी इसके हालात सुधारने को लेकर आजतक किसी की भी नजरें इनायत नहीं हुई।

एक ओर जहां करोना संक्रमण शहरों से निकलकर गांव की तरफ अपना पांव पसार रहा है दूसरी ओर सरकार व प्रशासन लापरवाह है तभी तो लाखों की लागत से निर्मित यह स्वास्थ्य उपकेंद्र 26 वर्षों के बाद भी शोभा की वस्तु बनी हुई हैं। और यहाँ के लोगों को सामान्य बीमारी में भी ईलाज पाने की लिए बीस किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बसंतपुर पीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन चौधरी बताते है कि भवन जजर्र है साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है फिर भी लोगों का ईलाज किया जाता हैं।

 

 

स्वास्थ्य विभाग का गजब खेल, कोरोना का टीका लगवाने से पहले मोबाइल पर आने लगा मैसेज, हैरत में लोग




चन्दन कुमार सिंह/ फारबिसगंज (राज टाइम्स)

कोरोना महामारी को लेकर शहर से लेकर गांव तक लोगों में काफी घबराहट सी है । जान बचाने के लिए जागरूक लोग सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी कोई भी निर्देश पर अमल करने में किसी तरह का कोई कोताही नहीं बरतना चाहते हैं। इस महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार द्वारा टीकाकरण (वैक्सीनेशन) करवाया जा रहा है। यही नहीं लगातार टीका उत्सव को तेज करने की बात भी कही जा रही है। लेकिन अररिया जिला के नरपतगंज में वैक्सीनेशन का एक ऐसा भी मामला सामने आया है । जिसको लेकर अब वेक्सीनेशन पर सवाल उठने लगे हैं । सवाल उठना भी लाजिमी है । नरपतगंज में एक लडके को बिना टीका लगाए ही वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट मिल गया है । जिससे इलाके में लोग हैरत में है ।
उज्जवल कुमार
 
 * यह है पूरा मामला

अररिया जिला के नरपतगंज निवासी उज्ज्वल कुमार (19) पिता सुरेन्द्र प्रसाद मंडल को ऑन लाइन के बाद उनके मोबाइल पर सफलतापूर्वक वैक्सीन लगाए जाने का मैसेज मिला एवं मोबाइल में आए मैसेज लिंक में उनके नाम का सर्टिफिकेट भी मिल गया । जबकि छात्र उज्ज्वल का कहना है कि वह वैक्सीन लगवाने के लिए सेंटर पर गए ही नहीं । इस मामले को लेकर उज्जवल कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अभी तक कोविड का वैक्सीन का कोई डोज नहीं लिया है । कोविड वैक्सीन के लिए ऑनलाइन किया था । 6 मई की शाम को उनके मोबाइल पर मैसेज आया । जिसमें लिखा था कि कोविड वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है । जबकि 18 से 44 साल वालों के लिए टीकाकरण की शुरुआत 9 मई से था । लेकिन उज्जवल के मोबाइल पर 6 मई को ही सर्टिफिकेट कैसे मिल गया । यह सवाल हैरत करने वाली लगती है ।

   उज्जवल ने बताया कि बिना टीका लिए टीकाकरण का मैसेज आ जाने से वह अचंभित है कि फर्स्ट डोज सफलतापूर्वक वाला मैसेज कैसे आ गया । यही नहीं दूसरा डोज लेने के लिए भी मैसेज आया है । उसे डर है कि अब टीकाकरण से स्वास्थ्य विभाग कहीं उसे मना न कर दे । उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए बताया कि कहीं बिना टीकाकरण के ही मैसेज भेजने का मकसद टीका का कालाबाजारी तो नहीं है ।
वहीं इस बारे में अररिया चिकित्सा प्रभारी डॉ. एमपी गुप्ता से मामले पर पूछा गया कि कोरोना महामारी से बचने के लिए वैक्सीन लगवाने के लिए ऑन लाइन किया गया । लेकिन वैक्सीन लगवाने के पहले ही इस तरह का मैसेज आखिर कैसे आ रहा है । तो उन्होंने मामले में बेरुखी दिखाते हुए कहा कि इस तरह का मैसेज अगर आया है तो वह फिर से ऑन लाइन करे । वैक्सीन जरुर मिलेगा ।


