किशनपुर (राज टाइम्स)। कोसी बराज से शुक्रवार की रात 2 लाख 16 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जलस्तर में हुई अचानक वृद्धि से कोसी तटबंध के अंदर बसे लाखों लोगों का जीना मुहाल हो गया है। लोगों के घर, आंगन में तीन से चार फीट तक पानी का बहाव जारी है।
वहीं आवागमन बाधित होने के कारण लोग अपने घरो में फंसे हुए है। खासकर दिधिया, दुबियाही, बेला, शिशवा, सुकमारपुर, मौजहा, बुढियाडीह, सनपतहा, बैंगा आदि गांवो का बुरा हाल है इन सभी गांवों में कोसी का सबसे अधिक तांडव जारी है। कई लोग अपने जरुरी सामान व मवेशीयों के साथ बाहर निकलना चाहते है लेकिन नाव की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण लोग निकल नहीं पा रहे है। उधर शुक्रवार की रात पूर्वी कोसी बांध से मौजहा जाने वाली पक्की सड़क पीरगंज के पास कोसी की तेज धारा में ध्वस्त हो जाने के कारण दो दर्जन से अधिक गांवो का आवागमन पुरी तरह ठप हो गया है। लोगों को एक घर से दुसरे घर जाने में नाव का सहारा लेना पर रहा है।
स्थानीय सुशील कुमार यादव, मो गुलाब हसन, मो समद, जगदीश प्रसाद यादव आदि ने कहा कि कोसी के लोग सरकार के भरोसे नहीं बल्की कोसी मैया का ध्यान लगाकर जीवन जीने का कार्य करते है। सरकार कोसीवासियो को सुविधा देने के नाम पर कई माह पूर्व से ही तैयारी शुरु कर देती है। लेकिन जब बाढ़ आता है तो किसी तरह की तैयारी नहीं दिखती है। कोसी वासियों से सिर्फ वोट लिया जाता है, सुविधा देने के नाम पर सभी पीछे हट जाते है। हमारे वोट पर राज करने वाले मुखिया, सरपंच, समिति, प्रमुख, विधायक सहित सांसद बाढ़ के दोरान नदारद रहते है।
वहीं आरडीओ अजीत कुमार एवं सीओ नागेन्द्र कुमार रस्तोगी ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा भारी वर्षा एवं बाढ़ की संभवना जताने के तुरंत बाद से ही कोसी तटबंध के अंदर के लोगों को अर्लट कर दिया गया था। इसके बावजूद लोग अपने घरबार छोरकर बाहर निकलना नहीं चाहते है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से निबटने के लिए चार दर्जन लकडी नाव एवं एक दर्जन मोटरवोट की तैनाती की गई है। सभी का रुट चार्ट तक तय कर दिया गया है, ताकि लोगों को दिक्कत न हो। नावो का सही परिचालन हो इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान रखने को कहा गया है साथ ही उंचे स्थान का चयन कर लिया गया है। जो लोग निकलता चाहते है वे निकल सकते है। उनके लिए सरकारी स्तर पर सभी तरह की व्यवस्थाएं की जाएगी।
वहीं आवागमन बाधित होने के कारण लोग अपने घरो में फंसे हुए है। खासकर दिधिया, दुबियाही, बेला, शिशवा, सुकमारपुर, मौजहा, बुढियाडीह, सनपतहा, बैंगा आदि गांवो का बुरा हाल है इन सभी गांवों में कोसी का सबसे अधिक तांडव जारी है। कई लोग अपने जरुरी सामान व मवेशीयों के साथ बाहर निकलना चाहते है लेकिन नाव की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण लोग निकल नहीं पा रहे है। उधर शुक्रवार की रात पूर्वी कोसी बांध से मौजहा जाने वाली पक्की सड़क पीरगंज के पास कोसी की तेज धारा में ध्वस्त हो जाने के कारण दो दर्जन से अधिक गांवो का आवागमन पुरी तरह ठप हो गया है। लोगों को एक घर से दुसरे घर जाने में नाव का सहारा लेना पर रहा है।स्थानीय सुशील कुमार यादव, मो गुलाब हसन, मो समद, जगदीश प्रसाद यादव आदि ने कहा कि कोसी के लोग सरकार के भरोसे नहीं बल्की कोसी मैया का ध्यान लगाकर जीवन जीने का कार्य करते है। सरकार कोसीवासियो को सुविधा देने के नाम पर कई माह पूर्व से ही तैयारी शुरु कर देती है। लेकिन जब बाढ़ आता है तो किसी तरह की तैयारी नहीं दिखती है। कोसी वासियों से सिर्फ वोट लिया जाता है, सुविधा देने के नाम पर सभी पीछे हट जाते है। हमारे वोट पर राज करने वाले मुखिया, सरपंच, समिति, प्रमुख, विधायक सहित सांसद बाढ़ के दोरान नदारद रहते है।
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| फोटो- कोसी की तेज धारा में पीरगंज के निकट पक्की सडक ध्वस्त |
वहीं आरडीओ अजीत कुमार एवं सीओ नागेन्द्र कुमार रस्तोगी ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा भारी वर्षा एवं बाढ़ की संभवना जताने के तुरंत बाद से ही कोसी तटबंध के अंदर के लोगों को अर्लट कर दिया गया था। इसके बावजूद लोग अपने घरबार छोरकर बाहर निकलना नहीं चाहते है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से निबटने के लिए चार दर्जन लकडी नाव एवं एक दर्जन मोटरवोट की तैनाती की गई है। सभी का रुट चार्ट तक तय कर दिया गया है, ताकि लोगों को दिक्कत न हो। नावो का सही परिचालन हो इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान रखने को कहा गया है साथ ही उंचे स्थान का चयन कर लिया गया है। जो लोग निकलता चाहते है वे निकल सकते है। उनके लिए सरकारी स्तर पर सभी तरह की व्यवस्थाएं की जाएगी।

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