बथनाहा (अररिया) (राज टाइम्स)।
कोविड 19 के संक्रमण से बचाव के लिए पूरे बिहार में तमाम तरह के प्रशाशनिक दावे किये जाते रहे हैं। लेकिन परिस्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार का आदेश था कि प्रत्येक व्यक्ति को सरकार उसके गृह जिला भेजेगी। सभी लोग वाहन सहित सीधे अपने गृह जिला पहुचेंगे। जहाँ कोरेण्टाइन सेन्टर पर उसकी जांच होगी। फिर उसे 21 दिन सेन्टर पर रहना होगा। उन सभी व्यक्ति को रास्ते में कहीं नही रुकना था। लेकिन सरकारी व्यवस्था की वजह से लोगों के समक्ष भुखमरी की समस्या गई और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए पैदल ही अपने गृह जिला की ओर निकलना पड़ रहा है।
ऐसा ही वाकया सोमवार की सुबह बथनाहा में देखने को मिला जब किशनगंज, पूर्णियां व पश्चिम बंगाल के मालदह जिला के 10-15 मजदूरों का एक समूह मुजफ्फरपुर से भीमपुर फांड़ी होते हुए अमौना गांव के रास्ते से होते हुए बथनाहा पहुंचा। मजदूरों के दर्द ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी है।
सोमवार की सुबह उक्त मजदूर बथनाहा पहुचे। जो रेल पटरी के माध्यम से अपने घर की ओर रवाना हो गए। उक्त मजदूरों से पुछने पर बताया कि वे लोग मुजफ्फरपुर मे राजमिस्त्री का काम करते थे, लॉक डाउन में काम पूरी तरह से ठप्प पर चुका था न खाने के लिए राशन ही बचा था और ना ही पैसे। किसी तरह सभी लोगो ने कुछ पैसे जुटा कर मुजफ्फरपुर में एक पिकअप चालक से बात की। उस गाड़ी ने 400 रुपये प्रति व्यक्ति अमौना तक पहुँचा दिया। बथनाहा से सभी मजदूर रेलवे लाइन पकड़ कर अपने गंतव्य के लिये निकल गए। मजदूरों ने यह भी बताया की लाॅकडाउन कब ख़त्म होगी। होगी या नहीं होगी यह कहना मुश्किल है। कई बार लाॅकडाउन की तिथि बढ़ाई गई है। इस परिस्थिति में बेरोजगार होने के बाद हमारे सामने भूखमरी की समस्या आ गई थी। इस वजह से हमें यह कदम उठाना पड़ा ताकि किसी तरह घर पहुँच सके।
कोविड 19 के संक्रमण से बचाव के लिए पूरे बिहार में तमाम तरह के प्रशाशनिक दावे किये जाते रहे हैं। लेकिन परिस्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार का आदेश था कि प्रत्येक व्यक्ति को सरकार उसके गृह जिला भेजेगी। सभी लोग वाहन सहित सीधे अपने गृह जिला पहुचेंगे। जहाँ कोरेण्टाइन सेन्टर पर उसकी जांच होगी। फिर उसे 21 दिन सेन्टर पर रहना होगा। उन सभी व्यक्ति को रास्ते में कहीं नही रुकना था। लेकिन सरकारी व्यवस्था की वजह से लोगों के समक्ष भुखमरी की समस्या गई और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए पैदल ही अपने गृह जिला की ओर निकलना पड़ रहा है।
ऐसा ही वाकया सोमवार की सुबह बथनाहा में देखने को मिला जब किशनगंज, पूर्णियां व पश्चिम बंगाल के मालदह जिला के 10-15 मजदूरों का एक समूह मुजफ्फरपुर से भीमपुर फांड़ी होते हुए अमौना गांव के रास्ते से होते हुए बथनाहा पहुंचा। मजदूरों के दर्द ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी है।
सोमवार की सुबह उक्त मजदूर बथनाहा पहुचे। जो रेल पटरी के माध्यम से अपने घर की ओर रवाना हो गए। उक्त मजदूरों से पुछने पर बताया कि वे लोग मुजफ्फरपुर मे राजमिस्त्री का काम करते थे, लॉक डाउन में काम पूरी तरह से ठप्प पर चुका था न खाने के लिए राशन ही बचा था और ना ही पैसे। किसी तरह सभी लोगो ने कुछ पैसे जुटा कर मुजफ्फरपुर में एक पिकअप चालक से बात की। उस गाड़ी ने 400 रुपये प्रति व्यक्ति अमौना तक पहुँचा दिया। बथनाहा से सभी मजदूर रेलवे लाइन पकड़ कर अपने गंतव्य के लिये निकल गए। मजदूरों ने यह भी बताया की लाॅकडाउन कब ख़त्म होगी। होगी या नहीं होगी यह कहना मुश्किल है। कई बार लाॅकडाउन की तिथि बढ़ाई गई है। इस परिस्थिति में बेरोजगार होने के बाद हमारे सामने भूखमरी की समस्या आ गई थी। इस वजह से हमें यह कदम उठाना पड़ा ताकि किसी तरह घर पहुँच सके।

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