कोरोना के इलाज का दावा- महाराष्ट्र के डॉक्टर का दावा, शराब पिलाकर ठीक किए दर्जनों कोरोना मरीज

 

डॉ भिसे के अनुसार सीमित मात्रा में शराब के सेवन से कोरोना के खतरे को दूर किया जा सकता है। लेकिन साथ में डॉक्टरों द्वारा बताई गयी सलाह के साथ दवाइयां लेनी होगी। हालांकि ऐसे किसी भी दावे की पुष्टि अभी तक वैज्ञानिकों की तरफ से नहीं की गयी है।



मुख्य बिन्दू:-

  • महाराष्ट्र के डॉक्टर भिसे का दावा, शराब से भागेगा कोरोना 
  • अहमदनगर (महाराष्ट्र) के चिकित्सक हैं डॉक्टर अरुण भिसे
  • अब तक करीब 50 मरीजों को कर चुके हैं ठीक 
  •  किसी भी मरीज की अब तक नहीं हुई है मौत

 

डॉ भिसे का अजीब दावा, शराब पिलाकर ठीक किए 50 कोरोना मरीज

अहमदनगर (महाराष्ट्र)

देश में कोरोना की लहर से हाहाकार मचा हुआ है। हर दिन लाखों कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा सामने आ रहा है। इस महामारी से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोना वायरस को खत्म करने की कोई भी अचूक दवा अभी तक नहीं बन पाई है। फिलहाल कोरोना वैक्सीन के जरिए लोगों को इस बीमारी से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। एक तरफ जहां कोरोना के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो दूसरी तरफ कोरोना मरीजों को शराब पिलाकर ठीक करने का एक दावा महाराष्ट्र के डॉक्टर अरुण भिसे नेे किया है। हालांकि राज टाइम्स ऐसे किसी दावे का समर्थन नहीं करता है।

क्या है डॉ भिसे का दावा
मीडिया खबरों के अनुसार डॉ अरुण भिसे ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सबसे पहले नजदीकी किसी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बाद में कोरोना की तीव्रता को देखते हुए टास्क फोर्स द्वारा बताई गई दवाइयों को लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिस दिन मुंह का स्वाद चला जाए और भूख कम लगने लगे। उस दिन से जिन चीजों में 40% से ज्यादा अल्कोहल है। ऐसी कोई भी शराब फिर चाहे वह देशी शराब हो,वोडका हो, ब्रांडी हो या व्हिस्की हो, उसे लेना चाहिए। 30 मिलीलीटर शराब और 30 मिलीलीटर पानी मिलाकर मरीज को दिया जाना चाहिए।

 

कोरोना वायरस और अल्कोहल का संबंध

कोरोना मरीजों को शराब देने के पीछे डॉ. अरुण ने कुछ कारण भी बताए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस ऊपरी परत लिपिड की है जो अल्कोहल के संपर्क में आने से नष्ट हो जाती है। इसी वजह से सैनिटाइजर से हाथ धोने की सलाह दी जाती है। शराब पीने के बाद वो खून की नालियों के जरिये 30 सेकंड में पूरे शरीर में पहुंचती है। फेफड़ों के बाद शराब हवा के संपर्क में आती है और वायुमार्ग से बाहर निकल जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान शरीर मे मौजूद कोरोना वायरस निष्क्रिय हो जाता है। कोरोना कॉल में मरीजों को काफी मानसिक तनाव होता है। इस तनाव को कम करने का काम यह शराब करती है।

करीब 50 मरीजों को सलाह
डॉक्टर भिसे का कहना हैं कि उन्होंने अब तक करीब 50 मरीजों को शराब पीने की सलाह दिया है। दवाइयों के साथ सीमित मात्रा में शराब के सेवन की भी बात वह मरीजों को कहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी इस तकनीक से वे सभी मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं। जिसमें से 10 मरीज गंभीर रूप से बीमार थे। अभी तक एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है।

 

पोषणयुक्त खान-पान से आसान होती है स्वस्थ व सेहतमंद ज़िंदगी की राहें

  • कोरोना संक्रमण से बचाव को पोषणयुक्त बेहतर खान-पान पर ध्यान देना जरूरी 
  • मसालेदार खाना से करें परहेज, दैनिक आहार में प्रोटीन की प्रचुरता का रखें ध्यान 
  • फेफडों की बेहतरी के लिये योग व प्राणायाम महत्वपूर्ण 



एनआरसी में कार्यरत फूड डेमोंसट्रेटर इंद्राणु भारती


अररिया (राज टाइम्स)
स्वस्थ व सेहतमंद ज़िंदगी  के लिये लोगों को उचित व पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। शरीर की आहार संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिये पोषण युक्त उचित खान-पान को जीवन में शामिल करना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधियों के साथ उचित व संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य का आधार है। खराब पोषण से शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कम होने लगती है। वैश्विक महामारी के इस दौर में शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता के विकास पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अररिया सदर अस्पताल के एनआरसी में कार्यरत फूड डेमोंसट्रेटर इंद्राणु भारती के मुताबिक खान-पान से जुड़ी हमारी आदतें बहुत से रोगों से हमारा बचाव करने में मददगार होती है। इसलिये संक्रमण के मुश्किल दौर में हमें अपने खान-पान से जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।  

  • दैनिक खान-पान में प्रोटीनयुक्त आहार को दें प्राथमिकता 

शरीर में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता के विकास के लिये काढ़ा  का सेवन उपयोगी है। सुबह में हल्के गुनगुने पानी में नींबू का रस, शहद, हल्दी व सीया सीड मिलाकर कर पीना लाभकारी है। सीया सीड के बारे में उन्होंने बताया कि तुलसी का पौधा कई मायनों में हमारे लिये उपयोगी है। सीया सीड में तुलसी के बीज की प्रचुरता होती है। जो एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल, एंटी ऑक्सीडेंट जैसे गुणों से भरपूर होता है। सुबह का नाश्ता हल्का होना चाहिये। इसमें दलिया, पोहा, चपाती, ब्रेड का सेवन किया जा सकता है। नाश्ता व खाना के बीच किसी फल का उपयोग लाभकारी है। दोपहर के भोजन प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ को ज्यादा शामिल किया जाना चाहिये। इसमें हल्का चावल के साथ दाल, राजमा, सोयाबीन, हरी सब्जी व सलाद की प्रचुरता होनी चाहिये। फिर रात में हल्का खाना को प्राथमिकता दें। 

  • तैलीय व मसालेदार खानों से करें परहेज 

फूड डेमोंसट्रेटर इंद्राणु भारती दैनिक आहार में ज्यादा तैलीय  व मसालेदार चीजों से परहेज करने की सलाह देती हैं । उन्होंने कहा अगर आप मांस-मछली के शौकीन हैं तो इसमें तेल और मसालों के ज्यादा प्रयोग से बचें। महामारी के इस दौर में शाकाहारी भोजन प्राथमिकता देने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा  आपके खाने में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन होना चाहिये। आहार में मौसमी फल को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां खूब खायें। आंवला, नींबू, संतरा व ड्राइ फ्रूट जिसमें नेचुरल शुगर होता है। इसे प्राथमिकता के आधार में आहार में शामिल करना जरूरी है। 

  • योगासन  व प्राणायाम है महत्वपूर्ण 

कोरोना संक्रमण लोगों के फेफडे को ज्यादा प्रभावित करता है। लिहाजा इसकी सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। ब्रीथिंग इक्सरसाइज खास कर योग व प्राणायाम को फेफडों की बेहतर सेहत के लिये महत्वपूर्ण माना गया है। प्राणायाम से स्वांस नली स्वस्थ रहती है। लेकिन संक्रमित होने या संक्रमण के तुरंत बाद बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के बगैर इसका अभ्यास करने से परहेज करने की बात उन्होंने कही।